यूरोपीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कुछ प्रमुख संकेतक रिकवरी की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे निवेशकों का ध्यान इस मुद्रा जोड़े पर टिक गया है। जर्मनी का आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स जुलाई में बढ़कर 86.6 पर पहुंच गया, जो जून के महीने में 85.7 पर था। इस सुधार के पीछे पूरी तरह से भविष्य की उम्मीदों का बड़ा हाथ रहा है। इस तरह का सकारात्मक रुख जुलाई के यूरोजोन पीएमआई और जेडब्ल्यू इंडेक्स में भी देखने को मिला था, जहां सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई थी। इन तमाम आंकड़ों को देखते हुए यह साफ है कि यूरोपीय क्षेत्र में व्यावसायिक माहौल धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद और ईसीबी की चाल
आर्थिक गतिविधियों में इस सुधार और तय लक्ष्य से ऊपर चल रही महंगाई के कारण यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के लिए सितंबर में ब्याज दरों को फिर से बढ़ाने का मामला मजबूत होता दिख रहा है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इससे यूरो को बहुत ज्यादा मजबूती या ऊपर की ओर उछाल मिलने की संभावना काफी कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि स्वैप कर्व पहले से ही 10 सितंबर की बैठक में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि के लिए 90 प्रतिशत संभावनाओं का आकलन कर चुका है। जब बाजार पहले ही इन संभावनाओं को अपने भाव में शामिल कर चुका हो, तो दर बढ़ोतरी की घोषणा के बाद मुद्रा को अतिरिक्त लाभ मिलना मुश्किल हो जाता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों का हाल
सोमवार के कारोबारी सत्र के दूसरे पहर में ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी जीबीपी/यूएसडी अपनी शुरुआती बढ़त को खोते हुए लाल निशान में 1.3300 के आसपास कारोबार करती नजर आई। हफ्ते की शुरुआत इस जोड़ी ने एक मजबूत और तेजी के रुख के साथ की थी। हालांकि मध्य पूर्व के संघर्ष में कुछ समय के लिए आए ठहराव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिसने अमेरिकी डॉलर की तेजी पर लगाम लगा दी। इस परिस्थिति के कारण यह जोड़ी फिलहाल बाजार में अपना आधार बनाए रखने में कामयाब रही है। दूसरी ओर, यूरो और डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD भी अपनी शुरुआती तेजी के जोश को बरकरार नहीं रख पाई और सोमवार के दूसरे पहर में 1.1400 के नीचे छोटे लाभ के साथ कारोबार करती दिखी। बाजार के निवेशक मध्य पूर्व के तनाव में नरमी आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं क्योंकि हमलों पर कुछ समय के लिए रोक लगी है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाएगा या नहीं, इस पर अभी भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
सोने के बाजार में हल्की चाल और निवेश के जोखिम
पीली धातु यानी सोना सीमित बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है और सोमवार को प्रति ट्रॉय औंस 4.100 डॉलर के स्तर को पार करने के बाद अपनी शुरुआती तेजी के कुछ हिस्से को गंवा चुका है। सोने में यह दैनिक बढ़त अमेरिकी डॉलर की स्पष्ट दिशा के अभाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में अस्थायी विराम की नई उम्मीदों के बीच आई है। वैश्विक बाजारों में इन तमाम उतार-चढ़ाव के बीच विश्लेषकों और जानकारों का हमेशा यह मानना रहा है कि खुले बाजार में निवेश करने के साथ भारी वित्तीय जोखिम जुड़े होते हैं। किसी भी वित्तीय साधन में पोजीशन बनाने से पहले निवेशकों को अपनी तरफ से पूरी और गहरी रिसर्च कर लेनी चाहिए ताकि किसी भी संभावित बड़े नुकसान से बचा जा सके।



















