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अमेरिकी हमले की आशंका में तेहरान का बड़ा दांव, लाल सागर का तेल रास्ता बंद करने को तैयार रहें हूतीबाज़ार
17 जुल॰ 2026, 5:59 am (45 दिन पहले)· 0

अमेरिकी हमले की आशंका में तेहरान का बड़ा दांव, लाल सागर का तेल रास्ता बंद करने को तैयार रहें हूती

ईरान ने यमन के हूती लड़ाकों से कहा है कि अगर अमेरिका ने उसके बिजली ढांचे पर हमला किया तो वे लाल सागर का तेल मार्ग बंद करने के लिए तैयार रहें, जिससे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर नया खतरा मंडराने लगा है।

ईरान ने यमन के हूती लड़ाकों से चुपचाप कहा है कि अगर अमेरिका उसके बिजली ढांचे को निशाना बनाता है तो वे लाल सागर से गुजरने वाले तेल मार्ग को बंद करने के लिए मुस्तैद रहें। यह ऐसा कदम है जो दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में नई हलचल पैदा कर सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए ताजा खतरा बनकर उभरा है।

यह चेतावनी गुरुवार को सामने आई, ठीक उसी दिन जब ईरान के बंदर अब्बास, क़ेश्म और अहवाज़ शहरों में नए धमाके सुनाई दिए। इन धमाकों ने बंदर अब्बास को शिराज़ से जोड़ने वाले उस पुल को निशाना बनाया, जिसे बंदर अब्बास-खोरस्तान-लार पुल के नाम से जाना जाता है। फिलहाल कहोरस्तान के कई इलाकों में बिजली गुल है।

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लाल सागर की धमकी से क्यों घबराते हैं तेल कारोबारी

लाल सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है और कच्चे तेल की एक बड़ी मात्रा यहीं से होकर बाजारों तक पहुंचती है। अगर यह रास्ता वाकई बंद हो जाए तो तेल से लदे जहाजों को लंबा और महंगा चक्कर काटना पड़ेगा, जिससे आपूर्ति में रुकावट आएगी। किसी भी वस्तु की तरह जब आपूर्ति घटती है और मांग बनी रहती है, तो कीमतें ऊपर चढ़ जाती हैं। यही वजह है कि इस तरह की धमकी भर से WTI क्रूड जैसे बेंचमार्क तेल पर असर पड़ने लगता है।

आखिर WTI क्रूड है क्या

WTI यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने वाले कच्चे तेल की एक किस्म है। यह उन तीन प्रमुख किस्मों में से एक है, बाकी दो ब्रेंट और दुबई क्रूड हैं। WTI को अक्सर हल्का और मीठा तेल कहा जाता है, क्योंकि इसमें गुरुत्व और सल्फर की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। इसे बेहतरीन गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है जिसे आसानी से रिफाइन किया जा सकता है। इसका उत्पादन अमेरिका में होता है और इसकी आपूर्ति कुशिंग हब के जरिए होती है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा कहा जाता है। यह तेल बाजार का एक बेंचमार्क है और इसकी कीमत का जिक्र मीडिया में बार-बार होता रहता है।

तेल की कीमत को कौन-कौन से कारक हिलाते हैं

बाकी हर संपत्ति की तरह WTI तेल की कीमत भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति से तय होती है। दुनिया की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है तो तेल की मांग बढ़ती है और कीमत चढ़ती है, जबकि सुस्त वैश्विक विकास इसका उल्टा असर डालता है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित करके कीमतों पर सीधा असर डाल सकते हैं। बड़े तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक के फैसले भी कीमत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की कीमत भी WTI क्रूड पर असर डालती है, क्योंकि तेल का कारोबार ज्यादातर अमेरिकी डॉलर में होता है। ऐसे में कमजोर डॉलर तेल को सस्ता बना देता है और मजबूत डॉलर उसे महंगा।

