अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार इस समय एक जटिल और नाजुक संतुलन के दौर से गुजर रहा है, जहां आपूर्ति तंत्र की पुनर्बहाली के बावजूद कीमतों पर बना दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पश्चिम एशिया के प्रमुख समुद्री मार्गों और वैकल्पिक पाइपलाइनों के जरिए तेल का परिवहन युद्ध से पहले के स्तर पर जरूर आ चुका है, लेकिन लॉजिस्टिक्स में बनी रुकावटों के कारण बाजार में एक बड़ा रिस्क प्रीमियम लगातार हावी है। उच्च-आवृत्ति डेटा से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि सतह पर कच्चे तेल का सरप्लस दिखाई देने के बावजूद रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की भारी कमी पूरी वैश्विक व्यवस्था को असामान्य तनाव में रखे हुए है।
समुद्री परिवहन में फंसा कच्चा तेल और जमीन पर खाली होते भंडार
आपूर्ति और मांग के ताजा आंकड़ों का विश्लेषण करने पर एक विचित्र विसंगति सामने आती है। हाल के दिनों में तेल आपूर्ति और मांग के बीच लगभग 20 लाख से 30 लाख बैरल प्रतिदिन का अधिशेष बनता हुआ दिखा है। आमतौर पर इतने बड़े सरप्लस से बाजार में कीमतें घटनी चाहिए थीं, लेकिन यह अतिरिक्त तेल अभी केवल समुद्र में जहाजों पर ही जमा हो रहा है। इसके विपरीत, जमीन पर स्थित वाणिज्यिक भंडारण डिपो में तेल के स्टॉक में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे रिफाइनरियों और स्थानीय वितरकों के सामने भौतिक उपलब्धता की तात्कालिक समस्या जस की तस बनी हुई है।
टीडी सिक्योरिटीज के रयान मैके के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और जमीनी स्तर पर जोखिम लगातार महसूस किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और बाईपास पाइपलाइनों से कच्चे तेल की निकासी पहले जैसी हो जाने के बाद भी बाजार भाव नीचे नहीं आ रहे हैं। इस मजबूती के पीछे केवल मांग में सुधार ही नहीं, बल्कि परिष्कृत उत्पादों की तंग आपूर्ति और भू-राजनीतिक घटनाओं से उपजा सुरक्षा प्रीमियम सबसे प्रमुख कारक बनकर उभरा है।
लॉजिस्टिक्स के संकट और बुनियादी ढांचे पर लगातार हमले
सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर हूती विद्रोहियों के लगातार होते हमले और आईआरजीसी द्वारा वाणिज्यिक टैंकरों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने समुद्री माल ढुलाई के जोखिम को अत्यधिक बढ़ा दिया है। टैंकरों के रूट बदले जाने, बीमा लागत में भारी बढ़ोतरी होने और बंदरगाहों पर अनिश्चितता के कारण तेल अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। समुद्र में तैरता हुआ यह तेल तब तक व्यावहारिक रूप से अनुपयोगी रहता है जब तक कि यह तटीय टर्मिनलों पर खाली न हो जाए।
इसके अलावा, डाउनस्ट्रीम रिफाइनिंग क्षेत्र में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का बाजार 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक के घाटे में चल रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि डीजल, पेट्रोल और अन्य ईंधनों की भारी मांग को पूरा करने के लिए भविष्य में कच्चे तेल के बाजारों में दोबारा कसावट लानी पड़ सकती है, ताकि उत्पाद बाजार पर पड़ रहे असाधारण दबाव को कुछ हद तक संतुलित किया जा सके।
विदेशी मुद्रा बाजार पर ब्याज दरों और कूटनीति का असर
कच्चे तेल में जारी इस उठापटक के बीच मुद्रा बाजारों में भी मंगलवार को बड़ा फेरबदल देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ और एशियाई सत्र के दौरान दो सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) ने उम्मीद के अनुरूप नीतिगत ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की, लेकिन यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं लिया गया। बैंक के तीन सदस्य दरों को 4.60% पर ही स्थिर रखने के पक्ष में थे। इस आंतरिक असहमति ने आगे और दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को कमजोर कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर की मजबूती के साथ मिलकर इस मुद्रा जोड़ी पर दबाव बढ़ा दिया।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी एशियाई सत्र में नरम रुख के साथ कारोबार करती दिखी और पिछले सत्र में हासिल किए गए 158.00 के स्तर से थोड़ा नीचे आ गई। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले की अनिश्चितता और ईरान से कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों ने डॉलर को सीमित दायरे में बनाए रखा। हालांकि, जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के खतरे ने येन को सहारा दिया, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बने संशय ने इसकी बढ़त को सीमित कर दिया।
सोने में फिसलन और ईरान घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल में उछाल
कीमती धातुओं के बाजार में मंगलवार को सोने की चमक कुछ फीकी पड़ी। हाजिर सोना (XAU/USD) 0.93% की दैनिक गिरावट के साथ लगभग $3,909 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था। सोने में यह नरमी तब आई जब ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया। निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और ऊर्जा लागत में संभावित उछाल के बीच अपनी परिसंपत्ति आवंटन रणनीतियों को नए सिरे से आंक रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में छह सप्ताह के निचले स्तर की पड़ताल
डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी बिकवाली का स्पष्ट दबाव महसूस किया गया। बिटकॉइन मंगलवार को गिरकर $76,566 पर पहुंच गया, जहां इसने अपने छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण किया। प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी पर दबाव बढ़ने के साथ ही इथेरियम भी गिरावट के रुख के साथ एक सीमित सपोर्ट दायरे में जूझता दिखा। वहीं दूसरी ओर, रिपल की कीमत में मामूली ठहराव रहा और यह $1.25 के स्तर से थोड़ा ऊपर अपनी स्थिति बनाए रखने में कामयाब रहा।



















