अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में कीमती धातुओं पर दबाव गहराता जा रहा है, जहां चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख और आगामी नीतिगत समीक्षाओं में ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने के संकेतों ने बिना ब्याज वाले सुरक्षित निवेश विकल्पों के आकर्षण को सीमित कर दिया है। इसी दबाव के बीच वैश्विक बाजार में चांदी का भाव लुढ़ककर लगभग 66.50 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक आ चुका है। निवेशक अमेरिकी विनिर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण पीएमआई आंकड़ों के जारी होने से पहले बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
बाजार के मौजूदा संकेत दर्शा रहे हैं कि व्यापारी दिसंबर में होने वाली नीतिगत बैठक में दर वृद्धि की 89.2% संभावना मानकर चल रहे हैं। जब केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दरों को 3.75% से 4.00% के दायरे में ले जाने का लक्ष्य रखता है, तो सरकारी बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियों पर मिलने वाला प्रतिफल आकर्षक बन जाता है। इस आर्थिक समीकरण का सीधा नुकसान चांदी और सोने जैसी बिना नियमित आय वाली संपत्तियों को उठाना पड़ता है, क्योंकि इन पर किसी तरह का ब्याज या लाभांश नहीं मिलता है। इसी कारण हेज फंड और संस्थागत निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित परिसंपत्तियों के अनुपात को समायोजित कर रहे हैं।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभाव
कीमती धातुओं के बाजार में एक तरफ केंद्रीय बैंक का दबाव है, तो दूसरी तरफ पश्चिम एशिया से जुड़े कूटनीतिक घटनाक्रमों का भी सीधा असर देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में जानकारी दी कि अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच एक बेहद सकारात्मक बैठक संपन्न हुई है। इस वार्ता के बाद तेहरान की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि यदि अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल सकता है।
कच्चे तेल के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग के सामान्य होने की संभावनाओं ने ऊर्जा बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताओं को कुछ हद तक शांत किया है। कच्चे तेल के दामों में आई स्थिरता से वैश्विक स्तर पर व्यापक मुद्रास्फीति का दबाव कम होने की उम्मीद बंधी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऊर्जा लागत में कमी आती है और अमेरिका एवं ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव घटता है, तो इससे महंगाई दर नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश के रूप में चांदी की तात्कालिक मांग में भी कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन आर्थिक स्थिरता धातु के औद्योगिक उपयोग को समर्थन दे सकती है।
निवेश परिसंपत्ति के रूप में चांदी की ऐतिहासिक भूमिका
चांदी वैश्विक वित्तीय प्रणाली में निवेशकों द्वारा व्यापक रूप से कारोबार की जाने वाली एक प्रमुख कीमती धातु है। इतिहास के विभिन्न चरणों में इसने धन के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। यद्यपि लोकप्रिय निवेश के मामले में सोने को अक्सर प्राथमिकता दी जाती है, परंतु निवेशक अपने पोर्टफोलियो में जोखिम को बांटने के लिए चांदी का सक्रिय रूप से उपयोग करते हैं। उच्च मुद्रास्फीति के दौर में क्रय शक्ति की सुरक्षा के लिए इसे एक प्रभावी बचाव के रूप में देखा जाता है।
निवेशक भौतिक रूप में चांदी के सिक्के और छड़ें खरीद सकते हैं, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के भावों पर नजर रखने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों के माध्यम से इसमें पूंजी लगा सकते हैं। चांदी की कीमतों का निर्धारण कई जटिल कारकों के संतुलन पर निर्भर करता है। जब दुनिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता या गंभीर आर्थिक मंदी की आशंका गहराती है, तो सुरक्षित निवेश का दर्जा मिलने से इसके भाव चढ़ जाते हैं, भले ही यह बढ़त सोने की तुलना में थोड़ी कम गति से दर्ज की जाती हो। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसका मूल्यांकन होने के कारण डॉलर सूचकांक की मजबूती सीधे तौर पर चांदी की कीमतों को सीमित करती है, जबकि कमजोर डॉलर इसके भावों को ऊपर खींचने में मदद करता है।
औद्योगिक मांग, उत्पादन और सोने-चांदी का अनुपात
