चेक नेशनल बैंक (CNB) आज अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने जा रहा है। वित्तीय बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेगा। कमर्जबैंक के विश्लेषक माइकल फिफ्स्टर के अनुसार, चेक नेशनल बैंक का यह फैसला ब्लूमबर्ग के आम सहमति और बाजार के मौजूदा अनुमानों के बिल्कुल अनुकूल होने की उम्मीद है। हालांकि चेक रिपब्लिक में हाल के दिनों में मुद्रास्फीति यानी महंगाई दर में तेजी देखी गई है, लेकिन इसके बावजूद नीति निर्माता वर्तमान मौद्रिक नीति को पर्याप्त रूप से प्रतिबंधात्मक मान रहे हैं। केंद्रीय बैंक के इस कड़े या हॉकिश रुख के कारण आने वाले समय में चेक कोरुना (CZK) को काफी सहारा मिलने की उम्मीद है।
चेक नेशनल बैंक का नीतिगत फैसला और बाजार की उम्मीदें
चेक नेशनल बैंक आज दोपहर को अपनी ब्याज दरों से जुड़े फैसलों की घोषणा करेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा में बहुत अधिक चौंकाने वाले बदलाव देखने को नहीं मिलेंगे। ब्लूमबर्ग द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में शामिल सभी अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया है कि ब्याज दरों को पूरी तरह से यथावत रखा जाएगा। वित्तीय बाजारों ने भी इस फैसले को पहले ही पूरी तरह से अपने आकलनों में शामिल कर लिया है।
यद्यपि हाल ही में सामने आए मुद्रास्फीति के आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे सैद्धांतिक रूप से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तात्कालिकता बढ़ जाती है, लेकिन केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के हालिया बयानों से यह संकेत मिलता है कि उनकी वर्तमान मौद्रिक नीति मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए अभी भी पर्याप्त रूप से कड़ी है। इस वजह से बैंक फिलहाल दरों में तुरंत बदलाव करने के बजाय इंतजार करने की रणनीति अपना सकता है।
क्षेत्रीय मुद्राओं की तुलना में कोरुना की स्थिति
पोलैंड और हंगरी के केंद्रीय बैंकों की तुलना में चेक नेशनल बैंक का रुख काफी कड़ा यानी हॉकिश नजर आ रहा है। माइकल फिफ्स्टर का तर्क है कि इस हॉकिश दृष्टिकोण के कारण आने वाले महीनों में चेक कोरुना को अन्य क्षेत्रीय मुद्राओं की तुलना में बढ़त हासिल हो सकती है। यह कड़ा रुख चेक कोरुना को एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।
हालांकि इस परिदृश्य में एकमात्र चिंता बाजार की अत्यधिक उम्मीदें हैं। वित्तीय बाजार वर्तमान में चेक नेशनल बैंक द्वारा अगले बारह महीनों के भीतर नीतिगत दरों में करीब 125 बेसिस पॉइंट्स तक की बढ़ोतरी या सख्ती की उम्मीद कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार का यह अनुमान जरूरत से ज्यादा हो सकता है, जिससे आने वाले समय में नीतिगत तालमेल बिठाने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) ने फिर से मजबूती पकड़ी है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD जोड़ी नए खरीदारों को आकर्षित करने में सफल रही और फिर से 0.7100 के स्तर को पार कर गई। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी डॉलर की मजबूत रैली पर थोड़ा विराम लगा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) के कड़े रुख के कारण अमेरिकी डॉलर पिछले दिनों जुलाई के अंत के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि अब इस तेजी के थमने और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को बल मिला है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार में जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी संवेदनशील मुद्राओं को समर्थन मिला है।
जापानी येन और बैंक ऑफ जापान की रणनीति
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान USD/JPY जोड़ी में गिरावट देखी गई और यह कुछ समय के लिए 156.00 के स्तर से नीचे चली गई। इसके साथ ही इस जोड़ी की पिछले तीन दिनों से जारी लगातार तेजी पर भी विराम लग गया है, जिसने इसे करीब दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया था। अमेरिकी डॉलर में आई इस मामूली गिरावट के बीच जापानी येन को बैंक ऑफ जापान (BOJ) की मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की उम्मीदों से सहारा मिला है।
जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीति को फिर से सख्त करने की उम्मीदें जताई जा रही हैं, यह ऐतिहासिक स्थिति एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले दिनों ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की, वहीं जापान वैश्विक स्तर पर इस मामले में एक अपवाद बना रहा था, लेकिन अब वहां भी बदलाव के संकेत हैं।
सोने के बाजार में हलचल और सुरक्षित निवेश की मांग
वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी सुधार देखा गया है। गुरुवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले सोना एक बार फिर $4,300 के स्तर से ऊपर चढ़ने में कामयाब रहा। हालांकि, यह अभी भी पिछले कारोबारी सत्र में छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर के बेहद करीब बना हुआ है।
अमेरिकी डॉलर के सूचकांक में जुलाई के अंत के बाद से बने उच्चतम स्तर से आई मामूली गिरावट ने सोने को कुछ राहत दी है। इसके बावजूद, फेडरल रिजर्व का भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सख्त रवैया और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव सोने की कीमतों को एक सीमित दायरे में रख रहे हैं। मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में लगातार समर्थन मिल रहा है, जो इसकी कीमतों में बड़ी गिरावट को रोकने में मददगार साबित हो रहा है।



















