ज्वैलरी सेक्टर की दिग्गज कंपनी कल्याण ज्वैलर्स के काउंटर में बीते कुछ हफ्तों से सुस्ती का माहौल है, हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्टॉक अब भी शानदार कमाई का जरिया बना हुआ है। कंपनी ने चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में राजस्व में 38 फीसदी की तगड़ी बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन इस मुनाफे और नई पूंजी का बड़ा हिस्सा दुकानों के विस्तार और नेटवर्क बढ़ाने में झोंक दिया गया। यही वजह है कि पिछले एक महीने से बाजार का मूड इस शेयर को लेकर थोड़ा ठंडा नजर आ रहा है, जबकि पांच साल के आंकड़े देखें तो इसने अपने निवेशकों की पूंजी को करीब नौ गुना बढ़ा दिया है। कंपनी का मूल गहनों का कारोबार अब भी मजबूत बना हुआ है, यही वजह है कि छोटी अवधि की इस सुस्ती ने ज्यादातर ब्रोकरेज हाउसों का भरोसा नहीं डिगाया है।
हाल के कारोबारी सत्रों में कैसा रहा शेयर
7 सितंबर को कारोबार के दौरान दोपहर 3.24 बजे कल्याण ज्वैलर्स का शेयर 1.39 फीसदी टूटकर 590.50 रुपये के स्तर पर आ गया। पिछले एक महीने की बात करें तो इस अवधि में शेयर करीब 2.38 फीसदी फिसल चुका है। इसके बावजूद बाजार के जानकारों का भरोसा कमजोर नहीं पड़ा है, बल्कि करीब 90 फीसदी विश्लेषकों ने इसे खरीदने की सिफारिश दी है और बाकी 10 फीसदी ने होल्ड करने की राय दी है। गौर करने वाली बात यह है कि किसी भी विश्लेषक ने इस स्टॉक से दूरी बनाने या बेचने की सलाह नहीं दी है, जो कंपनी के भविष्य को लेकर बाजार के भरोसे को दिखाता है।
लंबी अवधि में रिटर्न की तस्वीर
एक साल के नजरिए से देखें तो शेयर में 1.52 फीसदी की मामूली कमजोरी आई है, वहीं सालाना आधार पर इसने 21.94 फीसदी का मजबूत रिटर्न भी दर्ज किया है। साल 2026 की बात करें तो बीते छह महीनों में इस स्टॉक ने 49.63 फीसदी की छलांग लगाई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह उछाल 59.16 फीसदी तक पहुंच गया। एक साल के दायरे में कंपनी ने अपने निवेशकों को करीब 18 फीसदी की कमाई कराई है, तो तीन साल के हिसाब से यह रिटर्न 144.16 फीसदी तक जा पहुंचा है। असली कमाल पांच साल के आंकड़ों में दिखता है, जहां इस स्टॉक ने 780 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है, यानी पांच साल पहले जिसने भी इसमें पैसा लगाया, उसकी रकम अब तक करीब नौ गुनी हो चुकी है।
किसके पास कितनी हिस्सेदारी
गिरावट के बीच भी ज्यादातर ब्रोकरेज हाउस इस कंपनी पर भरोसा जताते हैं, और इसकी एक बड़ी वजह इसकी मजबूत शेयरधारिता संरचना है। कल्याण ज्वैलर्स में प्रमोटर्स के पास अब भी 62.86 फीसदी की मोटी हिस्सेदारी मौजूद है। इसके बाद सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी निवेशकों का है, जिनके पास कंपनी में 10.82 फीसदी शेयर हैं। घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी भी 15.82 फीसदी पर टिकी है, जबकि आम पब्लिक के पास करीब 9 फीसदी शेयर हैं और शेष 1.52 फीसदी अन्य निवेशकों के खाते में दर्ज है। बाजार में इतनी बड़ी प्रमोटर हिस्सेदारी को अक्सर इस संकेत के तौर पर देखा जाता है कि कंपनी चलाने वाले लोगों का भी इसमें उतना ही बड़ा दांव लगा हुआ है।
ब्रोकरेज हाउसों ने क्या टार्गेट रखा
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने इस स्टॉक के लिए 682 रुपये का लक्ष्य तय किया है, वहीं मोतीलाल ओसवाल ने इससे भी आगे बढ़ते हुए 700 रुपये का टार्गेट प्राइस दिया है। दोनों ही टार्गेट प्राइस मौजूदा 590.50 रुपये के भाव से काफी ऊपर हैं, जिससे साफ है कि ब्रोकरेज हाउस आगे और बढ़त की गुंजाइश देख रहे हैं। मनीकंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक, इस स्टॉक को कवर करने वाले 100 फीसदी ब्रोकरेज हाउस अभी भी इसमें निवेश की सलाह दे रहे हैं, जो मौजूदा गिरावट के बावजूद बाजार के भरोसे को दर्शाता है।



















