एशियाई सत्र में गुरुवार को जापानी येन ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ी मजबूती दिखाई, हालांकि डॉलर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ताज़ा फैसले के बाद सहारा मिला हुआ था। USD/JPY पिछले 3 दिनों की तेजी के बाद बने लगभग 2 सप्ताह के उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आ गया और पिछले दिन की कमाई का एक हिस्सा गंवा बैठा। स्पॉट कारोबार लगभग 156.00 के आसपास था, इसलिए यह साफ था कि जोड़े की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन गिरावट अभी गहरी नहीं हुई। अब बाजार की पूरी नज़र शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर फैसले पर है।
इस हिलचल के पीछे दो विपरीत ताकतें काम कर रही थीं। बैंक ऑफ जापान से और सख्त नीति की उम्मीद ने येन को सहारा दिया और USD/JPY की ऊपरी दिशा पर रोक लगाई, वहीं डॉलर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त रूख और मध्य पूर्व के तनाव से मदद मिल रही थी। नतीजे के तौर पर जोड़े ने बड़ा उलटफेर करने के बजाय सिर्फ हल्की वापसी की। अब सवाल यही है कि जापान की नई दर येन को कितना अतिरिक्त सहारा दे पाती है और डॉलर की मौजूदा मजबूती कितनी देर बनी रहती है।
बाजार 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी को लेकर लगभग एकमत
बैंक ऑफ जापान से सितंबर की नीति बैठक समाप्त होने पर बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की लगभग सार्वभौमिक उम्मीद है। इससे दर 1.25% पर पहुंच जाएगी, जो 31 साल के उच्च स्तर होगी। यह कदम जापान की लंबे समय से चल रही बेहद ढीली मौद्रिक नीति से दूरी के क्रम को और मजबूत करेगा। जापानी दरें बढ़ने से अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले येन की उपज कम रहने का अंतर घट सकता है, इसलिए निवेशकों ने इसे येन के लिए सहायक माना। यही कारण है कि डॉलर मजबूत रहने के बावजूद USD/JPY अपने 3 दिनों वाले सफर को आगे नहीं बढ़ा पाया।
निवेशक केवल शुक्रवार के फैसले तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से जापान में महंगाई का जोखिम बढ़ा है, और इसी ने दिसंबर में एक और बढ़ोतरी की संभावना को बढ़ा दिया है। इसलिए बाजार सितंबर की बैठक को अलग घटना की तरह नहीं देख रहा। ट्रेडर नीति को सामान्य करने के पूरे रास्ते को नए सिरे से परख रहे हैं, और हर संभावित अगले कदम से येन को सहारा मिलने की उम्मीद मजबूत हो रही है।
येन के लिए असली अहमियत केवल एक बैठक नहीं, बल्कि आगे की नीति की दिशा है। दर बढ़ने से येन पकड़े रखना अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकता है, खासकर जब ट्रेडर और बढ़ोतरी की संभावना देखें। डॉलर की तरफ सहारा अमेरिकी केंद्रीय बैंक की कसाव और ज्योपॉलिटिकल तनाव के समय सुरक्षा की मांग से आ रहा है। इसी लिए जोड़ा तब भी नीचे आ सकता है जब डॉलर अपने आप में कमजोर न हो।
ऊर्जा कीमतें और मजदूरी की उम्मीद ने महंगाई का माहौल बदला
येन की कमजोरी महंगाई की समस्या का सिर्फ एक पहलू थी। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल ने भी जापानी महंगाई को बढ़ाया और इसे बैंक ऑफ जापान के 2% लक्ष्य से ऊपर ले गया। मजदूरी बढ़ने की संभावना ने भी योगदान दिया, क्योंकि आय में वृद्धि घरेलू खर्च और कीमतों के दबाव को बनाए रख सकती है। कमजोर मुद्रा, महंगी ऊर्जा और बेहतर वेतन की उम्मीद ने मिलकर महंगाई को लक्ष्य से ऊपर टिकने में मदद की।
इसी पृष्ठभूमि में ऊर्जा से जुड़ी महंगाई की आशंका दिसंबर के आकलन के लिए अहम है। यदि ऊर्जा की ऊंची कीमतें कीमतों को और ऊपर धकेलती हैं, तो सितंबर की बैठक के बाद एक और दर वृद्धि का मामला मजबूत होता है। सख्त नीति की ओर बाजार का नया आकलन तुरंत की नीति उम्मीद और महंगाई के व्यापक हालात, दोनों से जुड़ा है। इसी लिए येन को सहारा मिल सका, भले ही डॉलर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक और मध्य पूर्व के तनाव से मदद मिल रही हो।
