वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूरो बनाम जापानी येन में नरमी देखने को मिली। पिछले सत्र में मामूली बढ़त दर्ज करने के बाद यह करेंसी क्रॉस फिसलकर लगभग 176.70 के स्तर पर आ गया। दैनिक चार्ट का तकनीकी ढांचा यह स्पष्ट संकेत देता है कि यह मुद्रा जोड़ी फिलहाल एक अवरोही चैनल (डिसेंडिंग चैनल) के भीतर फंसी हुई है, जिससे समग्र बाजार रुझान मंदी यानी बेयरिश दबाव की ओर झुका हुआ बना हुआ है।
चैनल के भीतर अटका तकनीकी ढांचा और प्रमुख सपोर्ट स्तर
दैनिक मूल्य संरचना पर नजर डालें तो यूरो-येन वर्तमान में नौ-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए के ठीक ऊपर टिका हुआ है। यह अल्पकालिक समर्थन स्तर 176.45 पर स्थित है। यदि विक्रेता इस स्तर को नीचे की ओर तोड़ने में सफल रहते हैं, तो अगला बड़ा आधार 30 अक्टूबर को बना 12 महीने का निचला स्तर 175.07 होगा। बाजार का रुख नकारात्मक बने रहने की स्थिति में यह गिरावट आगे बढ़कर अवरोही चैनल की निचली सीमा 174.30 तक खिंच सकती है।
यदि भालू इस चैनल के निचले दायरे को भी भेदने में कामयाब हो जाते हैं, तो इस क्रॉस के लिए दरवाजे सीधे 15 महीने के निचले स्तर 169.72 की दिशा में खुल जाएंगे। इस बीच, 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 44.16 पर बना हुआ है। आरएसआई का यह आंकड़ा दर्शाता है कि बाजार अभी तटस्थ दायरे में है और किसी बेहद आक्रामक बिकवाली के बजाय केवल मध्यम स्तर की मंदी की गति सक्रिय है। लाइव संकेतकों में भी 14-दिवसीय आरएसआई 45 के करीब है, जबकि एमएसीडी हिस्टोग्राम 0.11 पर मामूली सुधार दर्शा रहा है, हालांकि ईएमए 50 और ईएमए 200 के बीच बना डेथ क्रॉस लंबी अवधि की मंदी की पुष्टि करता है।
ऊपरी स्तरों पर बाधाएं और संभावित तेजी की शर्तें
ऊपर की ओर किसी भी सुधार के लिए पहला बड़ा प्रतिरोध अवरोही चैनल की ऊपरी सीमा के आसपास 177.90 पर मौजूद है। इस बाधा को पार करने के बाद यूरो को 50-दिवसीय ईएमए पर कड़े इम्तिहान का सामना करना पड़ेगा, जो कि 178.72 पर स्थित है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कीमत इस मध्यम अवधि के औसत से नीचे बनी रहेगी, तब तक हर उछाल पर बिकवाली का जोखिम मंडराता रहेगा।
यदि खरीदार पूरी ताकत के साथ 50-दिवसीय ईएमए को निर्णायक रूप से पार करने में सफल रहते हैं, तो यह वर्तमान मंदी के रुख को तेजी में बदल सकता है। ऐसा रिवर्सल बनने पर यह क्रॉस 17 अप्रैल को बने अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 187.95 के क्षेत्र का पुनः परीक्षण करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। दैनिक स्तर पर 176.67 का पिवट प्वाइंट बना हुआ है, जबकि त्वरित प्रतिरोध 176.82 और 176.92 पर देखा जा रहा है।
यूरोपीय मुद्रा का वैश्विक महत्व और यूरोज़ोन का आर्थिक ताना-बाना
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा था।
मुद्रा जोड़ियों की बात करें तो यूरो-यूएस डॉलर दुनिया में सबसे अधिक ट्रेड होने वाली जोड़ी है, जो सभी वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन-देन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रखती है। इसके बाद यूरो-जापानी येन 4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर आता है, जबकि यूरो-ब्रिटिश पाउंड 3 प्रतिशत और यूरो-ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 2 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक और ब्याज दरों की भूमिका
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी पूरे यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है। ईसीबी ही ब्याज दरों का निर्धारण करता है और मौद्रिक नीति का संचालन करता है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आर्थिक विकास को सहारा देना है। ब्याज दरों में बदलाव करना ईसीबी का सबसे प्रमुख नीतिगत हथियार है। सामान्यतः, तुलनात्मक रूप से ऊंची ब्याज दरें या दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें यूरो को मजबूत करती हैं, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है।
ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार आयोजित होने वाली बैठकों में मौद्रिक नीति संबंधी निर्णय लेती है। इन महत्वपूर्ण निर्णयों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं।
महंगाई आंकड़े और आर्थिक संकेतकों का असर
यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के रुझान को मापने के लिए हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी एचआईसीपी का उपयोग किया जाता है। यह आंकड़ा यूरो के मूल्य निर्धारण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि मुद्रास्फीति उम्मीद से अधिक बढ़ती है और विशेष रूप से ईसीबी के 2 प्रतिशत के वार्षिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक को महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए विवश होना पड़ता है। जब यूरोज़ोन की दरें अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक होती हैं, तो विदेशी निवेशक अपने पूंजी प्रवाह को यहां पार्क करना पसंद करते हैं, जिससे एकल मुद्रा में मजबूती आती है।
इसके अतिरिक्त, सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता धारणा सर्वेक्षण जैसे प्रमुख आंकड़े भी यूरो की चाल तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि दरों में बढ़ोतरी का रास्ता भी साफ करती है। यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं—जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन—कुल यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं, इसलिए इन चार देशों के आंकड़े सबसे अधिक प्रभाव डालते हैं। साथ ही व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस भी अहम है, क्योंकि मजबूत निर्यात मांग घरेलू मुद्रा की वैल्यू बढ़ाती है।
अन्य वैश्विक बाजारों और राजनीतिक घटनाक्रमों का परिदृश्य
व्यापक विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरकर दो सप्ताह के नए निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बहुप्रतीक्षित बढ़ोतरी के बाद आई। हालांकि दरें बढ़ाई गईं, लेकिन यह निर्णय सर्वसम्मत नहीं था; समिति के तीन सदस्यों ने दरों को 4.60 प्रतिशत पर ही अपरिवर्तित रखने का पक्ष लिया। इस मतभेद ने आगे नीतिगत सख्ती की उम्मीदों को कमजोर कर दिया, जिससे अमेरिकी डॉलर की मामूली मजबूती के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बढ़ गया।
उधर अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन में भी मंगलवार के एशियाई सत्र में सुस्ती रही। ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले डॉलर के कमजोर रुख के चलते इस जोड़ी ने 158.00 तक की अपनी पिछली बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया। बैंक ऑफ जापान द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को नीचे से सहारा दिया, लेकिन अगली दर वृद्धि के समय को लेकर अनिश्चितता ने बढ़त को सीमित रखा।
कमोडिटी बाजार में, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहा, जिससे सोने की कीमत मंगलवार को 3,945 डॉलर के आसपास पिछले दिन की रिकवरी को बनाए रखने में सफल रही। हालांकि, पीली धातु अभी भी शुक्रवार को दर्ज किए गए अपने 3,870.23 डॉलर के वार्षिक निचले स्तर के करीब बनी हुई है।
राजनीतिक मोर्चे पर, संयुक्त राज्य अमेरिका में मंगलवार को मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जिसमें सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटें और प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें दांव पर हैं। इसके साथ ही फ्लोरिडा और ओहियो में दो विशेष चुनाव भी आयोजित किए जा रहे हैं, जो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा खाली की गई सीटों को भरने के लिए हो रहे हैं। इन तमाम राजनीतिक और व्यापक आर्थिक घटनाक्रमों पर वैश्विक वित्तीय बाजारों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।

