हर हफ्ते के भंडार आंकड़ों पर नजर

अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी की ओर से हर हफ्ते जारी होने वाली तेल भंडार रिपोर्ट भी WTI की कीमत पर असर डालती है। भंडार में बदलाव आपूर्ति और मांग के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं। अगर आंकड़े भंडार में गिरावट दिखाते हैं तो यह मांग बढ़ने का संकेत हो सकता है, जिससे तेल की कीमत ऊपर जाती है। वहीं ज्यादा भंडार बढ़ती आपूर्ति को दर्शाता है, जिससे कीमतें नीचे आती हैं। API की रिपोर्ट हर मंगलवार आती है और EIA की उसके अगले दिन। दोनों के नतीजे आमतौर पर मिलते-जुलते होते हैं और 75 फीसदी मौकों पर एक-दूसरे के एक फीसदी के दायरे में रहते हैं। सरकारी एजेंसी होने के कारण EIA के आंकड़ों को ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।

ओपेक और ओपेक+ तय करते हैं मिजाज

ओपेक यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज, 12 तेल उत्पादक देशों का समूह है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा तय करता है। इन फैसलों का असर अक्सर WTI तेल की कीमतों पर पड़ता है। जब ओपेक कोटा घटाने का फैसला करता है तो आपूर्ति सख्त हो जाती है और तेल की कीमतें चढ़ जाती हैं। जब वह उत्पादन बढ़ाता है तो इसका उल्टा असर होता है। ओपेक+ एक बड़ा समूह है जिसमें ओपेक के बाहर के दस अतिरिक्त देश शामिल हैं, जिनमें सबसे अहम रूस है।

महंगाई का पर्दे के पीछे का असर

इस पूरे घटनाक्रम के बीच महंगाई की तस्वीर भी अहम है। जून का CPI महीने-दर-महीने आधार पर 0.4 फीसदी गिरा, जो अप्रैल 2020 के बाद की सबसे बड़ी एक महीने की गिरावट है। इससे सालाना दर मई के 4.2 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी पर आ गई और लगातार तीन महीने से चली आ रही तेजी का सिलसिला टूट गया। कोर कीमतें इस दौरान स्थिर रहीं, महीने के आधार पर कोई बदलाव नहीं हुआ और सालाना आधार पर यह घटकर 2.6 फीसदी पर आ गईं। ये दोनों ही आंकड़े अनुमान से कम रहे।

सवाल-जवाब

ईरान ने हूती लड़ाकों से क्या करने को कहा है?
ईरान ने उनसे कहा है कि अगर अमेरिका उसके बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे लाल सागर का तेल मार्ग बंद करने के लिए तैयार रहें।
इससे तेल बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
यह रास्ता बंद होने से तेल की आपूर्ति बाधित होगी और कीमतें ऊपर चढ़ सकती हैं।
बंदर अब्बास में क्या हुआ?
बंदर अब्बास, क़ेश्म और अहवाज़ में धमाके हुए, जिन्होंने बंदर अब्बास को शिराज़ से जोड़ने वाले पुल को निशाना बनाया, और कहोरस्तान के इलाकों में बिजली गुल है।
WTI क्रूड क्या है?
यह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है, अमेरिका में उत्पादित एक हल्का और मीठा कच्चा तेल जो तेल बाजार का बेंचमार्क माना जाता है।
तेल की कीमत को कौन तय करता है?
मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति, ओपेक के फैसले, अमेरिकी डॉलर की कीमत और युद्ध या प्रतिबंध जैसे भू-राजनीतिक कारक।
ओपेक+ क्या है?
यह ओपेक और उसके बाहर के दस अतिरिक्त देशों का समूह है, जिनमें सबसे अहम रूस है।
जून का CPI आंकड़ा क्या रहा?
जून का CPI महीने-दर-महीने 0.4 फीसदी गिरा और सालाना दर मई के 4.2 फीसदी से घटकर 3.5 फीसदी पर आ गई।
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