यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की गवर्निंग काउंसिल के प्रमुख सदस्य योआचिम नागेल ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर वित्तीय बाजारों को एक स्पष्ट संदेश दिया है। शुक्रवार को अपने संबोधन में नागेल ने कहा कि मौद्रिक नीति में ढील देने या दरों में कटौती के संबंध में अटकलें लगाना फिलहाल बेहद जल्दबाजी होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि केंद्रीय बैंक के आगामी सभी नीतिगत कदम काफी हद तक आने वाले समय में ऊर्जा की कीमतों के रुख पर निर्भर करेंगे।
प्रतिबंधात्मक नीति की ओर बढ़ने का विकल्प खुला
योआचिम नागेल ने स्पष्ट किया कि यदि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का दबाव दोबारा उत्पन्न होता है, तो वह ब्याज दरों को मामूली प्रतिबंधात्मक दायरे में ले जाने की संभावना से इनकार नहीं करते हैं। उनके भाषण का विश्लेषण करने वाले सूचकांक में उन्हें 10 में से 7.1 अंक मिले हैं, जो ऐतिहासिक औसत 6.1 की तुलना में काफी सख्त रुख को दर्शाता है। इस सख्त रुख ने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना पर विराम लगा दिया है और यूरो में गिरावट पर दांव लगाने वाले निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
ऊर्जा की दरें और यूरो की मजबूती का समीकरण
मौद्रिक नीति को सीधे तौर पर ऊर्जा की कीमतों से जोड़कर नागेल ने यह साफ कर दिया है कि ईसीबी किसी भी संभावित मुद्रास्फीति जोखिम से निपटने के लिए तैयार है। दरों को सख्त बनाए रखने या आगे बढ़ाने की यह गुंजाइश यूरो मुद्रा को मजबूती प्रदान करती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस नीतिगत रुख के कारण जब भी यूरो में गिरावट आएगी, उसे कम ब्याज दर वाली अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले समर्थन मिलता रहेगा।
यूरोपियन सेंट्रल बैंक का ढांचा और लक्ष्य
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपियन सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन क्षेत्र के लिए केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। ईसीबी का प्राथमिक जनादेश यूरोज़ोन में मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2% के आसपास सीमित रखना है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए बैंक का सबसे प्रमुख हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें यूरो को मजबूत करती हैं, जबकि दरों में कटौती से यूरो पर दबाव बनता है।
ईसीबी की मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले इसकी गवर्निंग काउंसिल द्वारा लिए जाते हैं, जिसकी वर्ष में आठ बार बैठकें आयोजित की जाती हैं। इस परिषद में यूरोज़ोन के सभी सदस्य देशों के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के गवर्नर और छह स्थाई कार्यकारी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लागार्ड भी शामिल हैं।
गैर-पारंपरिक नीतियां: क्वांटिटेटिव ईज़िंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग
सामान्य परिस्थितियों में ब्याज दरों के इस्तेमाल के अलावा, चरम आर्थिक स्थितियों में ईसीबी विशेष मौद्रिक उपकरणों का उपयोग करता है। इसमें सबसे प्रमुख क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) है। इस प्रक्रिया में ईसीबी नई मुद्रा जारी करके बैंकों और वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है। इससे बाजार में तरलता बढ़ती है, जिससे आमतौर पर यूरो कमजोर होता है। ईसीबी ने 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट, 2015 के कम मुद्रास्फीति काल और कोविड महामारी के दौरान इस रास्ते को अपनाया था।
इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) वह प्रक्रिया है जो आर्थिक सुधार और बढ़ती मुद्रास्फीति के समय लागू की जाती है। QT के तहत ईसीबी नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और पुराने परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता है। इससे बाजार से अतिरिक्त नकदी वापस आ जाती है, जो सामान्य तौर पर यूरो के लिए सकारात्मक या तेजी का संकेत माना जाता है।
वैश्विक फॉरेक्स बाजार में अन्य मुद्राओं का हाल
ईसीबी के बयान के बीच वैश्विक मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी हलचल देखी गई
- ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD): शुक्रवार को एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के मध्य स्तर के पास स्थिर रहा। अमेरिका में जारी मजबूत पीपीआई आंकड़ों के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदों से अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ था, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट आई थी। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा सख्त नीति अपनाए जाने की उम्मीदों से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट थम गई।
- जापानी येन (USD/JPY): जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 154.00 के स्तर के पास कारोबार कर रहा था। जापान के उच्च पीपीआई आंकड़ों ने बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा दरों में बदलाव की संभावनाओं को बढ़ा दिया, जिससे येन को समर्थन मिला। हालांकि, अमेरिका के आगामी सीपीआई आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर में मजबूती बरकरार रहने से इस जोड़ी में बड़ी गिरावट नहीं आई।



















