अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में इस समय केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों, भू-राजनीतिक अस्थिरता और महंगाई के नए दबावों का व्यापक असर देखा जा रहा है। अमेरिकी डॉलर प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मजबूत स्थिति में बना हुआ है, जबकि बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दुनिया भर के निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर निर्णय और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। इस पृष्ठभूमि में विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों, विदेशी मुद्रा जोड़ों और कमोडिटीज में उल्लेखनीय हलचल दर्ज की गई है।
यूरोपीय विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती और संरचनात्मक बदलाव
यूरोपीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर औद्योगिक उत्पादन से जुड़े ताजा आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। साल की शुरुआत में जनवरी के कमजोर आंकड़ों के बाद, मध्य पूर्व संकट और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के बावजूद यूरो क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादन में लगातार चार महीनों तक विस्तार दर्ज किया गया था। इस दौरान एशिया के मुकाबले यूरोपीय उद्योग को मिले तुलनात्मक लाभ ने उत्पादन सुधार को मजबूती दी थी। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में बढ़ते खर्च से जुड़े प्रयासों ने भी कई विनिर्माण खंडों को संरचनात्मक रूप से सहारा दिया।
हालांकि, हाल के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि विनिर्माण क्षेत्र अपनी शुरुआती गति खो चुका है। यूरो क्षेत्र के समग्र उत्पादन में जून के दौरान 0.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी, जिसके बाद जुलाई में भी उत्पादन 0.1 प्रतिशत और घट गया। इस लगातार गिरावट के कारण वार्षिक आधार पर औद्योगिक उत्पादन लगभग स्थिर स्थिति में पहुंच गया है। जहां एक ओर पूंजीगत सामान और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों ने कुछ लचीलापन दिखाया है, वहीं उपभोक्ता से जुड़े उद्योगों में कमजोरी काफी गंभीर बनी हुई है। विशेषकर गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के विनिर्माण में पिछले वर्ष की तुलना में भारी गिरावट देखी गई है।
मुद्रा बाजारों में डॉलर का दबदबा और AUD/USD पर दबाव
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में दबाव में नजर आया। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के बेहद करीब कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उपजी महंगाई की चिंताएं और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा रही हैं। इस माहौल में अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे जोखिम-संवेदनशील मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया है।
USD/JPY में तेजी और बैंक ऑफ जापान की भावी रणनीति
जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा में जोरदार बढ़त दर्ज की गई। बुधवार को एशियाई कारोबार में USD/JPY 155.00 के स्तर को पार करते हुए एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति की आशंकाओं और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख ने डॉलर की मांग को हवा दी है। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक आरक्षित मुद्रा के तौर पर डॉलर की भूमिका को और मजबूत किया है।
हालांकि, दिन के कारोबार में यह मुद्रा जोड़ा 155.00 के मध्य स्तर से नीचे ही सीमित रहा, क्योंकि निवेशक फेड के आने वाले फैसले और गुरुवार से शुरू हो रही बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले सतर्क रुख अपना रहे हैं। जापान की दशकों लंबी बेहद कम ब्याज दर नीति ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया था। जब अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाईं, तब भी जापान एक अलग रुख पर कायम रहा। लेकिन अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी नीति सख्त करने की संभावनाओं के बीच यह सस्ता फंडिंग लाभ एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है।
फेडरल रिजर्व का रुख और सोने की चाल
अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए हालिया वृहद आंकड़ों ने नीतिगत परिदृश्य को काफी संवेदनशील बना दिया है। अगस्त महीने के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने पहले ही ब्याज दर बाजारों में आक्रामक नीतिगत रुख की संभावनाओं को हवा दी थी। इसके बाद जारी हुए अमेरिकी अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों ने नीतिगत समीक्षा के लिए और भी निर्णायक भूमिका तैयार कर दी है।
दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट पर रोक लगाते हुए वापसी की है। सप्ताह के मध्य में अच्छी बढ़त हासिल करते हुए कीमती धातु फिर से 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के दायरे में लौट आई है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेड की बैठक से पहले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई सुस्ती के बावजूद सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने में यह स्थिरता देखने को मिली है। वैश्विक निवेशक अब यह देख रहे हैं कि आगामी नीतिगत फैसलों से तरलता और आर्थिक विकास की दिशा किस ओर मुड़ेगी।



















