देश के सबसे बड़े शेयर बाजार संचालक के तौर पर पहचाना जाने वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई अब खुद निवेशकों के सामने एक लिस्टेड कंपनी बनकर आने की तैयारी में है। सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने 21 सितंबर को शेयर बाजार में एंट्री करने का इरादा जताया है, और लिस्टिंग में अभी दो हफ्ते बाकी होने के बावजूद ग्रे मार्केट में इसके शेयरों की मांग जोरदार बनी हुई है। अनलिस्टेड मार्केट में कारोबार हो रहे इस स्टॉक का प्रीमियम फिलहाल 285 रुपये तक पहुंच गया है, यानी जो निवेशक इसे अभी खरीद रहे हैं, उन्हें लिस्टिंग पर हर शेयर पर करीब इतना ही अतिरिक्त फायदा मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है।
ग्रे मार्केट में क्यों मची है हलचल
एनएसई के आईपीओ से पहले निवेशकों के साथ हुई बैठक में इसकी शर्तों पर सहमति बन चुकी है, और कंपनी की योजना के मुताबिक शेयरों का भाव करीब 1,800 रुपये के आसपास तय हो सकता है। इसी अनुमानित भाव के आधार पर ग्रे मार्केट में सौदे हो रहे हैं, जहां जीएमपी 285 रुपये तक पहुंच चुका है। मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से यह प्रीमियम करीब 5 से 10 फीसदी के रिटर्न के बराबर बैठता है, जबकि कई निवेशक लिस्टिंग के दिन तक यह रिटर्न बढ़कर 12 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल के जरिए
एनएसई ने स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी सूचना में साफ किया है कि यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस की राह से आएगा। इसका मतलब यह है कि कंपनी खुद कोई नया शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटाएगी, बल्कि उसके मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेचेंगे। इस ओएफएस के तहत कुल 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे, जो एनएसई की पेडअप कैपिटल में करीब 6 फीसदी की हिस्सेदारी के बराबर है। यानी फ्रेश इश्यू न होने से कंपनी के खाते में सीधे कोई नई रकम नहीं आएगी, बल्कि मौजूदा हिस्सेदार अपना निवेश भुनाएंगे।
कौन-कौन से शेयरधारक बेच रहे हैं हिस्सेदारी
इस बिक्री में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई का है, जो अपने 2.475 करोड़ शेयर बाजार में उतारने वाला है। इसके अलावा एमएस स्ट्रैटजी (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयर बेचेगी, जबकि कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड की तरफ से 1.19 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। अरांडा इनवेस्टमेंट (मॉरीशस) अपने खाते से 1.12 करोड़ शेयर बेचेगी, बैंक ऑफ बड़ौदा 1.10 करोड़ शेयर और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड 1.09 करोड़ शेयर बाजार में उतारने की तैयारी में है। इन सभी शेयरधारकों के शेयर मिलाकर ही 14.89 करोड़ शेयरों का पूरा आईपीओ आकार बनता है।
प्राइस बैंड अभी तय नहीं, लेकिन साइज बड़ा तय
अभी तक एनएसई ने आईपीओ के लिए आधिकारिक प्राइस बैंड घोषित नहीं किया है, लेकिन मौजूदा अनुमानित वैल्यूएशन के आधार पर इसका आकार करीब 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। हालांकि वैल्यूएशन की औपचारिक घोषणा होने के बाद आईपीओ के आकार और प्राइस बैंड, दोनों में बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है। फिलहाल अनुमानित प्राइस बैंड 1,800 रुपये के आसपास बताया जा रहा है, लेकिन अगर वैल्यूएशन ऊपर की ओर संशोधित होती है तो शेयरों का भाव 2,000 रुपये से लेकर 2,200 रुपये तक भी जा सकता है।
कब आ सकता है आईपीओ, कब होगा अलॉटमेंट
शेयर बाजार में लागू टी प्लस थ्री यानी T+3 नियम के मुताबिक बिडिंग बंद होने के तीन कारोबारी दिनों के भीतर ही किसी भी कंपनी को बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। इस हिसाब से अगर एनएसई 21 सितंबर को लिस्ट होने की योजना पर आगे बढ़ती है तो उसका आईपीओ 14 सितंबर के आसपास खुल सकता है। वहीं अगर कंपनी की लिस्टिंग 25 सितंबर तक टलती है, तो आईपीओ 18 सितंबर को खोला जा सकता है। दोनों ही स्थितियों में निवेशकों के शेयरों का अलॉटमेंट 17 से 23 सितंबर के बीच पूरा हो जाने की संभावना है, जिसके बाद आवंटन पाने वाले निवेशक लिस्टिंग के दिन अपने मुनाफे या नुकसान का हिसाब देख सकेंगे।



















