अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की चाल इस समय एक सीमित दायरे में कैद नजर आ रही है, जहां खरीदारों के प्रयास 68.00 डॉलर के कड़े प्रतिरोध स्तर से ठीक पहले थम रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बढ़ती आक्रामकता के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। तकनीकी मोर्चे पर हालांकि बुनियादी रुझान पूरी तरह नकारात्मक नहीं हुआ है, लेकिन तेजी का मोमेंटम लगातार कमजोर पड़ता दिख रहा है। वर्तमान में चांदी 66.24 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही है, जबकि ताजा बाजार सत्र में यह 66.73 डॉलर तक पहुंची है, जो पिछले बंद भाव 65.93 डॉलर से 1.21 प्रतिशत की बढ़त दर्शाती है। इसके बावजूद 62.00 डॉलर से लेकर 68.00 डॉलर के दायरे में कीमतों का यह कंसोलिडेशन साफ दिखाता है कि बाजार में दोनों तरफ से अनिर्णय की स्थिति बनी हुई है।
तकनीकी संकेतकों में अनिर्णय और अहम तकनीकी स्तर
चार घंटे के चार्ट पर मोमेंटम संकेतक किसी स्पष्ट दिशा का अभाव दिखा रहे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 50 के मध्य रेखा के करीब पहुंच रहा है, जबकि दैनिक डेटा में 14 दिवसीय RSI 55 पर स्थित है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD शून्य रेखा के इर्द-गिर्द मंडरा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार MACD 0.33 पर है जो सिग्नल लाइन 0.37 के मुकाबले -0.04 का मंदी का हिस्टोग्राम दर्शा रहा है। औसत दिशात्मक सूचकांक यानी ADX का स्तर 15 पर है, जो स्पष्ट करता है कि बाजार में कोई मजबूत ट्रेंड नहीं है बल्कि कीमतें रेंजबाउंड व्यवहार कर रही हैं। बोलिंगर बैंड्स 62.79 डॉलर से 68.97 डॉलर के बीच फैले हैं और भाव 65.88 डॉलर की मध्य रेखा के भीतर ही बने हुए हैं। स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 73 और सिग्नल लाइन 62 पर है, जबकि 14 दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज यानी ATR 1.62 डॉलर पर दैनिक अस्थिरता का संकेत दे रहा है। पिवट पॉइंट 67.15 डॉलर पर है, जिसके ऊपर पहला प्रतिरोध R1 67.64 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 68.54 डॉलर पर स्थित है, जबकि नीचे की ओर पहला समर्थन S1 66.25 डॉलर और S2 65.76 डॉलर पर मौजूद है।
तेजी और मंदी के प्रमुख तकनीकी पड़ाव
ऊपर की ओर तेजड़ियों के लिए 68.00 डॉलर का क्षेत्र सबसे बड़ी रुकावट साबित हुआ है, जिसने सितंबर के महीने में कई बार उछाल को आगे बढ़ने से रोका है। यदि खरीदार इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल होते हैं, तो अगला लक्ष्य अगस्त के अंत और जून के मध्य के उच्च स्तर हो सकते हैं, जो 71.12 डॉलर से 71.56 डॉलर के दायरे में हैं। पिछले 20 दिनों का प्रमुख प्रतिरोध स्तर 71.16 डॉलर के करीब आंका गया है। इसके विपरीत, यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो निकटतम समर्थन मंगलवार के निचले स्तर यानी लगभग 64.60 डॉलर के पास मिलेगा। इसके बाद मौजूदा कंसोलिडेशन रेंज का निचला सिरा 62.30 डॉलर के क्षेत्र में आता है, जो 14 और 16 सितंबर के निचले स्तरों से मेल खाता है। 20 दिनों का आधार समर्थन 63.02 डॉलर के आसपास है। यदि कीमतें 62.30 डॉलर के स्तर को निर्णायक रूप से तोड़ती हैं, तो यह एक बड़े हेड एंड शोल्डर्स यानी H&S पैटर्न को सक्रिय कर देगा। इस पैटर्न के सक्रिय होने से मंदी का दबाव काफी बढ़ सकता है, जिससे कीमतें 6 अगस्त के निचले स्तर 60.90 डॉलर और फिर 4 अगस्त के निचले स्तर 59.00 डॉलर के मध्य तक फिसल सकती हैं। पिछले 52 हफ्तों के दौरान चांदी का दायरा 43.70 डॉलर से 121.30 डॉलर के बीच रहा है, जबकि वर्तमान में 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 65.12 डॉलर और 200 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 66.86 डॉलर के स्तर पर डेथ क्रॉस के कारण लंबी अवधि का रुझान नीचे की ओर झुका हुआ है।
निवेश साधन के रूप में चांदी की भूमिका और मूल्य निर्धारण
चांदी वैश्विक वित्तीय बाजारों में निवेशकों द्वारा व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली एक बहुमूल्य धातु है। ऐतिहासिक रूप से इसे मूल्य के भंडारण और विनिमय के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। यद्यपि यह सोने जितनी लोकप्रिय नहीं है, फिर भी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके आंतरिक मूल्य का लाभ उठाने या उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव यानी हेज के तौर पर चांदी का रुख करते हैं। निवेशक इसे सिक्कों और सिल्लियों के रूप में भौतिक तौर पर खरीद सकते हैं, या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों पर नजर