अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल एक बार फिर कड़े नीतिगत माहौल और मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच उलझती दिख रही है। अमेरिका में हालिया आर्थिक संकेतकों के कमजोर रहने के बाद उम्मीद बंधी थी कि फेडरल रिजर्व अपनी सख्त मौद्रिक नीति को थाम सकता है, जिससे बुलियन को सहारा मिले। हालांकि, बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर टिके रहने और डॉलर की लगातार मजबूती ने पीली धातु के लिए बढ़त की राह को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मौजूदा समय में सोना तकनीकी स्तरों पर संघर्ष कर रहा है और खरीदार इसे अहम स्तरों के पार ले जाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
कमजोर पेरोल आंकड़े और फेडरल रिजर्व की संभावित नीति
अमेरिकी श्रम बाजार के नवीनतम आंकड़े उम्मीद से काफी कमजोर दर्ज किए गए हैं, जिससे 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं को झटका लगा है। सितंबर के दौरान गैर-कृषि पेरोल यानी नॉन-फार्म पेरोल में केवल 29K का इजाफा हुआ, जो विश्लेषकों के 90K के अनुमान से बहुत कम रहा। इसके साथ ही, पूर्ववर्ती दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी संयुक्त रूप से 60K की कटौती दर्ज की गई, जबकि बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2% तक पहुंच गई। वहीं, सालाना मजदूरी वृद्धि की दर भी धीमी पड़कर 3.0% पर आ गई।
यह गिरावट अगस्त महीने के व्यक्तिगत उपभोग व्यय यानी पीसीई मुद्रास्फीति सूचकांक में आई कमजोरी के बाद सामने आई है, जहां आंकड़े अनुमानों से पीछे रह गए थे और पिछले रिकॉर्ड्स को भी नीचे संशोधित किया गया था। लेकिन आर्थिक मंदी के इन शुरुआती संकेतों के बावजूद बड़े वित्तीय संस्थानों का मानना है कि नीतिगत रुख तुरंत नहीं बदलने वाला। डॉयचे बैंक के अर्थशास्त्रियों का आकलन है कि सितंबर के कमजोर रोजगार आंकड़ों ने व्यापक नीतिगत विमर्श को पूरी तरह नहीं बदला है। उनके अनुसार, समग्र श्रम बाजार की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है और वे आने वाली तिमाहियों में दो बार 25 आधार अंकों की और बढ़ोतरी की संभावना देख रहे हैं।
ट्रेजरी यील्ड और डॉलर की मजबूती का दोहरा असर
सोने पर लगातार दबाव बनाने में अमेरिकी बॉन्ड बाजार और डॉलर इंडेक्स की अहम भूमिका रही है। अमेरिका के 10-वर्षीय बेंचमार्क ट्रेजरी यील्ड का 5.29% के करीब टिके रहना निवेशकों के लिए एक बड़ा कारक है, खासकर तब जब इसने हाल ही में 5.34% का स्तर छुआ था, जो कि वर्ष 2002 के बाद का उच्चतम स्तर था। जब सरकारी बॉन्ड पर सुरक्षित और अच्छा रिटर्न मिल रहा होता है, तो गैर-ब्याज देने वाले सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है।
इसके साथ ही, अमेरिकी मुद्रा का मजबूत रहना विदेशी खरीदारों के लिए सोने को और अधिक महंगा बना देता है, जिससे मांग प्रभावित होती है। हालांकि डॉलर इंडेक्स में बीच-बीच में आने वाली मामूली गिरावट से बुलियन को हल्का सहारा जरूर मिला है, लेकिन यील्ड्स के मजबूत आधार ने डॉलर के बड़े सुधार को सीमित कर रखा है, जिससे धातु पर दबाव बरकरार है।
तकनीकी स्तरों पर 4,200 डॉलर की बड़ी बाधा
चार घंटे के चार्ट पर एक्सएयू/यूएसडी यानी सोने की चाल प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे सिमटी नजर आ रही है, जिससे अल्पावधि में दबाव की स्थिति बनी हुई है। तेजी के पक्षधर 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक बैरियर को फिर से हासिल करने में संघर्ष कर रहे हैं। यह स्तर 4,198 डॉलर पर स्थित 50-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए के बेहद करीब है, जो तत्काल रुकावट का काम कर रहा है।
यदि सोना इस रुकावट को सफलतापूर्वक पार करता है, तो अगला लक्ष्य 4,265 डॉलर पर स्थित 100-अवधि का एसएमए हो सकता है, जिसके बाद 4,374 डॉलर के नजदीक 200-अवधि का एसएमए सामने आएगा। तेजी के रुझान को मजबूती देने के लिए इन सभी मूविंग एवरेज के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउट की आवश्यकता होगी। तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 46 के करीब है, जो शांत से नरम गति को दर्शाता है, जबकि एमएसीडी शून्य से थोड़ा ऊपर रहते हुए एक मामूली सुधार की कोशिश का संकेत दे रहा है।
गिरावट की दिशा में 4,100 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर तत्काल सहारा प्रदान करता है। इस स्तर के टूटने पर बिकवाली का दबाव गहरा सकता है, जिससे भाव 4,000 डॉलर से 3,950 डॉलर के सपोर्ट क्षेत्र की ओर फिसल सकते हैं। इसके अलावा 4,110 डॉलर का दो महीने का निचला स्तर भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
लाइव मार्केट डेटा और तकनीकी परिदृश्य
वर्तमान लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोने के वायदा अनुबंध (GC=F) 4,189 डॉलर पर कारोबार कर रहे हैं, जो पिछले बंद भाव 4,162 डॉलर की तुलना में 0.64% की तेजी दर्शाते हैं। इसका 52 हफ्तों का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.32 गुना दर्ज किया गया है।
