हफ्ते के कारोबार में घरेलू शेयर बाजार ने मजबूती के साथ ओपनिंग की। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 400 अंक से ज्यादा उछल गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24,127 के स्तर पर खुला। इस बढ़त को सबसे बड़ा सहारा IT यानी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों से मिला, जो इस दिन के टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
IT शेयरों ने दिखाई दम
बाजार की तेजी की अगुवाई तकनीकी कंपनियों के शेयरों ने की। निवेशकों की खरीदारी का रुख इसी सेक्टर की तरफ ज्यादा दिखा, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में पहुंचे। जब IT जैसा भारी-भरकम सेक्टर चढ़ता है तो उसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर पड़ता है, और यही इस कारोबारी दिन की शुरुआती तस्वीर रही।
विप्रो के नतीजों पर नजर
तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी खबर कंपनियों के तिमाही नतीजों की रही। विप्रो का पहली तिमाही का शुद्ध मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 4.7 प्रतिशत घट गया। इसके साथ ही कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए 2 रुपये के अंतरिम लाभांश की घोषणा भी की। मुनाफे में गिरावट के बावजूद लाभांश का ऐलान निवेशकों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
आरबीआई के मार्जिन फंडिंग नियमों का असर
बाजार से जुड़ी एक अहम खबर भारतीय रिज़र्व बैंक के मार्जिन फंडिंग नियमों को लेकर है। इन नए नियमों की वजह से वित्त वर्ष 2028 तक ऑप्शंस सेगमेंट का कारोबार 20 प्रतिशत तक घट सकता है। यह बदलाव उन कारोबारियों के लिए मायने रखता है जो डेरिवेटिव बाजार में सक्रिय रहते हैं, क्योंकि इससे ट्रेडिंग की मात्रा पर सीधा असर पड़ेगा।
AI से बढ़ेगी तकनीकी सेवाओं की रफ्तार
देश के तकनीकी सेवा उद्योग के लिए आगे की तस्वीर उत्साहजनक बताई जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भारत के इस सेक्टर की ग्रोथ को नई गति देगा। इसके साथ ही अनुमान है कि साल 2026 में सार्वजनिक क्लाउड पर होने वाला खर्च बढ़कर 17.5 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह रुझान IT कंपनियों के लिए लंबी अवधि में बड़े अवसर की ओर इशारा करता है।
मारुति सुजुकी का उपभोक्ता पैनल आदेश को चुनौती देने का फैसला
ऑटो सेक्टर से मारुति सुजुकी की खबर सामने आई है। कंपनी रायपुर के उपभोक्ता पैनल के उस आदेश को चुनौती देने जा रही है, जिसमें E20 अनुकूल कार को बदलने की बात कही गई थी। यह मामला ईंधन और वाहनों की अनुकूलता से जुड़ा है और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक की समीक्षा
नीतिगत मोर्चे पर संसदीय समिति ने कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक की खंड-दर-खंड जांच की। इस तरह की विस्तृत समीक्षा से यह तय होता है कि कारोबार और कंपनियों से जुड़े नियमों में आगे क्या बदलाव आ सकते हैं, जिसका असर आने वाले समय में बाजार पर भी दिख सकता है।





















