मुद्रा बाजार में बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जहां यह प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तर 0.7000 के नीचे खिसक गया। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं में कमी आने के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अपनी बढ़त बनाए रखने में असमर्थ रहा। इस कमजोरी का सबसे बड़ा कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की गवर्नर मिशेल बुलॉक का वह संकेत रहा, जिसमें उन्होंने भविष्य में दरों में और सख्ती की जरूरत न होने की बात कही। इसके चलते बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 0.6947 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि सत्र के दौरान इसने 0.6995 का उच्चतम स्तर छुआ था।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर बाजार का नया अनुमान
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए हालिया महंगाई आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने के आक्रामक दांवों को कमजोर कर दिया है। मनी मार्केट्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, केवल एक दिन पहले तक कारोबारी अक्टूबर में 25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि की 60 प्रतिशत से अधिक संभावना देख रहे थे। हालांकि, नए महंगाई परिदृश्य के बाद समीकरण तेजी से बदले हैं और अब लगभग 61 प्रतिशत संभावना इस बात की मानी जा रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी आगामी नीति समीक्षा में दरों को स्थिर रखेगा। आमतौर पर अमेरिकी दरों में ठहराव से गैर-अमेरिकी मुद्राओं को मजबूती मिलती है, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मामले में केंद्रीय बैंक के बयानों ने इस लाभ को पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया।
गवर्नर मिशेल बुलॉक का बयान और ऑस्ट्रेलिया में महंगाई की स्थिति
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में आई ताजा बिकवाली सीधे तौर पर केंद्रीय बैंक के शीर्ष नेतृत्व की टिप्पणियों से जुड़ी है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि यदि मुद्रास्फीति में कमी का दौर जारी रहता है, तो ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी की आवश्यकता नहीं हो सकती है। इस नरम रुख ने बाजार में चल रहे उन कयासों पर विराम लगाने का प्रयास किया, जो नीतिगत सख्ती जारी रहने की बात कह रहे थे।
इसी बीच ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक मुद्रास्फीति आंकड़े भी सामने आए। देश का ट्रिम्ड मीन सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) वार्षिक आधार पर 3.6 प्रतिशत पर बना रहा। अर्थशास्त्रियों के पूर्व अनुमानों के अनुरूप यह आंकड़ा अपरिवर्तित रहा, जिससे यह संकेत मिला कि मुख्य मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी बना हुआ है लेकिन उसमें कोई नया उछाल दर्ज नहीं किया गया है।
एएनजेड विश्लेषकों का अलग नजरिया और दरों में वृद्धि की चेतावनी
केंद्रीय बैंक के नरम संकेतों के बावजूद वित्तीय संस्थानों के सभी विश्लेषक इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहे हैं। एएनजेड (ANZ) के विश्लेषकों ने अपने एक शोध नोट में उल्लेख किया कि अगस्त महीने का सीपीआई आंकड़ा तीसरी तिमाही के ट्रिम्ड मीन मुद्रास्फीति के लिए उनके 1.0 प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही के मौजूदा अनुमान के पूरी तरह अनुकूल है।
एएनजेड विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के चिपचिपे रुख को देखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ओर से एक और ब्याज दर वृद्धि का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। संस्था का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक नवंबर की बैठक में एक और नीतिगत दर वृद्धि का कदम उठा सकता है, क्योंकि मुख्य महंगाई दर को लक्ष्य सीमा में वापस लाने के लिए अतिरिक्त सख्ती की आवश्यकता पड़ सकती है।
आगामी आर्थिक घटनाक्रम और वैश्विक मुद्राओं का हाल
ऑस्ट्रेलियाई बाजार के लिहाज से आने वाले सत्र काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं। आगामी घरेलू आर्थिक कैलेंडर में अगस्त के व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) के परिणाम और वित्तीय स्थिरता समीक्षा (फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिव्यू) जारी किए जाने हैं, जिन पर निवेशकों की गहरी नजर रहेगी। दूसरी तरफ अमेरिकी बाजार में निवेशक फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के संबोधनों, साप्ताहिक बेरोजगार दावों (जॉबलेस क्लेम्स) और शुक्रवार को जारी होने वाले गैर-कृषि पेरोल (नॉनफार्म पेरोल) आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो डॉलर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
बुधवार के सत्र में अमेरिकी डॉलर (ग्रीनबैक) में देर से आई वापसी ने मुद्रा बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जुलाई के अंत के बाद पहली बार 0.6900 के मध्य क्षेत्र में फिसला। अन्य वैश्विक मुद्राओं की बात करें तो जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे बना रहा, जहां बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त नीतिगत उम्मीदों और संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया। उधर सोने की कीमतों ने यू-टर्न लेते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,150 डॉलर के स्तर की ओर रुख किया, जबकि इससे पहले यह 4,200 डॉलर के पार निकल गया था। इसके साथ ही यूरो (EUR/USD) गिरकर 1.1312 पर पहुंच गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे कारोबार कर रहा है। समग्र मासिक प्रदर्शन को देखें तो प्रमुख मुद्राओं की तुलना में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति में रहा।
तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख चार्ट स्तर
चार्ट संरचना के आधार पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) के लिए ऊपर की ओर पहला बड़ा प्रतिरोध 0.7051 के आसपास दिखाई देता है, जहां अपवर्ड ट्रेंड-लाइन का ब्रेक हुआ था। इसके बाद 0.7092 के पास सिंपल मूविंग एवरेज का एक सघन क्लस्टर है, जिसके पार निकलने पर 0.7198 का क्षैतिज अवरोध सामने आएगा। लंबी अवधि के चार्ट पर पूर्व सपोर्ट ट्रेंड-लाइन ब्रेक के आधार पर उच्च प्रतिरोध स्तर 0.7398, 0.8763 और 0.9638 पर स्थित हैं।
नीचे की ओर, तत्काल सहारा 0.6909 के स्तर पर स्थित अपवर्ड-स्लोपिंग ट्रेंड लाइन से मिल रहा है। यदि दैनिक आधार पर भाव इस क्षेत्र के नीचे बंद होता है, तो यह मंदी के ढांचे को और पुख्ता करेगा, जिससे मुद्रा जोड़ी में अतिरिक्त कमजोरी देखने को मिल सकती है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में यह जोड़ी 0.6947 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.6989 से 0.60 प्रतिशत नीचे है। इसका 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 26 के स्तर पर है जो ओवरसोल्ड क्षेत्र को दर्शाता है, जबकि एमएसीडी (MACD) मंदी का रुख दिखा रहा है। 52-सप्ताह का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है, जिसमें तत्काल धुरी बिंदु 0.6948, प्रथम समर्थन 0.6947 और दूसरा समर्थन 0.6946 पर केंद्रित है।





















