यूरोपीय संघ के सांख्यिकी कार्यालय यूरोस्टेट के अनुसार यूरो क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों में जुलाई महीने के दौरान 0.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों के 0.2 प्रतिशत के पूर्व अनुमान की तुलना में हल्का धीमा रहा है। इससे पूर्व जून के आंकड़ों में भी 0.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी, जिसे पहले 0 प्रतिशत रहने के अनुमान से संशोधित कर नीचे किया गया था। वार्षिक स्तर पर तुलना की जाए तो औद्योगिक उत्पादन पूरी तरह सपाट बना रहा, जबकि बाजार 0.1 प्रतिशत संकुचन की आशंका जता रहा था, जो कि पिछले संशोधन के बाद दर्ज 0.3 प्रतिशत गिरावट से बेहतर रहा है, जिसे शुरुआत में 0.1 प्रतिशत बढ़त बताया गया था।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और मजबूत होता डॉलर
व्यापक वित्तीय बाजारों में बुधवार के एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियन डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) लगातार तीसरे दिन नकारात्मक दायरे में बना रहा। यह जोड़ी 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के काफी करीब कारोबार करती देखी गई। अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के पास मजबूती से टिका हुआ है, जिसे आगामी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा हुई महंगाई की चिंताओं का समर्थन मिल रहा है। तेल प्रेरित मुद्रास्फीति के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को मजबूती मिल रही है, जबकि जोखिम उठाने वाली मुद्रा मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
इसी तरह बुधवार के एशियाई सत्र में डॉलर बनाम येन (USD/JPY) ने भी बढ़त का रुख दिखाते हुए 155.00 के स्तर को पार कर एक सप्ताह का नया उच्च स्तर छू लिया। कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताएं और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती की संभावनाएं अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स को लगातार सहारा दे रही हैं। दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर डॉलर की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा के रूप में मांग और बढ़ गई है। इसके बावजूद, यह करेंसी जोड़ी 155.50 के मध्य स्तर से नीचे ही सीमित बनी रही क्योंकि कारोबारी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले और गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक से पहले किसी बड़े दांव को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं।
सोने में सीमित बढ़त और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर टिकी नजरें
यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में मामूली इंट्राडे बढ़त दर्ज की गई, हालांकि इसमें लगातार लिवाली का अभाव दिखा और यह 4,350 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे ही बना रहा। अमेरिकी डॉलर में दो सप्ताह के उच्च स्तर से हल्की मुनाफावसूली होने से कीमती धातुओं को निचली सतह पर थोड़ा सहारा जरूर मिला है। इसके बावजूद, सोने के ट्रेडर प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए आक्रामक सौदे करने से बच रहे हैं और फिलहाल किनारे बैठकर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
इस सप्ताह वित्तीय बाजारों का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु फेडरल रिजर्व का निर्णय बना हुआ है। इस नीतिगत घोषणा से ठीक पहले सामने आए अगस्त माह के अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने काफी मजबूत तस्वीर पेश की थी, जिसके कारण ब्याज दर वायदा बाजारों में फेड द्वारा कड़े रुख अपनाने के अनुमान तेजी से बढ़ गए थे। हालांकि, इसके बाद जारी हुए अमेरिकी अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों ने निवेशकों के लिए कहीं अधिक अहम भूमिका निभाई और आगामी नीतिगत फैसलों के परिदृश्य को नए सिरे से प्रभावित किया है।
बैंक ऑफ जापान की नीतिगत सख्ती और वैश्विक पूंजी प्रवाह का बदलता चक्र
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में जापान की बेहद कम और शून्य के करीब रही ब्याज दरों ने एक दशक से भी अधिक समय तक दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस दीर्घकालिक नीतिगत ढांचे के चलते जापानी येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बनकर उभरा था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इसी सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को एक बार फिर सख्त करने का अनुमान लगाया जा रहा है, यह ऐतिहासिक वित्तीय लाभ अब एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। जब दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं उच्च मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में लगातार इजाफा कर रही थीं, तब जापान लंबे समय तक दुनिया के सामने एक अलग अपवाद बना रहा था, लेकिन अब वहां भी केंद्रीय बैंक के नीतिगत रुख में ऐतिहासिक बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं।



















