यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक साथ सियासी उठापटक बढ़ी तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के पास बॉन्ड बाज़ार को शांत रखने के लिए जो औज़ार हैं, उन पर भी दबाव पड़ सकता है। यह चेतावनी रबोबैंक की एक रिपोर्ट में दी गई है।
जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन मिलकर यूरोज़ोन के कुल GDP का 60% हिस्सा बनाते हैं, यही वजह है कि इनमें से किसी भी देश में गड़बड़ी का असर पूरे करेंसी ब्लॉक पर दिखने लगता है। रबोबैंक का कहना है कि यूरोज़ोन के पास संभालने के लिए ढांचा मौजूद है, एक टेक्नोक्रेट-चालित नियम-आधारित यूरोपीय संघ ढांचा, और ईसीबी का ट्रांसमिशन प्रोटेक्शन इंस्ट्रूमेंट यानी टीपीआई। यह टीपीआई ईसीबी को इजाज़त देता है कि जब बाज़ार में उथल-पुथल किसी देश की असली आर्थिक हालत की वजह से नहीं बल्कि किसी और कारण से हो, तब वह उस देश के सरकारी बॉन्ड खरीद सके।
रबोबैंक ने यह भी बताया कि यह हस्तक्षेप कितना असाधारण दिखेगा अगर यूरोप के बाहर होता। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर अमेरिका में फेड, वॉर्श की अगुआई में मौजूदा बाज़ार हालात में इस तरह की आक्रामक बॉन्ड-खरीद नीति पर विचार करता, तो उस पर तीखी प्रतिक्रिया आती। रबोबैंक का असली सवाल यह है कि अगर जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन में सियासी परेशानी अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ भड़क उठे, तो क्या टीपीआई उतनी आसानी से काम करता रह पाएगा। रबोबैंक ने इसे सिर्फ 'यूरोपीय' समस्या मानने से भी इनकार किया और कहा कि यह उतना ही अमेरिकी मसला भी है।
दरअसल टीपीआई तभी काम करता है जब बॉन्ड बाज़ार में तनाव किसी देश की अपनी आर्थिक बुनियाद की वजह से न होकर किसी और वजह से हो। अगर जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन चारों में सियासी अस्थिरता एक साथ फैल जाए, तो ईसीबी के लिए यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि किसी एक देश के बॉन्ड बाज़ार में दखल देना बाकी सरकारों के मुकाबले पक्षपात जैसा नहीं दिखेगा।
मेलेंशों की मांग, ईसीबी फ्रांसीसी कर्ज़ माफ करे
रबोबैंक जिस सियासी दबाव की बात कर रहा है, वह फ्रांस में पहले से दिख रहा है। फ्रांस के धुर वामपंथी राष्ट्रपति उम्मीदवार मेलेंशों, जो सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं, उन्होंने ईसीबी के पास मौजूद फ्रांसीसी सरकारी कर्ज़ के एक हिस्से को रद्द करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, "मैं यूरोज़ोन के सभी देशों को प्रस्ताव देता हूं कि ईसीबी के पास मौजूद इस कर्ज़ को रद्द किया जाए।" उनकी दलील है कि चूंकि सभी यूरोज़ोन देश एक ही करेंसी सिस्टम का हिस्सा हैं, इसलिए यह कर्ज़ असल में फ्रांस पर खुद अपना ही कर्ज़ है।
मेलेंशों ने इस प्रस्ताव की आलोचना पर भी जवाब दिया। उनका कहना है कि मीडिया जगत ने उनके इस प्रस्ताव को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही दिनों की सफाई में यह भ्रम दूर हो गया। उन्होंने एक सर्वे का हवाला दिया, जिसके मुताबिक अब कर्ज़ माफी के प्रस्ताव का समर्थन करने वाले फ्रांसीसी नागरिक इसका विरोध करने वालों से ज़्यादा हैं। कर्ज़ माफी के अलावा मेलेंशों ने यह भी कहा कि वह एक सार्वजनिक बैंकिंग हब बनाना चाहते हैं, उनके मुताबिक फ्रांस के पास इसके लिए पर्याप्त पैसा है।


