लाइव तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय आरएसआई 37 के स्तर पर है। एमएसीडी -64.70 पर है, जो सिग्नल लाइन -43.84 के नीचे है और -20.86 का हिस्टोग्राम मंदी के रुख को दर्शाता है। मूविंग एवरेज में ईएमए20 4,297 डॉलर, ईएमए50 4,340 डॉलर और ईएमए200 4,442 डॉलर पर है, जबकि एसएमए50 4,369 डॉलर और एसएमए200 4,553 डॉलर पर स्थित है। ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे होना डेथ क्रॉस और दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति को रेखांकित करता है। बोलिंगर बैंड्स 4,122 डॉलर से 4,518 डॉलर के दायरे में हैं और कीमत इसके भीतर बनी हुई है। वहीं, 19 का एडीएक्स कमजोर रेंज बाउंड ट्रेंड दिखाता है। स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 15 और सिग्नल लाइन 14 पर है। 93.10 का एटीआर दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। दैनिक पिवट 4,180 डॉलर पर है, जबकि पहला रेजिस्टेंस आर1 4,208 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस आर2 4,227 डॉलर पर है। पहला सपोर्ट एस1 4,161 डॉलर और दूसरा सपोर्ट एस2 4,133 डॉलर पर मौजूद है।
मूल्य संचय और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी
मानव इतिहास में सोने ने मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में हमेशा एक केंद्रीय भूमिका निभाई है। आभूषणों में इसके आकर्षण के अलावा, इसे एक प्रमुख सुरक्षित निवेश साधन यानी सेफ-हेवन एसेट माना जाता है, जो संकट के समय में पूंजी की सुरक्षा करता है। यह किसी भी संप्रभु सरकार या केंद्रीय जारीकर्ता पर निर्भर नहीं करता, जिसके चलते मुद्रा अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के दौर में यह बेहतरीन बचाव का साधन साबित होता है।
विश्व भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। अशांत आर्थिक समय में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने और जोखिमों को कम करने के लिए ये बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का विविधीकरण करते हैं। किसी भी देश के पास सोने का बड़ा भंडार उसकी वित्तीय साख और शोधन क्षमता पर अंतरराष्ट्रीय विश्वास को बढ़ाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने वर्ष 2022 में अपने भंडारों में लगभग 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा था, जो रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद रही है। विशेषकर चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से इजाफा कर रहे हैं।
विदेशी मुद्रा, बॉन्ड और वैश्विक बाजारों के समीकरण
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ विपरीत संबंध माना जाता है। जब डॉलर गिरता है, तो सोना आमतौर पर मजबूत होता है, जिससे वैश्विक निवेशकों को संतुलन बनाने का अवसर मिलता है। इसी प्रकार, जोखिम भरी परिसंपत्तियों जैसे शेयर बाजारों में आने वाली तेजी सोने के आकर्षण को घटाती है, जबकि इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दौर सोने को ऊपर धकेलता है। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी मंदी की आशंकाएं भी निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़कर सोने की कीमतों में उछाल ला सकती हैं।
व्यापक वित्तीय बाजारों में इस डॉलर मजबूती का असर अन्य प्रमुख संपत्तियों पर भी साफ देखा गया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के तनाव के बीच गिरकर 0.6900 के करीब पहुंच गई, जहां कच्चे तेल के भाव और ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की नीतियां फोकस में हैं। वहीं, डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) ने नुकसान की भरपाई करते हुए 158.00 का स्तर फिर से छू लिया, हालांकि बैंक ऑफ जापान के कड़े रुख और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाएं इसकी बढ़त को सीमित कर सकती हैं।
दूसरी तरफ, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) गिरकर 1.1312 पर आ गई, जो मई 2025 के बाद का इसका निचला स्तर है और यह जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यह गिरावट डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों के जोखिमों को दर्शाती है। इसके अलावा, क्रिप्टो बाजार में पाई नेटवर्क (Pi Network) लगातार पांचवें दिन फिसलते हुए 0.090 डॉलर के नीचे पहुंच गया है, हालांकि रिटेल मांग के चलते एक्टिव परपेचुअल्स का नोशनल मूल्य 10 मिलियन डॉलर से ऊपर बना हुआ है। अब बाजार की नजर अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट द्वारा जारी किए जाने वाले सितंबर सेवा क्षेत्र सूचकांक पर टिकी है, जिसके अगस्त के 55.4 से मामूली बढ़कर 55.7 होने का अनुमान है।




















