यूरोपीय संघ की चार प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई के आंकड़े अनुमान से कहीं ज्यादा दर्ज किए गए हैं, लेकिन मुद्रा बाजार में इसका फायदा यूरो को मिलने के बजाय अमेरिकी डॉलर को मजबूत करता दिखा। सामान्य तौर पर जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं तेज होती हैं और मुद्रा को सहारा मिलता है। इसके विपरीत, यूरो/डॉलर की जोड़ी लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में 1.1350 के स्तर से नीचे बंद हुई। स्पेन में सितंबर की वार्षिक मुद्रास्फीति बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 2023 के बाद का उसका उच्चतम स्तर है। जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन की साझा मुद्रा इस तीव्र महंगाई के बावजूद अमेरिकी डॉलर के आगे अपनी बढ़त बरकरार रखने में नाकाम रही।
बॉन्ड यील्ड में उछाल और केंद्रीय बैंक का रुख
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की कार्यकारी बोर्ड सदस्य श्नाबेल ने बुधवार को संकेत दिया कि वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में हालिया उछाल कीमतों के दबाव को कम करने में मदद कर सकता है। श्नाबेल, जो जल्द ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में एक वरिष्ठ पद संभालने जा रही हैं, को आमतौर पर ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के समर्थकों में गिना जाता है। उनका तर्क रहा कि बॉन्ड बाजार में आई इस सख्ती से मुद्रास्फीति धीरे-धीरे अपने तय लक्ष्य की तरफ लौट सकती है, जिससे केंद्रीय बैंक के काम का कुछ बोझ खुद बाजार उठा लेता है। हालांकि, यूरो/डॉलर जोड़ी के नजरिए से बॉन्ड यील्ड में यह कसाव अमेरिका के साथ ब्याज दर के अंतर को पाटने में मददगार साबित नहीं हुआ, क्योंकि अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 2007 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
मुद्रास्फीति के आगामी आंकड़े और नीतिगत बैठकें
बाजार अब शुक्रवार को जीएमटी 09:00 बजे जारी होने वाले यूरोज़ोन के फ्लैश हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (एचआईसीपी) पर नजरें गड़ाए हुए है। सितंबर के इस आंकड़े के सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं कोर मुद्रास्फीति दर के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा गुरुवार को जीएमटी 13:30 बजे ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड का संबोधन होना है, जबकि शुक्रवार को ही जीएमटी 12:30 बजे अमेरिका के रोजगार आंकड़े (पेरोल काउंट) पेश किए जाएंगे। यह सारे आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में मुद्रा के उतार-चढ़ाव की दिशा तय करेंगे।
तकनीकी स्तर और चार्ट का विश्लेषण
विदेशी मुद्रा बाजार में तकनीकी मोर्चे पर 1.1400 का स्तर एक मजबूत प्रतिरोध बना हुआ है। 23 सितंबर को नीचे आने के बाद से इस स्तर ने यूरो में हर सुधार को रोका है और बुधवार का उच्चतम स्तर भी इससे नीचे ही रहा। यदि यह स्तर टूटता है, तो अगला प्रतिरोध 1.1450 पर देखा जाएगा। नीचे की तरफ, मंगलवार को 1.1300 के ठीक ऊपर बना निचला स्तर मई 2025 के बाद सबसे कमजोर स्तर रहा है, जिसके बाद 1.1250 एक प्रमुख सपोर्ट के रूप में मौजूद है। दैनिक चार्ट पर स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (स्टोच आरएसआई) लगभग 4 के आसपास दर्ज किया गया है, जो अत्यधिक ओवरसोल्ड स्थिति दर्शाता है। ऐसे में शुक्रवार के आंकड़ों के बाद 1.1400 की ओर रिकवरी भी मौजूदा मंदी के रुख को खत्म नहीं करेगी, जब तक कि दैनिक स्तर पर क्लोजिंग 1.1450 से ऊपर न हो जाए। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, यूरो/डॉलर 1.13 पर कारोबार कर रहा है और 14-दिवसीय आरएसआई 22 पर बना हुआ है, जबकि मूविंग एवरेज में डेथ क्रॉस का दबाव देखा जा रहा है।
यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था और मुद्रा विनिमय का महत्व
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दूसरा सबसे अधिक कारोबार किया जाने वाला माध्यम है। वर्ष 2022 में सभी विदेशी मुद्रा लेन-देन में इसका हिस्सा 31 प्रतिशत था, जिसका दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। यूरो/डॉलर दुनिया भर में सबसे अधिक ट्रेड की जाने वाली मुद्रा जोड़ी है, जो कुल वैश्विक सौदों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रखती है। इसके बाद यूरो/जेपीवाई (4 प्रतिशत), यूरो/जीबीपी (3 प्रतिशत) और यूरो/एयूडी (2 प्रतिशत) का स्थान आता है।
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) पूरे यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो ब्याज दरें तय करता है और मौद्रिक नीति संभालता है। ईसीबी का मुख्य उद्देश्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत महंगाई को नियंत्रित करना या विकास को गति देना शामिल है। ब्याज दरों में बदलाव इसका प्राथमिक उपकरण है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या उनके बढ़ने की संभावना होती है, तो आमतौर पर यूरो को मजबूती मिलती है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करके नीतिगत निर्णय लेती है, जिसमें राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं।
व्यापार संतुलन और अन्य वैश्विक मुद्राओं की स्थिति
यूरोज़ोन में जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन मिलकर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। यही वजह है कि इन चार देशों के जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विसेज पीएमआई और उपभोक्ता धारणा आंकड़े यूरो पर गहरा असर डालते हैं। इसके अलावा व्यापार संतुलन भी एक प्रमुख आर्थिक पैमाना है, जो निर्यात और आयात के अंतर को मापता है। मजबूत निर्यात मांग मुद्रा के मूल्य को ऊपर उठाती है। बुधवार को वैश्विक बाजार में अन्य मुद्राओं में भी हलचल देखी गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.57 प्रतिशत गिरकर 0.6947 पर आ गया, जबकि दिन में यह 0.6995 तक पहुंचा था। डॉलर/येन 157.00 से नीचे रहा और बैंक ऑफ जापान की सख्त नीतिगत उम्मीदों से येन को समर्थन मिला। वहीं सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के पार जाने के बाद फिसलकर 4,150 डॉलर के करीब पहुंच गया। यूरो/डॉलर जोड़ी बुधवार को 1.1312 तक गिरी, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं व ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को उजागर करती है।

















