सोने की कीमत बीते कई दिनों से करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास टिकी हुई है, लेकिन अमेरिका से आने वाला महंगाई का ताजा डेटा इस शांति को हिला सकता है। कॉमर्जबैंक की विश्लेषक थू लान न्गुयेन का कहना है कि फेड की सितंबर बैठक में ब्याज दर पर फैसला अब पूरी तरह इसी हफ्ते जारी होने वाले इन्फ्लेशन आंकड़ों पर टिक गया है, जिससे सोने के बाजार में बड़ी उठापटक का खतरा बढ़ गया है।
मजबूत रोजगार आंकड़ों के बावजूद सोना नहीं फिसला
न्गुयेन के मुताबिक सोना बीते कई दिनों से करीब 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर स्थिर बना हुआ है, और यह स्तर उसने उन आंकड़ों के बावजूद बनाए रखा जो आमतौर पर कीमतों को हिला देते हैं। पिछले शुक्रवार को आया अमेरिकी लेबर मार्केट डेटा उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत निकला था। मजबूत रोजगार आंकड़े आमतौर पर सोने के लिए अच्छी खबर नहीं माने जाते, क्योंकि इनसे फेड पर ब्याज दरें घटाने का दबाव कम हो जाता है और ऊंची दरें लंबे समय तक बने रहने की आशंका बढ़ जाती है।
न्गुयेन ने कहा, "सोने की कीमत हाल के दिनों में करीब 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर स्थिर बनी हुई है।" उन्होंने बताया कि उम्मीद से मजबूत रोजगार आंकड़ों ने बाजार में सिर्फ थोड़ी देर के लिए हलचल मचाई, उसके बाद कीमतें फिर पुराने स्तर पर लौट आईं। इतनी संयमित प्रतिक्रिया बताती है कि निवेशक फिलहाल रोजगार के आंकड़ों को पुरानी खबर मानकर पीछे छोड़ चुके हैं और अब महंगाई के आंकड़ों पर दांव लगाने की तैयारी में हैं।
अब जॉब्स डेटा नहीं, महंगाई का आंकड़ा तय करेगा फेड का फैसला
न्गुयेन के अनुसार, सोने ने शुक्रवार के मजबूत रोजगार आंकड़ों को नजरअंदाज इसलिए किया क्योंकि इस हफ्ते आने वाला अमेरिकी महंगाई डेटा अब फेड के फैसले के लिए सबसे निर्णायक कारक बन चुका है। फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने भी हाल ही में अपने बयान में लगभग इसी बात की पुष्टि की, जिससे बाजार को यह संकेत मिला कि नीति निर्माता रोजगार के मजबूत आंकड़ों से ज्यादा तवज्जो महंगाई के रुझान को देने वाले हैं। फेड गवर्नर की टिप्पणी को अलग से अहम इसलिए माना जा रहा है क्योंकि वालर फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य हैं, और उनके बयान अक्सर पूरी समिति की सोच का संकेत माने जाते हैं, भले ही उन्होंने कोई औपचारिक फैसला न सुनाया हो।
इस बदलाव का सीधा मतलब है कि अब निवेशकों की पूरी नजर सिर्फ एक आंकड़े पर टिक गई है। पहले हर महीने के रोजगार आंकड़ों से फेड की अगली चाल का अंदाजा लगाया जाता था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी लगभग पूरी तरह महंगाई के आंकड़ों पर आ गई है, जिससे इस हफ्ते जारी होने वाले डेटा की अहमियत काफी बढ़ गई है।
ब्याज दर बढ़ोतरी पर बाजार बंटा हुआ, करीब 60% संभावना
फ्यूचर्स बाजार में इस समय फेड की सितंबर बैठक को लेकर राय साफ तौर पर बंटी हुई है। बाजार फिलहाल ब्याज दर बढ़ोतरी की करीब 60% संभावना जता रहा है, जो किसी स्पष्ट बहुमत से कोसों दूर है। इतना करीबी अनुमान इस बात का संकेत है कि महंगाई के आंकड़े आते ही निवेशकों का रुख किसी भी दिशा में तेजी से पलट सकता है।
सोने की कीमतें आमतौर पर ब्याज दरों की उम्मीदों के उलट चलती हैं। ब्याज दर बढ़ने पर बिना ब्याज देने वाली संपत्ति सोने को पकड़े रखना निवेशकों को महंगा सौदा लगने लगता है, जबकि फेड के दरें न बढ़ाने की सूरत में सोना पकड़े रखने की कीमत कम रहती है और यह निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लगता है।
महंगाई का आंकड़ा चौंकाया तो बड़ी उठापटक तय
न्गुयेन ने आगाह किया है कि अगर महंगाई का आंकड़ा उम्मीद से काफी ज्यादा या काफी कम आता है, तो ब्याज दर को लेकर बाजार के मौजूदा अनुमानों में बड़ा सुधार हो सकता है। अगर आंकड़ा उम्मीद से ज्यादा गर्म निकला, तो ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदें और मजबूत हो जाएंगी, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दबाव के रूप में दिख सकता है। वहीं अगर आंकड़ा नरम रहा, तो बाजार का रुख पलट सकता है और सोने में तेजी लौट सकती है।
व्यावहारिक तौर पर इस तरह के सुधार का असर सबसे पहले फेड फंड्स फ्यूचर्स और ऑप्शन बाजार में दिखता है, जहां महंगाई का आंकड़ा आते ही मिनटों के भीतर ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना को दोबारा आंका जाता है, इससे पहले कि इसका असर सोने, करेंसी या शेयर बाजार तक पहुंचे।
बाजार फिलहाल जिस तरह लगभग बराबर बंटा हुआ है, उसमें दोनों ही हालात कीमतों में बड़ी हलचल ला सकते हैं। सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर प्रति ट्रॉय औंस में तय होती है, इसलिए यहां आने वाला कोई भी बड़ा उतार-चढ़ाव दुनियाभर के बुलियन बाजारों के साथ-साथ गोल्ड ईटीएफ और फिजिकल सोने की कीमतों तक असर डाल सकता है। यही वजह है कि हाल के दिनों की शांति के बावजूद आने वाला हफ्ता सोने के निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरा साबित हो सकता है।



