रखने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF जैसे वित्तीय माध्यमों के जरिए इसमें निवेश कर सकते हैं। चांदी की कीमतों पर कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक असर डालते हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता या गंभीर आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी की सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन मांग को बढ़ा देती हैं, हालांकि सोने की तुलना में इसका प्रभाव थोड़ा कम होता है। चूंकि इस धातु पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलती, इसलिए ब्याज दरों में कटौती का माहौल इसके लिए अनुकूल होता है, जबकि दरें बढ़ने पर इस पर दबाव आता है।
अमेरिकी डॉलर का प्रभाव और खनन आपूर्ति का ढांचा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का मूल्य निर्धारण अमेरिकी डॉलर में XAG/USD के रूप में होने के कारण ग्रीनबैक की चाल इसकी कीमतों को सीधे तय करती है। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर चांदी की कीमतों पर अंकुश लगाता है, जबकि कमजोर डॉलर इसकी कीमतों को ऊपर की ओर धकेलता है। इसके अतिरिक्त, निवेश मांग, खनन उत्पादन और रीसाइक्लिंग दरें भी इसके मूल्य को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि भूगर्भीय रूप से चांदी की आपूर्ति सोने की तुलना में कहीं अधिक प्रचुर है, जिससे इसकी उपलब्धता और खनन लागत के समीकरण सोने से अलग होते हैं। सोने और चांदी का अनुपात यानी गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी निवेशकों के लिए दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन का एक प्रमुख पैमाना है। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने का मूल्य चुकाने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी। बाजार विश्लेषक अक्सर इस अनुपात के अत्यधिक ऊंचे होने को इस बात का संकेत मानते हैं कि चांदी का अवमूल्यन हुआ है या सोना अधिक महंगा हो गया है, जबकि अनुपात के निचले स्तर पर आने का मतलब चांदी के मुकाबले सोने का सस्ता होना माना जाता है।
औद्योगिक उपयोगिता और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं का असर
सोने के विपरीत, चांदी की आधी से अधिक मांग इसके औद्योगिक उपयोग से पैदा होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में चांदी की खपत सबसे अधिक होती है, क्योंकि तांबे और सोने की तुलना में भी इसकी विद्युत चालकता दुनिया के सभी धातुओं में सबसे अधिक मानी जाती है। जब वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में तेजी आती है, तो चांदी की मांग में उछाल इसकी कीमतों को सहारा देता है, जबकि औद्योगिक मंदी में भाव तेजी से नीचे आते हैं। अमेरिका, चीन और भारत की आर्थिक परिस्थितियां चांदी के उतार-चढ़ाव में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी का उपभोग करते हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय बाजार में आभूषणों, बर्तनों और घरेलू निवेश के रूप में चांदी की मजबूत उपभोक्ता मांग अंतरराष्ट्रीय कीमतों के स्तर को तय करने में निर्णायक साबित होती है।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और अन्य बाजारों की हलचल
व्यापक वित्तीय बाजारों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर इंडेक्स के 30 जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचने का असर सोने पर भी देखा जा रहा है। सोना पिछले सत्र में 4,300 डॉलर के नीचे से सुधरने के बाद एशियाई सत्र में फिर से नई बिकवाली का सामना कर रहा है। मुद्रा बाजार में बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान AUD/USD 0.7100 के स्तर का परीक्षण कर रहा है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र संकुचन में चला गया और सेवा क्षेत्र लगातार दूसरे महीने धीमी गति से बढ़ा। उधर USD/JPY 157.00 के मध्य क्षेत्र में मंडरा रहा है, जहां बैंक ऑफ जापान द्वारा अल्पकालिक ब्याज दर 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने के बावजूद येन पर दबाव बना हुआ है। भू-राजनीति के मोर्चे पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वाशिंगटन में एक अहम शिखर सम्मेलन के लिए मिलने वाले हैं, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव और संभावित आर्थिक समझौतों की दिशा तय करेगा। वहीं क्रिप्टो बाजार में कार्डानो यानी ADA इस सप्ताह 14 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 0.262 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है। इन सभी वैश्विक घटनाक्रमों के बीच चांदी के ट्रेडर्स आगामी आर्थिक आंकड़ों और मौद्रिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
















