भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बुधवार को आई एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली रही। जेपी मॉर्गन ने तीन बड़ी आईटी कंपनियों की रेटिंग घटा दी और पूरे सेक्टर में टारगेट प्राइस को 27% तक नीचे कर दिया। ब्रोकरेज का कहना है कि आगे राह आसान नहीं रहने वाली।
रिपोर्ट में दो बड़ी मुश्किलों की तरफ इशारा किया गया है, जो इस वक्त भारतीय आईटी पर भारी पड़ रही हैं।
पहली चुनौती, एआई
सबसे बड़ी टेंशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की है। चैटजीपीटी जैसे जेनरेटिव एआई टूल चुपचाप उस काम को निगल रहे हैं, जिस पर भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार दशकों से टिका रहा है, यानी कोडिंग, टेस्टिंग और मेंटेनेंस।
जेपी मॉर्गन इसे "जेनएआई से आई डिफ्लेशन" कहता है और उसका मानना है कि इस सिलसिले को अभी सिर्फ दो साल ही हुए हैं। यानी दर्द अभी और बाकी है।
दूसरी चुनौती, ग्लोबल अनिश्चितता
दूसरी बड़ी वजह दुनिया भर में फैली अनिश्चितता है। भू राजनीतिक तनाव और टैरिफ को लेकर बनी घबराहट ने अमेरिका और यूरोप के एंटरप्राइज क्लाइंट्स को सतर्क कर दिया है। ये कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च तो अब भी कर रही हैं, लेकिन उनका ज्यादातर बजट एआई और क्लाउड की तरफ जा रहा है, पारंपरिक आईटी सर्विसेज की तरफ नहीं।
यही वजह है कि भारतीय आईटी की रेवेन्यू ग्रोथ लगातार तीन साल से महज 2 से 3% पर अटकी हुई है।
ग्रोथ अनुमान में कटौती
जेपी मॉर्गन ने अपने मीडियम टर्म ग्रोथ अनुमान घटा दिए हैं। अब उसे लार्ज कैप आईटी कंपनियों की ग्रोथ करीब 3% रहने की उम्मीद है, जो पहले 4% थी, जबकि मिड कैप कंपनियों के लिए यह अनुमान 6% से घटाकर 5% कर दिया गया है। ब्रोकरेज ने टारगेट प्राइस टू अर्निंग्स मल्टीपल में भी 25% की कटौती की है। उसे नहीं लगता कि बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनियां मीडियम टर्म में अपनी लॉन्ग टर्म औसत ग्रोथ रेट 7 से 8% पर लौट पाएंगी।
किस शेयर पर कितनी मार
सबसे तीखी कटौती HCL टेक्नोलॉजीज पर पड़ी। इसका टारगेट 27% घटाकर 1,370 रुपये से 1,000 रुपये कर दिया गया। मौजूदा करीब 1,109 रुपये के भाव पर इसका मतलब है कि यहां से अभी 10% और गिरावट की गुंजाइश है।
विप्रो की रेटिंग भी घटाई गई और इसका नया टारगेट 200 रुपये से कम करके 160 रुपये कर दिया गया। ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए लगभग शून्य रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जो देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक के लिए काफी खराब तस्वीर है।
टाटा टेक्नोलॉजीज के टारगेट में कटौती तुलनात्मक रूप से कम, सिर्फ 4% की रही और इसे 540 रुपये पर लाया गया। लेकिन तीनों में सबसे बड़ी गिरावट की आशंका इसी में है, क्योंकि आज जिस 759 रुपये के भाव पर यह शेयर कारोबार कर रहा है, उससे करीब 29% नीचे जाने का संकेत है।
इन शेयरों पर भरोसा बरकरार
दूसरी तरफ जेपी मॉर्गन ने कुछ नामों पर अपना 'ओवरवेट' रुख बनाए रखा है। TCS को 2,400 रुपये का टारगेट दिया गया है, जो 17% तेजी की ओर इशारा करता है। इंफोसिस का टारगेट 1,200 रुपये रखा गया है, यहां भी 17% तेजी का अनुमान है। एमफैसिस को 2,600 रुपये का टारगेट मिला है, जिसमें 16% बढ़त की संभावना है, जबकि साइएंट को 1,050 रुपये का टारगेट देते हुए इसमें 19% तेजी की उम्मीद जताई गई है।
आगे क्या, नतीजों पर रहेगी नजर
सेक्टर के लिए अगला बड़ा मोड़ अब ज्यादा दूर नहीं है। TCS ने अपने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे 9 जुलाई को घोषित करने का कार्यक्रम तय किया है, जबकि इंफोसिस के नतीजे 23 जुलाई को आएंगे। बाजार की चाल अब अर्निंग्स के आंकड़ों और वित्त वर्ष 2027 के रेवेन्यू गाइडेंस पर निर्भर करेगी। वित्त वर्ष 2027 की पहली और दूसरी, दोनों तिमाहियां भारतीय आईटी के लिए परंपरागत रूप से ज्यादा मजबूत मानी जाती हैं। ऐसे में अगर गाइडेंस उम्मीद से बेहतर रहा, तो पिटे हुए शेयरों में तेज राहत वाली रैली देखने को मिल सकती है।













