वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3300 के मनोवैज्ञानिक स्तर से वापसी के संकेत दिए हैं। हालांकि इस शुरुआती उछाल के बावजूद खरीदारों में आगे की तेजी को लेकर स्पष्ट हिचकिचाहट देखी जा रही है। 23 सितंबर के बाद के अपने उच्चतम स्तर से पिछले शुक्रवार को दर्ज की गई मामूली गिरावट के बाद यह जोड़ी फिलहाल 1.3330 के आसपास लगभग स्थिर रुख के साथ कारोबार कर रही है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का दबाव अब थमता दिखाई दे रहा है।
तकनीकी प्रतिरोध और मंदी के संकेत
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी जोड़ी अभी भी 1.3390 पर स्थित अपने 100 दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और 1.3406 पर स्थित 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर से नीचे बनी हुई है। इन अहम स्तरों से नीचे बने रहने के कारण पाउंड का व्यापक रुझान दबाव में दिखता है। इसके अलावा 1.3343 पर मौजूद 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट का स्तर भी तत्काल प्रतिरोध पैदा कर रहा है। जब तक हाजिर कीमतें इस घने प्रतिरोध दायरे को पार नहीं करतीं, तब तक किसी भी बड़ी रैली की संभावना सीमित नजर आती है।
लाइव तकनीकी संकेतकों के अनुसार रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 53 के स्तर पर है, जो तटस्थ से संतुलित स्थिति दर्शाता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस में हल्का सकारात्मक रुझान बना हुआ है, जबकि 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.33 और 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.34 के स्तर पर स्थित हैं। 52 सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच बना हुआ है, जहां 1.31 का स्तर मजबूत सपोर्ट और 1.34 का दायरा कड़े प्रतिरोध का काम कर रहा है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति की भूमिका
ब्रिटिश पाउंड के मूल्य को तय करने वाला सबसे अहम कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने फैसलों को मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य पर केंद्रित रखता है, जिसका मानक करीब 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर हासिल करना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य हथियार ब्याज दरों का समायोजन है।
जब मुद्रास्फीति बहुत अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा करता है ताकि मांग पर लगाम लगाई जा सके। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक साबित होती हैं, क्योंकि यह वैश्विक निवेशकों को यूनाइटेड किंगडम में पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति अत्यधिक नीचे गिरती है तो यह आर्थिक सुस्ती का संकेत माना जाता है, जिससे निपटने के लिए केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करता है ताकि उद्योग सस्ते कर्ज लेकर विकास परियोजनाओं में निवेश कर सकें। मौजूदा बाजार में नवंबर में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के कयास पाउंड के लिए मददगार बने हुए हैं।
आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन का प्रभाव
अर्थव्यवस्था की वास्तविक सेहत को आंकने वाले आंकड़े भी पाउंड स्टर्लिंग की चाल पर गहरा असर डालते हैं। सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े तथा रोजगार के स्तर सीधे तौर पर मुद्रा के रुख को प्रभावित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि केंद्रीय बैंक को सख्त नीति अपनाने की गुंजाइश भी देती है, जिससे पाउंड मजबूत होता है। कमजोर आर्थिक आंकड़े इसके विपरीत दबाव पैदा करते हैं।
इसके अलावा व्यापार संतुलन भी एक महत्वपूर्ण कारक है, जो किसी अवधि में निर्यात से होने वाली आय और आयात पर किए गए खर्च के अंतर को दर्शाता है। जब किसी देश के निर्यातों की अंतरराष्ट्रीय मांग अधिक होती है, तो विदेशी खरीदारों को भुगतान के लिए घरेलू मुद्रा खरीदनी पड़ती है। नतीजतन, सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन उसे कमजोर करता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों की स्थिति
अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी सोमवार को खासी हलचल देखी गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट के सख्त बयानों के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रखी और 0.6900 के निचले स्तर से उबरकर तीन महीने के उच्च स्तर को छू लिया। चीन के आगामी वृहद आर्थिक आंकड़ों से पहले यह बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट ने डॉलर को दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित रखा, जिससे इस जोड़ी को समर्थन मिला।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी में एशियाई सत्र के दौरान बिकवाली देखने को मिली। बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा की टिप्पणियों और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप की अटकलों ने जापानी येन को मजबूत किया। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई, जहां कीमतें 4,200 डॉलर के स्तर को पार करने की तैयारी में हैं, हालांकि फेडरल रिजर्व की नीतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर का समर्थन सोने की एकतरफा तेजी को सीमित कर सकता है।






















