अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की दोबारा लौटती मजबूती के चलते प्रमुख मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नई बिकवाली दर्ज की गई, जिससे यह मुद्रा गिरकर 0.6900 के स्तर के करीब पहुंच गई। मध्य पूर्व तथा रूस और यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक खींचतान के चलते वैश्विक निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है। मुद्रा विनिमय बाजार से जुड़े कारोबारी इस समय कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी ब्याज दर अपेक्षाओं पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, ताकि आने वाले दिनों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा तय हो सके।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए तकनीकी दायरा और समर्थन स्तर
तकनीकी चार्ट पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की हालिया चाल बेहद सीमित दायरे में सिमटी हुई नजर आ रही है। बीते गुरुवार को यह गिरकर 0.6904 के निचले स्तर तक चला गया था, लेकिन इसके बाद इसमें मामूली सुधार देखा गया। शुरुआती एशियाई सत्र में जब यह 0.6930 पर कारोबार कर रहा था, तब गिरावट की रफ्तार में थोड़ी कमी दर्ज की गई थी। इसके बाद इसमें एक बार फिर गिरावट आई और यह 0.6914 तक फिसला, हालांकि न्यूयॉर्क कारोबारी सत्र के दौरान यह अचानक उछलकर 0.6976 के उच्च स्तर तक जा पहुंचा था। दिन के अंत में यह 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 0.6951 के स्तर पर बंद हुआ।
इस अस्थाई तेजी के बावजूद बाजार में किसी मजबूत ऊपर की रफ्तार के संकेत नहीं दिखे हैं। दिन के कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के 0.6930 से 0.6975 के बीच सीमित दायरे में बने रहने की संभावना बनी हुई है। यदि मध्यम अवधि के नजरिए से देखें, तो पिछले महीने के मध्य से शुरू हुई कमजोरी अभी भी बरकरार है। बाजार के गहरे ओवरसोल्ड स्थिति में होने के कारण आगे की गिरावट 0.6866 के बड़े समर्थन स्तर से पहले ही थम सकती है। तकनीकी जानकारों के मुताबिक, जब तक यह 0.6985 के कड़े प्रतिरोध स्तर को पार नहीं कर लेता, तब तक इसमें कमजोरी के पूरी तरह स्थिर होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन और यूरो का रुख
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की विनिमय दर में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान डॉलर के मुकाबले येन अपनी पुरानी गिरावट की भरपाई करते हुए एक बार फिर 158.00 के पार निकल गया। यह मुद्रा युग्म पिछले एक सप्ताह से बने अपने पुराने दायरे में ही घूम रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कमजोर पड़ने के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त रुख की संभावनाओं और जापानी सरकार द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिम के चलते इस उछाल के ऊपर जाने की सीमा सीमित मानी जा रही है।
दूसरी ओर, यूरो पर भी भारी दबाव देखा गया है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार के कारोबार में यह गिरकर 1.1312 पर आ गई, जो कि जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरोप के ऊर्जा संकट से प्रभावित होने की चिंता, अमेरिकी डॉलर की ताकत और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने मिलकर यूरो को कमजोर करने का काम किया है।
सोने में सीमित हलचल और डिजिटल संपत्तियों में गिरावट
सोने के बाजार में सोमवार को पिछले नुकसान में थोड़ी कमी आई, लेकिन पीली धातु अभी भी अपने पुराने कारोबारी दायरे में ही फंसी हुई है। सोने की कीमतों में तेजी की कोशिशें 4,200 डॉलर के नीचे ही रुक जा रही हैं, जबकि दो महीने का निचला स्तर 4,110 डॉलर इससे ज्यादा दूर नहीं है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आई हालिया सुस्ती ने कीमती धातुओं को कुछ हद तक सहारा जरूर दिया है, लेकिन अमेरिकी ट्रेजरी की ऊंची यील्ड डॉलर की गिरावट पर लगाम लगाए हुए है, जिससे सोने में जोरदार तेजी नहीं बन पा रही है।
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में पाई नेटवर्क में लगातार पांचवें दिन गिरावट का सिलसिला जारी रहा और यह 0.090 डॉलर के नीचे चला गया। हालांकि इस गिरावट के बीच भी खुदरा मांग स्थिर बनी हुई है और एक्टिव परपेचुअल्स की नोशनल वैल्यू 10 मिलियन डॉलर के ऊपर टिकी है। इसके बावजूद तकनीकी संकेतकों पर मंदी का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे इसका तकनीकी आउटलुक कमजोर बना हुआ है।
अमेरिकी सेवा क्षेत्र और आर्थिक आंकड़े
आर्थिक संकेतकों की बात करें तो सितंबर के महीने में अमेरिकी आईएसएम सर्विसेज पीएमआई में मामूली सुधार की उम्मीद जताई गई है। अमेरिका का सेवा क्षेत्र अभी भी विस्तार के दायरे में अच्छी तरह से टिके रहने की संभावना है। वहीं, पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति को और सख्त करने की सट्टेबाजी में कमी देखने को मिली है, जिससे वित्तीय बाजारों का ध्यान अब आने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है।


















