कोटा की पारंपरिक हस्तकरघा कला आज देश के कला प्रेमियों के बीच एक बड़ा आकर्षण बनकर उभर रही है। देश के सबसे प्रतिष्ठित शाही घरानों, राजनीतिक हस्तियों और फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्रियों ने असली सोने और चांदी की जरी से तैयार कोटा की विशेष साड़ियों को अपनी पसंद बनाया है। बारीक हाथ की बुनाई और अमूल्य धातु के तारों से सजी ये साड़ियां न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए हैं, बल्कि स्थानीय बुनकरों को भी एक बड़ा राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रही हैं।
शाही परिवारों ने बढ़ाया कोटा की हस्तकरघा विरासत का मान
भारत के सम्मानित राजघरानों के सदस्य इस प्राचीन कला को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका भूमिका निभा रहे हैं। गुजरात के बड़ौदा की महारानी राधिकराजे गायकवाड़ कोटा की इस पारंपरिक असली सोने और चांदी की जरी वाली साड़ी की बड़ी प्रशंसक हैं। उन्होंने हाल ही में 'सोनचिरैया' संस्थान की एक खास जरी वाली साड़ी पहनी। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इन साड़ियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें असली सोने और चांदी की जरी का इस्तेमाल करके बेहद महीन हाथ की बुनाई की जाती है। महारानी राधिकराजे गायकवाड़ जैसी प्रतिष्ठित हस्ती के माध्यम से कोटा की इस सदियों पुरानी हस्तकरघा कला को पूरे देश में एक नई और गौरवशाली पहचान मिल रही है।
इसके साथ ही, उदयपुर की महारानी साहिबा निवृत्ति कुमारी मेवाड़ भी कोटा की इस अनुपम पारंपरिक कला की मुरीद हो चुकी हैं। उन्होंने भी कोटा की प्रसिद्ध 'सोनचिरैया' की खास जरी वाली साड़ी को अपने परिधान के रूप में चुना। संस्थापक प्रीति सिंह पारीक बताती हैं कि इस साड़ी की महीन हाथ की बुनाई में शुद्ध सोने और चांदी के तारों का उपयोग किया जाता है। उदयपुर के शाही परिवार के इस सराहनीय सहयोग से कोटा की इस विरासती बुनाई को एक नया मुकाम और सम्मानजनक स्थान मिल रहा है।
राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मिली नई पहचान
कोटा डोरिया और इसके पारंपरिक बुनाई पैटर्न की लोकप्रियता केवल राजघरानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसे काफी पसंद किया जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पोती-बहू चारु सिंह चौधरी भी इस कलात्मक बुनाई की बड़ी प्रशंसक हैं। उन्होंने भी 'सोनचिरैया' ब्रांड की असली सोने और चांदी की जरी से सजी एक खास साड़ी को अपनी पसंद बनाया। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक का कहना है कि साड़ी में असली सोने-चांदी के धागों से की गई बेहद बारीक हाथ की बुनाई ही इसे असाधारण बनाती है। चारु सिंह चौधरी के इस जुड़ाव से कोटा की इस ऐतिहासिक विरासत को समाज में एक नया दृष्टिकोण मिल रहा है।
वहीं दूसरी तरफ, कला जगत और राजनीति दोनों में सक्रिय रहने वाली प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री और लोकसभा सांसद कंगना रनौत भी कोटा की इस पारंपरिक बुनाई की बड़ी प्रशंसक हैं। कंगना रनौत ने 'सोनचिरैया' की खास जरी वाली साड़ी को पहनकर इस हस्तशिल्प के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया है। संस्थापक प्रीति सिंह पारीक के अनुसार, इस पारंपरिक डिजाइन वाली साड़ी में असली सोने और चांदी की जरी की महीन हाथ की बुनाई की गई है। कंगना रनौत के इस चयन से कोटा की इस पारंपरिक कलात्मक बुनाई को देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों के बीच एक नया और व्यापक मंच मिला है।
हिंदी सिनेमा के जरिए स्थानीय बुनकरों को मिला नया प्रोत्साहन
देश के आधुनिक सिनेमा उद्योग की हस्तियां भी इस पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने में अपना सहयोग दे रही हैं। बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री जाह्नवी कपूर भी कोटा की इस शानदार पारंपरिक कला की प्रशंसक बन गई हैं। उन्होंने विशेष रूप से कोटा की प्रसिद्ध असली सोने और चांदी की जरी से तैयार की गई एक खास साड़ी खरीदी है। 'सोनचिरैया' की संस्थापक प्रीति सिंह पारीक ने जानकारी दी कि जाह्नवी कपूर की इस चुनी हुई साड़ी में महीन जरी की सुंदर बुनाई और पारंपरिक कलात्मक डिजाइनों का मेल है। जाह्नवी कपूर के इस निर्णय से कोटा के बुनकर समुदाय की सदियों पुरानी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है, जिससे उनके काम को नई दिशा मिलेगी।


