बरसों की ढील की नीति ने येन की कमजोरी को बढ़ाया
बैंक ऑफ जापान ने 2013 में बेहद ढीली मौद्रिक नीति शुरू की थी। मकसद अर्थव्यवस्था को गति देना और कम महंगाई वाले माहौल में कीमतों को बढ़ाना था। इसकी नीति क्वांटिटेटिव एंड क्वालिटेटिव ईजिंग, यानी QQE, पर आधारित थी। सरल शब्दों में, इसका मतलब था नोट छापकर सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी संपत्तियां खरीदना, ताकि बाजार में तरलता बढ़े।
2016 में बैंक ने इसी रणनीति को और आगे बढ़ाया। पहले नकारात्मक ब्याज दरें लागू कीं, फिर 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड को सीधे नियंत्रित किया। इन कदमों ने वित्तीय हालात को बेहद आसान रखा और जापान तथा उन अर्थव्यवस्थाओं के बीच नीतिगत अंतर को बढ़ाया, जो उल्टी दिशा में चल रही थीं। भारी प्रोत्साहन से येन अपनी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ।
यह कमजोरी 2022 और 2023 में और स्पष्ट हो गई। अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने कई दशकों के उच्च स्तर पर फैली महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरें तेजी से बढ़ाईं, जबकि बैंक ऑफ जापान का रूख काफी ढीला बना रहा। इससे मुद्राओं के बीच दरों का अंतर चौड़ा हुआ और येन का मूल्य नीचे आया। 2024 में यह रुझान कुछ हद तक पलटा, जब बैंक ऑफ जापान ने बेहद ढीली नीति छोड़ी और मार्च 2024 में ब्याज दरें बढ़ाईं।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक का फैसला डॉलर को दे रहा है सहारा
डॉलर की तस्वीर अभी भी मजबूत है। अमेरिकी मुद्रा ने बुधवार को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सख्त दर बढ़ोतरी के बाद जुलाई के अंत से अपना नया उच्च स्तर छुआ। यह 3 साल से अधिक समय में उधार लागत में पहली बढ़ोतरी थी। साथ ही डॉट प्लॉट ने इसी साल ब्याज दर में एक और वृद्धि का संकेत दिया। इन दोनों बातों ने डॉलर में तेजी रखने वालों को आत्मविश्वास दिया।
तेल से जुड़ी महंगाई की आशंका ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक के आगे और कसाव की संभावना को भी सहारा दिया। जब ऊर्जा कीमतें महंगाई को लंबे समय तक ऊपर रखने की चिंता बढ़ाती हैं, तो बाजार अधिक सख्त नीति की उम्मीद करने लगता है, और यह रूख डॉलर के पक्ष में जाता है। USD/JPY के लिए इसका मतलब था कि येन की मजबूती के बावजूद जोड़े की गिरावट सीमित रही। डॉलर को सख्त नीति, ऊंची दरों का आकलन और सुरक्षित संपत्ति की मांग, तीनों से मदद मिल रही थी।
मध्य पूर्व के तनाव ने डॉलर की भूमिका और मजबूत की
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने सुरक्षित मानी जाने वाली अमेरिकी मुद्रा को अतिरिक्त सहारा दिया। ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने कहा कि सऊदी विमानों ने पिछले सप्ताह यमन में 450 से अधिक एयर स्ट्राइक किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने मारिब प्रांत में सऊदी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया। यह दावा क्षेत्रीय अस्थिरता को ताज़ा रखता है और मुद्रा बाजार में ज्योपॉलिटिकल जोखिम के प्रीमियम को बनाए रखता है।
जोखिम बढ़ने पर निवेशक अक्सर उन संपत्तियों की ओर जाते हैं जिन्हें वे अधिक तरल और सुरक्षित मानते हैं। इस प्रक्रिया में डॉलर को फायदा मिल सकता है, भले ही कोई दूसरा केंद्रीय बैंक नीति को कस रहा हो। USD/JPY में इसका असर नीचे की ओर गिरावट को सीमित करने के रूप में दिखा। येन ने जो स्थान बनाया था, उसे डॉलर की सुरक्षित संपत्ति वाली मांग ने पूरी तरह खुलने नहीं दिया।
