जापानी अर्थव्यवस्था में औद्योगिक उत्पादन और व्यापारिक धारणा को मापने वाले प्रमुख तानकान सर्वेक्षण के तीसरे तिमाही के परिणाम सामने आए हैं। तीसरी तिमाही में जापान के बड़े विनिर्माताओं के मूड को दर्शाने वाला प्रमुख सूचकांक सुधरकर 24 के स्तर पर दर्ज किया गया, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह 22 के स्तर पर था। हालांकि, उत्पादन और मांग में सुधार के बावजूद यह नतीजा विश्लेषकों और बाजार की 25 की आम सहमति की उम्मीद से थोड़ा कमजोर रहा है। विनिर्माण क्षेत्र में आई इस धीमी बढ़त ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में जापानी मुद्रा और अमेरिकी डॉलर के बीच हलचल बढ़ा दी है।
सेवा और गैर-विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती
औद्योगिक कारखानों के विपरीत, गैर-विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। तीसरी तिमाही के दौरान जापान का तानकान नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स नरम पड़कर 35 पर आ गया, जो पिछली तिमाही में 37 दर्ज किया गया था। बाजार विश्लेषकों का अनुमान था कि यह सूचकांक 36 पर स्थिर रह सकता है, लेकिन वास्तविक संख्या इस अनुमान से भी नीचे रही। घरेलू स्तर पर कमजोर औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री के कमजोर आंकड़ों के बीच गैर-कारखाना क्षेत्र की यह सुस्ती अर्थव्यवस्था के मिश्रित परिदृश्य को रेखांकित करती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में येन और डॉलर की स्थिति
आर्थिक संकेतकों के जारी होने के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में उतार-चढ़ाव देखा गया। एक समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन 0.14 प्रतिशत की मजबूती के साथ 157.50 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई 157.00 के स्तर से नीचे दबाव में बना रहा। बैंक ऑफ जापान की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया, जिससे घरेलू स्तर पर निराशाजनक खुदरा बिक्री और कारखाने के उत्पादन के असर को संतुलित करने में मदद मिली। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक कमजोरी ने भी इस मुद्रा जोड़ी को नीचे की ओर बनाए रखने में भूमिका निभाई।
जापानी मुद्रा के मूल्य निर्धारण के मूल कारक
जापानी येन दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में से एक है। मुद्रा बाजार में येन का मूल्य मुख्य रूप से जापान के व्यापक आर्थिक प्रदर्शन पर निर्भर करता है। हालांकि, सबसे निर्णायक कारक बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति, अमेरिकी और जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर तथा वैश्विक स्तर पर वित्तीय निवेशकों के बीच जोखिम की भावना हैं। जापानी येन को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश का साधन माना जाता है। वैश्विक बाजार में किसी भी तरह के तनाव, आर्थिक अनिश्चितता या उथल-पुथल के समय अंतरराष्ट्रीय निवेशक अधिक जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर अपेक्षाकृत स्थिर और विश्वसनीय मानी जाने वाली जापानी मुद्रा में लगाना पसंद करते हैं। ऐसे संकटपूर्ण दौर में अन्य जोखिम भरी मुद्राओं की तुलना में येन की मजबूती काफी बढ़ जाती है।
बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति और ऐतिहासिक बदलाव
मुद्रा के मूल्य और स्थिरता पर नियंत्रण रखना बैंक ऑफ जापान के मुख्य संवैधानिक दायित्वों में शामिल है, इसलिए केंद्रीय बैंक के कदम येन की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं। बैंक ऑफ जापान ने समय-समय पर मुद्रा बाजार में सीधे हस्तक्षेप भी किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामान्य तौर पर येन के मूल्य को अत्यधिक मजबूत होने से रोकना रहा है, हालांकि अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के राजनीतिक दबाव और चिंताओं के कारण केंद्रीय बैंक अक्सर इस तरह के प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से परहेज करता है।
साल 2013 से लेकर 2024 तक के लंबे दौर में बैंक ऑफ जापान ने अपनी बेहद ढीली मौद्रिक नीति जारी रखी थी। इस नीतिगत ढील के कारण दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों और बैंक ऑफ जापान की नीतियों के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया। अमेरिका के फेडरल रिजर्व और जापानी केंद्रीय बैंक के रुख में यह भिन्नता विशेष रूप से 10-वर्षीय अमेरिकी और जापानी सरकारी बॉन्ड प्रतिफल के बीच का अंतर बढ़ाने का कारण बनी, जिसने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी और जापानी येन को लगातार कमजोर किया। हालांकि, 2024 में बैंक ऑफ जापान ने अपनी इस अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का ऐतिहासिक फैसला किया। बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति को सामान्य बनाने और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती शुरू किए जाने के बाद दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बॉन्ड यील्ड का यह अंतर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, जिससे येन को नई ताकत मिल रही है।
वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों का रुख
वैश्विक वित्तीय मंच पर अन्य संपत्तियों और मुद्राओं में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.57 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक रुख अपनाने की संभावना कम होने के बावजूद, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक के नरम रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर गहरा दबाव डाला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6995 के उच्चतम स्तर को छूने के बाद फिसलकर 0.6947 पर कारोबार कर रहा था।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी तेज उलटफेर देखने को मिला। बुधवार को कीमती धातु सोने ने 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार किया था, लेकिन बाद में रफ्तार धीमी पड़ने पर यह फिसलकर 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में लौट आया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले रुख और डॉलर द्वारा अपनी दैनिक गिरावट की भरपाई करने की कोशिशों के बीच सोने की शुरुआती बढ़त सीमित हो गई।
यूरोपीय मुद्रा यूरो पर भी अमेरिकी डॉलर की ताकत और ऊर्जा संकट का दोहरा दबाव दिखाई दिया। यूरो और डॉलर की जोड़ी गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी में दर्ज 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में यह निरंतर गिरावट अमेरिकी डॉलर के दबदबे, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और महंगी ऊर्जा कीमतों के प्रति यूरोप की संवेदनशीलता के कारण हुई है, हालांकि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति के किसी अप्रत्याशित झटके से यूरो को भविष्य में कुछ तात्कालिक राहत मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

















