राजस्थान में सेवारत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए वित्तीय स्तर पर राहत भरा प्रशासनिक निर्णय सामने आया है। राज्य सरकार ने राजस्थान कैडर के तहत काम कर रहे प्रशासनिक, पुलिस और वन सेवा के अधिकारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। कार्मिक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के पश्चात अब इन सभी अधिकारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 63 प्रतिशत हो जाएगा। इस बढ़ोतरी की सबसे अहम बात यह है कि इसका वित्तीय लाभ 1 जुलाई 2026 से प्रभावी माना जाएगा, जिससे अधिकारियों को पिछली अवधि के वित्तीय समायोजन का भी लाभ प्राप्त होगा।
कार्मिक विभाग के निर्देशों से बढ़ोतरी का रास्ता साफ
प्रदेश सरकार के कार्मिक विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इस निर्णय के लागू होने से राजस्थान कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) से जुड़े समस्त अधिकारियों के भत्ते में सीधे तौर पर इजाफा सुनिश्चित हो गया है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव और जीवनयापन से जुड़े नियमित खर्चों के बीच अधिकारियों और कर्मचारियों को वित्तीय संतुलन प्रदान करने के उद्देश्य से समय-समय पर महंगाई भत्ते की दरों की समीक्षा की जाती है। इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत इस वित्तीय संशोधन को अमलीजामा पहनाया गया है।
मूल वेतन के आधार पर तय होगी मिलने वाली वास्तविक राशि
ताजा आदेशों के अनुसार, महंगाई भत्ते की दर में हुआ 3 प्रतिशत का यह बदलाव राजस्थान कैडर के तीनों प्रमुख प्रशासनिक अंगों के अधिकारियों को कवर करता है। पहले इन अधिकारियों को 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता प्राप्त हो रहा था, जो अब संशोधित होकर 63 प्रतिशत पर पहुंच गया है। नियमानुसार महंगाई भत्ते की गणना संबंधित अधिकारी के मूल वेतन के अनुपात में की जाती है। इस वजह से डीए में हुई तीन प्रतिशत की वृद्धि प्रत्येक अधिकारी के पद और उसके मूल वेतनमान के अनुसार अलग-अलग राशि के रूप में वेतन में जुड़ेगी। किसी भी अधिकारी को मिलने वाला वास्तविक वित्तीय लाभ उसकी मौजूदा पे-स्केल पर निर्भर करेगा।
1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी संशोधित दरें
प्रशासनिक आदेश की एक प्रमुख विशेषता इसकी कार्यान्वयन तिथि है। राज्य सरकार ने संशोधित महंगाई भत्ते को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी घोषित किया है। आदेश जारी होने की तिथि और प्रभावी तिथि के बीच के समय अंतराल को देखते हुए गणना जुलाई माह से ही की जाएगी, जिससे पात्र अधिकारियों को इस अवधि के बकाया अंतर का लाभ भी विभागीय नियमों और प्रावधानों के अनुरूप देय होगा। कार्मिक विभाग के इन दिशा-निर्देशों से राज्य में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे अधिकारियों को प्रत्यक्ष रूप से वित्तीय संबल मिलेगा।



















