शिलांग में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। वॉयस ऑफ द पीपल्स पार्टी (VPP) के प्रमुख आर्डेंट मिलर बसायावमोइत ने मेघालय एसएसए (SSA) स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष एरिस्टोटल रयम्बई पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद शिक्षा आयुक्त और सचिव विजय कुमार मंत्री को उनके पद से हटाने की VPP की मांग के बाद शुरू हुआ, जिसका विरोध एरिस्टोटल रयम्बई ने किया था। बसायावमोइत ने रयम्बई के इस विरोध पर पलटवार करते हुए उनकी राजनीतिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और उनके राजनीतिक झुकाव की ओर इशारा किया है।
एसएसए नेता की राजनीतिक निष्पक्षता पर उठे सवाल
वीपीपी (VPP) प्रमुख ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही एक तस्वीर का हवाला दिया। इस तस्वीर में मेघालय के सर्व शिक्षा अभियान (SSA) शिक्षकों के नेता एरिस्टोटल रयम्बई को सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) के चुनाव चिह्न "किताब" को हाथ में लिए हुए देखा गया है। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर NPP की एक बैठक के दौरान की है, जिसमें राज्य के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन टिनसोंग भी उपस्थित थे। बसायावमोइत ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब लोग किसी राजनीतिक दल से जुड़े होते हैं, तो उन्हें सच बोलने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षकों और उनके प्रतिनिधियों को विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर बात करते समय पूरी तरह से राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहना चाहिए।
शिक्षा विभाग के कामकाज और आयुक्त को हटाने की मांग
विजय कुमार मंत्री को पद से हटाने की मांग पर स्पष्टीकरण देते हुए बसायावमोइत ने साफ किया कि इस मांग के पीछे कोई व्यक्तिगत द्वेष या निजी मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी तरह से शिक्षा विभाग के कामकाज में आ रही कमियों और विसंगतियों पर आधारित है। उनके कार्यकाल के दौरान विभाग की कार्यप्रणाली के कारण शिक्षा क्षेत्र में काफी असमंजस और परेशानियां पैदा हुई हैं। वीपीपी (VPP) का मानना है कि विभाग के प्रदर्शन के आधार पर ही यह मांग उठाई गई है, न कि यह सरकार को सीधे तौर पर निशाना बनाने की कोई कोशिश है।
स्ट्रक्चर पे फ्रेमवर्क (SPF) पर वीपीपी का रुख
आर्डेंट मिलर बसायावमोइत ने शिक्षकों की भर्ती और उनके वेतन भुगतान के लिए सरकार के स्ट्रक्चर पे फ्रेमवर्क (SPF) पर भी अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीपीपी (VPP) इस नई प्रणाली (SPF) को लागू करने के खिलाफ नहीं है। हालांकि, उनकी मुख्य चिंता यह है कि कोई भी नई भर्ती प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो शिक्षकों को पर्याप्त और सुरक्षित वेतन प्रदान करे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकारी स्कूलों में भर्तियां केवल SPF के जरिए की जाएंगी, तो दो साल बाद सेवा में आने वाले शिक्षकों का भविष्य क्या होगा? उन्होंने एक ऐसी व्यवस्था की वकालत की जो शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन की गारंटी दे सके।
वेतन वृद्धि को लेकर वीपीपी की चेतावनी
शिक्षकों के नेतृत्व के साथ अपने इस मतभेद को लेकर वीपीपी (VPP) प्रमुख ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कर दिया कि इस विवाद से उनकी पार्टी के राजनीतिक रुख पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी चेतावनी भी दी। बसायावमोइत ने कहा कि अगर SSA अध्यक्ष का यह बयान इस आधार पर है कि वे सरकार द्वारा दिए जा रहे वर्तमान वेतन से संतुष्ट हैं, तो भविष्य में सत्ता में आने पर वीपीपी (VPP) उनके वेतन को सरकारी स्कूल के शिक्षकों या घाटे वाले स्कूलों के शिक्षकों के बराबर बढ़ाने पर कोई ध्यान नहीं देगी। इस बयान ने राज्य के शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच चल रही बहस को और अधिक गरमा दिया है।



















