वॉशिंगटन और वैश्विक वित्तीय बाजारों में निवेशकों की निगाहें अमेरिकी केंद्रीय बैंक के आगामी नीतिगत फैसले पर टिकी हुई हैं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी के फैसले और फेड चेयरमैन वॉर्श की प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले विदेशी मुद्रा बाजार, कीमती धातुओं और डिजिटल एसेट्स क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। वित्तीय संस्थान स्कॉटियाबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को यथावत रखता है और आगे के लिए कोई सख्त संकेत जारी नहीं करता है, तो अमेरिकी डॉलर में गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा बैंक ऑफ इंग्लैंड की आगामी बैठक के कारण वैश्विक निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
स्कॉटियाबैंक का विश्लेषण: ब्याज दरें स्थिर रहने पर अमेरिकी डॉलर पर बढ़ सकता है दबाव
स्कॉटियाबैंक के बाजार विश्लेषकों ने केंद्रीय बैंक की इस बैठक को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। वित्तीय स्वैप बाजार में इस समय ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 33 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह 33 प्रतिशत का आंकड़ा ऐतिहासिक मापदंडों से काफी कम है। अतीत में, चेयरमैन वॉर्श के कार्यकाल से पहले, केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में बदलाव का स्पष्ट संकेत तब माना जाता था जब स्वैप बाजार में 80 प्रतिशत से अधिक की संभावना दिखाई देती थी। इसलिए विश्लेषकों की राय में आज ब्याज दरों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी होने की वास्तविक संभावना बहुत कम है।
इसके अलावा स्कॉटियाबैंक का मानना है कि जब तक केंद्रीय बैंक की आंतरिक समीक्षाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक ब्याज दरों में किसी भी दिशा में बदलाव होने की उम्मीद न के बराबर है। यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता और भविष्य के लिए भी कोई आक्रामक दिशा तय नहीं करता, तो अमेरिकी डॉलर कमजोर हो सकता है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY यदि इंट्राडे कारोबार के दौरान 101.10 के स्तर से नीचे फिसल जाता है, तो निकट भविष्य में डॉलर में और अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है।
प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़े: ब्रिटिश पाउंड और यूरो में कमजोरी
अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच बुधवार को प्रमुख विदेशी मुद्रा जोड़ियों में दबाव दर्ज किया गया। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी GBP/USD 1.3280 के आसपास कारोबार करती दिखी, जो कि पिछले कई हफ्तों का निचला स्तर है। फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले ग्रीनबैक की मजबूती के कारण पाउंड अपनी गति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है। इसके साथ ही पाउंड के कारोबारियों की नजरें गुरुवार को होने वाली बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत बैठक पर भी टिकी हुई हैं, जिससे ब्रिटेन की मौद्रिक नीति का भावी रुख स्पष्ट होगा।
वहीं दूसरी ओर यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD में भी सीमित दायरे के भीतर कारोबार देखा गया। बुधवार को यह जोड़ी 1.1400 के स्तर से नीचे बनी रही। मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक संकट गहराने के कारण अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में समर्थन मिला, जिसके चलते यूरो में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इस समय मुद्रा बाजार के तमाम प्रतिभागी केवल एफओएमसी के परिणाम और उसके बाद चेयरमैन वॉर्श द्वारा दिए जाने वाले बयानों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर का असर
कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतें दबाव के बावजूद अपने महत्वपूर्ण स्तर को बनाए रखने में सफल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रति ट्रॉय औंस $4,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रहा है। एक तरफ अमेरिकी डॉलर की मामूली बढ़त ने सोने पर दबाव बनाया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य व राजनीतिक तनाव के कारण सोने को निचले स्तरों पर सुरक्षित निवेश की मांग का सहारा मिल रहा है। निवेशक एफओएमसी की घोषणा के बाद ही सोने की भावी दिशा को लेकर कोई बड़ा दांव लगाने के मूड में हैं।
डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में इस सप्ताह की शुरुआत में हुई हल्की गिरावट के बाद बुधवार को भी बिकवाली का दबाव देखा गया। प्रमुख डिजिटल कॉइन बिटकॉइन यानी BTC अपने एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन से नीचे खिसक गया है। इसी तरह एथेरियम यानी ETH भी अपने प्रमुख रेजिस्टेंस जोन का परीक्षण कर रहा है। दूसरी ओर रिपल यानी XRP का भाव गिरकर $1.00 के मनोवैज्ञानिक सपोर्ट स्तर की ओर बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि फेड के फैसले और डॉलर की चाल का असर आने वाले सत्रों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
बाजार सहभागियों के लिए प्रमुख निष्कर्ष
समग्र रूप से देखा जाए तो वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। एक ओर स्कॉटियाबैंक द्वारा रेखांकित DXY का 101.10 का तकनीकी स्तर अमेरिकी डॉलर के अल्पकालिक रुझान को निर्धारित करेगा, वहीं दूसरी ओर मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक संकट कमोडिटी और मुद्रा बाजार दोनों को प्रभावित कर रहा है। गुरुवार को बैंक ऑफ इंग्लैंड की बैठक और एफओएमसी की मौद्रिक समीक्षा के बाद आने वाले बयान यह तय करेंगे कि चालू सप्ताह के शेष दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा किस ओर रहेगी।



















