वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं, क्योंकि दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंक अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। इस वित्तीय हलचल के केंद्र में बैंक ऑफ इंग्लैंड है, जो आज अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति का फैसला सुनाने जा रहा है। वित्तीय विश्लेषक इस बात का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं कि क्या यूनाइटेड किंगडम का केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने के दबाव का सामना करना जारी रख सकता है, खासकर तब जब देश में महंगाई का खतरा बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक आज होने वाली बैठक में दरों को यथावत रख सकता है, लेकिन आने वाले समय के लिए संकेत काफी सख्त होने की उम्मीद है।
ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई के दबाव में बैंक ऑफ इंग्लैंड
एमयूएफजी के डेरेक हैलपेनी ने इस बात पर जोर दिया है कि बाजार का ध्यान अब बैंक ऑफ इंग्लैंड पर केंद्रित हो गया है। हालांकि आज ब्याज दरों को बिना किसी बदलाव के रखने यानी होल्ड करने की उम्मीद है, लेकिन आने वाले समय में, विशेष रूप से नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी बढ़ गई है। जुलाई की शुरुआत से अब तक फ्रंट-मंथ प्राकृतिक गैस वायदा की कीमतों में लगभग 100 प्रतिशत की भारी तेजी आई है। थोक ऊर्जा कीमतों में इस उछाल का सीधा असर उपभोक्ताओं के बिलों पर पड़ेगा। जनवरी में यूनाइटेड किंगडम के ऊर्जा नियामक ओएफजीईएम द्वारा यूटिलिटी प्राइस कैप में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे सालाना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI महंगाई 4.0 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। इससे पहले अगस्त महीने के लिए सालाना आधार पर CPI महंगाई दर 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2.8 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक थी।
हॉकिश होल्ड का असर और आगामी ब्रिटिश बजट
यदि बैंक ऑफ इंग्लैंड हॉकिश होल्ड का रुख अपनाता है, तो इससे नवंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को बल मिलेगा। इस फैसले से शॉर्ट-टर्म बॉन्ड यील्ड पर थोड़ा ऊपर की ओर दबाव पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि निवेशक दिसंबर तक लगातार होने वाली बढ़ोतरी को बाजार की कीमतों में शामिल करने लगेंगे। वर्तमान में बाजार में दिसंबर तक करीब 39 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस सख्त रुख से ब्रिटिश पौंड को कुछ समय के लिए सहारा मिल सकता है, लेकिन विश्लेषक 28 अक्टूबर को पेश होने वाले आगामी ब्रिटिश बजट से पहले पौंड में किसी भी बड़ी तेजी को लेकर आशंकित हैं। निवेशक इस बजट के राजकोषीय प्रस्तावों को देखने के बाद ही कोई बड़ा कदम उठाना पसंद करेंगे।
अमेरिकी डॉलर की नरमी और आरबीए के सख्त रुख से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा
इस बीच, गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर से 0.7100 के स्तर को पार करने में सफल रहा। इस सुधार की मुख्य वजह यह रही कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण डॉलर में जो जबरदस्त तेजी चल रही थी, वह फिलहाल थम गई है। इससे पहले डॉलर जुलाई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। अमेरिकी डॉलर में आई इस रुकावट के अलावा, जोखिम वाली मुद्राओं में शामिल ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को घरेलू कारकों से भी मजबूती मिल रही है। निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद जता रहे हैं। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक बातचीत शुरू होने की उम्मीदों ने भी वैश्विक स्तर पर निवेशकों के जोखिम उठाने की क्षमता को बढ़ाया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला है।
जापानी येन की वापसी और बैंक ऑफ जापान के फैसले का इंतजार
एशियाई सत्र में USD/JPY करेंसी पेयर में भी गिरावट देखी गई और यह कुछ समय के लिए 156.00 के स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट ने जापानी येन के मुकाबले डॉलर की लगातार तीन दिनों की तेजी पर लगाम लगा दी, जिसने पिछले कारोबारी दिन येन को करीब दो सप्ताह के निचले स्तर पर धकेल दिया था। फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचे अमेरिकी डॉलर की रफ्तार थोड़ी धीमी होने से जापानी मुद्रा को राहत मिली है। इसके अलावा, बाजार अब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों को लेकर भी उम्मीदें लगा रहा है। सभी की निगाहें अब शुक्रवार को होने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर टिकी हैं, जिससे इस करेंसी पेयर की बढ़त फिलहाल सीमित बनी हुई है।
भू-राजनीतिक तनाव के बीच छह सप्ताह के निचले स्तर के करीब संभला सोना
सोने की कीमतों में भी कुछ सुधार देखा गया और गुरुवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले यह फिर से 4,300 डॉलर के स्तर को पार कर गया। हालांकि, पीली धातु अभी भी बुधवार को छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर के काफी करीब बनी हुई है। जुलाई के अंत के बाद से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे अमेरिकी डॉलर में आई हल्की गिरावट ने सोने को थोड़ा सहारा दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का भविष्य को लेकर सख्त रुख सोने की बढ़त के लिए एक बड़ी रुकावट बना हुआ है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों के कारण बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों को अपने पास रखने की लागत बढ़ जाती है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग बनी हुई है, जिससे इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं आ रही है।
जापान में सस्ते कर्ज के युग का अंत और वैश्विक बाजारों पर इसका प्रभाव
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से जापान की बेहद कम ब्याज दरों की नीति ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अत्यंत कम ब्याज दरों पर कर्ज मिलने के कारण जापानी येन दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश के लिए फंडिंग का सबसे सस्ता माध्यम बन गया था, जिसे कैरी ट्रेड के रूप में जाना जाता है। जब दुनिया की लगभग सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने महामारी के बाद बढ़ी महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक रूप से बढ़ोतरी की, तब भी जापान इस मामले में एक अपवाद बना रहा और उसने अपनी दरें बेहद कम रखीं। हालांकि, अब इस बात की उम्मीदें बढ़ रही हैं कि बैंक ऑफ जापान इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को फिर से सख्त कर सकता है। इसके साथ ही येन के जरिए मिलने वाले सस्ते कर्ज का यह ऐतिहासिक दौर अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसका वैश्विक निवेश और संपत्ति बाजारों पर गहरा असर पड़ सकता है।


