चांदी की सबसे बड़ी खासियत इसका दोहरा स्वरूप है, जहां यह न केवल एक कीमती धातु है बल्कि एक अपरिहार्य औद्योगिक कच्चा माल भी है। सभी ज्ञात धातुओं में चांदी की विद्युत चालकता सबसे अधिक होती है, जो तांबे और सोने से भी श्रेष्ठ मानी जाती है। इसी अद्वितीय गुण के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सौर ऊर्जा उपकरणों के निर्माण में चांदी का व्यापक पैमाने पर उपभोग किया जाता है। जब वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में तेजी आती है, तो चांदी की मांग में उछाल आता है और इसके भाव बढ़ते हैं, जबकि औद्योगिक सुस्ती इसके दामों को नीचे ले आती है।
खनन उत्पादन के दृष्टिकोण से देखें तो पृथ्वी के भूगर्भ में चांदी की उपलब्धता सोने की तुलना में कहीं अधिक प्रचुर है, जिससे इसकी आपूर्ति निरंतर बनी रहती है। खनन आपूर्ति के साथ-साथ पुरानी धातु के पुनर्चक्रण की दर भी कुल बाजार उपलब्धता को तय करने में अहम भूमिका निभाती है। वैश्विक स्तर पर तीन बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं चांदी के कारोबार को सबसे अधिक प्रभावित करती हैं। अमेरिका और विशेष रूप से चीन का विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं में भारी मात्रा में चांदी की खपत करता है। वहीं दूसरी ओर, भारत में आभूषणों और घरेलू उपयोग के लिए आम उपभोक्ताओं की मांग अंतरराष्ट्रीय कीमतों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बाजार में अक्सर चांदी की चाल सोने के अनुरूप ही देखी जाती है, क्योंकि दोनों का सुरक्षित निवेश आधार लगभग समान रहता है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्य को मापने के लिए निवेशक गोल्ड-सिल्वर अनुपात का विश्लेषण करते हैं। यह अनुपात यह दर्शाता है कि एक औंस सोने का मूल्य चुकाने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। बाजार विश्लेषक इस अनुपात के बहुत ऊपर जाने को इस बात का संकेत मानते हैं कि चांदी का मूल्य अपनी वास्तविक क्षमता से कम आंका जा रहा है अथवा सोना अत्यधिक महंगा हो चुका है। इसके विपरीत, जब यह अनुपात ऐतिहासिक स्तरों से नीचे आ जाता है, तो यह माना जाता है कि चांदी की तुलना में सोने का मूल्यांकन सस्ता चल रहा है।
मुद्रा बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की वर्तमान हलचल
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) का युग्म 0.7100 के दायरे में सीमित नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के प्रारंभिक पीएमआई आंकड़ों में विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन और सेवा क्षेत्र में लगातार दूसरे महीने बेहद धीमी गति से विस्तार दर्ज किया गया, जिससे स्थानीय मुद्रा दबाव में रही। इसके साथ ही गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण शिखर बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर की मजबूती ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर लगातार दबाव बनाए हुए है, जबकि मुद्रा व्यापारियों ने अमेरिका-ईरान के बीच हुई परोक्ष वार्ता पर सीमित प्रतिक्रिया दी है।
इसी प्रकार अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) का युग्म एशियाई सत्र में 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जो पिछले शुक्रवार को छूए गए दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब है। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाए गए कदम के तहत अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने का निर्णय लिया गया। यह 7-2 के बहुमत से लिया गया फैसला बाजार की पूर्व उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा, जिसके कारण जापानी येन में कोई खास मजबूती नहीं आई और वह दबाव में रहा। हालांकि येन को सहारा देने के लिए जापानी अधिकारियों के संभावित मुद्रा बाजार हस्तक्षेप की आशंका ने डॉलर की अतिरिक्त बढ़त को सीमित किया हुआ है।
सोने के बाजार में भी सुस्ती का माहौल बना हुआ है, जहां पीली धातु 4,300 डॉलर प्रति औंस से नीचे के स्तर से सुधरने के बाद बुधवार के एशियाई सत्र में रक्षात्मक रुख बनाए हुए है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और जुलाई के उच्च स्तरों के निकट मंडराते अमेरिकी डॉलर ने सर्राफा बाजार की तेजी पर रोक लगा दी है। वहीं दूसरी ओर, कच्चे तेल के हालिया दामों में गिरावट ने मुद्रास्फीति की चिंताओं को थोड़ा शांत किया है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल सीमित दायरे में रहा है और बिना प्रतिफल वाली इस पीली धातु की तेज गिरावट पर कुछ हद तक ब्रेक लगा है। इसके अलावा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाले पूंजीगत व्यय ने भी फेड की ब्याज दर चिंताओं में जगह बना ली है, जहां आगामी नीतिगत कदमों को लेकर वित्तीय बाजार अलग-अलग पूंजीगत लागत का आकलन कर रहे हैं।


