तकनीकी स्तर बताते हैं कि तेजी अभी नाज़ुक है
व्यापक तकनीकी संरचना सावधानी की मांग करती है। जब तक चक्र के शीर्ष से चल रहा करेक्शन जारी है, USD/JPY की रैली नई बिकवाली के प्रति कमजोर रहेगी। नीचे की ओर पहला समर्थन 38.2% रिट्रेसमेंट पर 155.78 पर मिलता है। उसके बाद 23.6% स्तर 154.68 पर है, और गहरी वापसी की सूरत में 152.91 के आसपास का संरचनात्मक फर्श सामने आ सकता है।
ये स्तर ट्रेडरों को यह आंकने में मदद करते हैं कि मौजूदा हिलचल सिर्फ छोटा विराम है या बड़े करेक्शन की शुरुआत। जोड़ा अभी भी 156.00 के आसपास है, इसलिए अगला महत्वपूर्ण संकेत यह होगा कि बैंक ऑफ जापान का फैसला इसे पहले समर्थन की ओर ले जाता है या डॉलर की मांग इसे वहां से ऊपर रखती है। तकनीकी चित्र नीतिगत अनिश्चितता को खत्म नहीं करता, लेकिन बिकवाली के दबाव को पहचानने के लिए स्पष्ट बिंदु देता है।
यह अंतर अहम है क्योंकि मुद्रा जोड़ा दोनों मुद्राओं की सापेक्ष ताकत दिखाता है। USD/JPY तब भी गिर सकता है जब येन बेहतर करे और डॉलर को अपने केंद्रीय बैंक तथा सुरक्षित संपत्ति के प्रवाह से सहारा मिलता रहे। वहीं डॉलर की मांग बढ़ने पर जोड़ा रुक या ऊपर भी जा सकता है। इसलिए मौजूदा हालात में केवल डॉलर या केवल येन में से किसी एक की कहानी देखना पर्याप्त नहीं होगा।
बैंक ऑफ जापान का काम और लक्ष्य क्या है
बैंक ऑफ जापान जापान का केंद्रीय बैंक है और देश की मौद्रिक नीति तय करने वाली संस्था है। इसका काम बैंकनोट जारी करना और कीमतों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मुद्रा तथा मौद्रिक नियंत्रण करना है। इसका महंगाई लक्ष्य लगभग 2% है। ब्याज दर के फैसले उधार की शर्तों, मुद्रा के मूल्य और भविष्य की कीमतों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित करते हैं, इसलिए इस बैठक का महत्व सिर्फ सरकारी बॉन्ड बाजार तक सीमित नहीं है।
इस मौके पर बैठक खास इसलिए है क्योंकि यह बेहद ढीली नीति से निकलने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है। 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी से दर 1.25% हो जाएगी और यह संकेत मजबूत होगा कि जापानी दरें ऊपर की ओर बढ़ रही हैं, जबकि महंगाई पहले ही लक्ष्य से ऊपर है। इससे ट्रेडरों को दिसंबर में अगले कदम की संभावना तय करने में भी मदद मिलेगी।
USD/JPY के सामने अगली बड़ी परीक्षा
अगली महत्वपूर्ण घटना शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान का फैसला है। बाजार को 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी से दर को 1.25% तक ले जाने की उम्मीद है, लेकिन असली सवाल यह है कि बैंक आगे और कसाव की कितनी स्पष्ट संभावना देता है। मजबूत संकेत मिलने पर येन को सहारा मिलेगा और 156.00 से नीचे के तकनीकी स्तरों की परीक्षा बढ़ सकती है। सावधान रूख मिलने पर डॉलर की ताज़ा मजबूती और सुरक्षित संपत्ति की मांग को वापस प्रभावी होने का अधिक मौका मिलेगा।
फिलहाल USD/JPY की 3 दिनों की तेजी की लड़ी टूट चुकी है, पिछले दिन की कमाई का कुछ हिस्सा वापस गया है और स्पॉट कीमत 156.00 के आसपास है। डॉलर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की 3 साल से अधिक समय बाद पहली दर वृद्धि, डॉट प्लॉट में इसी साल एक और बढ़ोतरी का संकेत और मध्य पूर्व के जोखिम से सहारा मिल रहा है। दूसरी ओर येन को सितंबर में उम्मीद की गई बढ़ोतरी, 2% से ऊपर महंगाई, बेहतर मजदूरी की संभावना और दिसंबर में अगले कदम की संभावना से मदद मिल रही है। इसलिए अगला रुख एक ही मुद्रा की कहानी से नहीं, बल्कि दोनों केंद्रीय बैंकों के संकेतों से तय होगा।



















