त्वचा की रंगत संवारने और चेहरे पर दिखने वाले अनचाहे रोएं साफ करने के लिए अक्सर हर महीने या दो महीने के अंतराल पर ब्यूटी पार्लर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अपर लिप्स की थ्रेडिंग करवानी हो, चेहरे के अतिरिक्त बाल हटाने हों या फिर ग्लो पाने के लिए फेशियल कराना हो, इन सब ब्यूटी प्रक्रियाओं में वक्त और पैसे दोनों का भारी खर्च होता है। इसके साथ ही बाजार में मिलने वाले कई सौंदर्य प्रसाधनों में तेज रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो हर तरह की त्वचा को रास नहीं आते। ऐसे में सैलून के खर्चों से बचने और केमिकल के दुष्प्रभावों से दूर रहने के लिए कई लोग प्राकृतिक व पारंपरिक घरेलू उपचारों का सहारा लेते हैं। इन्हीं नुस्खों में मेथी, पीली सरसों और गाय के दूध से तैयार किया जाने वाला लेप काफी चर्चा में रहता है, जिसे लेकर दावा किया जाता है कि यह चेहरे पर चमक लाने के साथ बालों की बढ़त को धीमा कर सकता है।
पारंपरिक उबटन तैयार करने के लिए जरूरी चीजें
इस घरेलू उबटन को बनाने के लिए घर की रसोई में आसानी से मिलने वाली तीन प्राथमिक सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इनमें गाय का ताजा दूध, पीली सरसों के दाने और मेथी दाना शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय का दूध बहुत सुलभता से उपलब्ध हो जाता है, जबकि शहरी रसोईघरों में भी सरसों और मेथी रोजमर्रा के मसालों में शामिल रहते हैं। इन तीनों प्राकृतिक घटकों का पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल होता रहा है और जब इन्हें सही अनुपात में मिलाया जाता है, तो यह एक गाढ़ा हर्बल लेप बन जाता है।
पेस्ट बनाने और लगाने की सही विधि
इस घरेलू नुस्खे को तैयार करने की प्रक्रिया रात से ही शुरू हो जाती है। इसके लिए पीली सरसों और मेथी के दानों को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख दिया जाता है, जिससे वे पूरी तरह फूलकर मुलायम हो जाएं। अगली सुबह भीगे हुए मेथी और सरसों के दानों से पानी अलग करके उन्हें गाय के दूध के साथ मिक्सर में डालकर अच्छी तरह बारीक पीस लिया जाता है। इस तरह एक चिकना और गाढ़ा पेस्ट बनकर तैयार हो जाता है।
तैयार लेप को चेहरे, गर्दन या शरीर के उन हिस्सों पर लगाया जाता है जहां अनचाहे बाल या रूखापन अधिक हो। इसे त्वचा पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि मिश्रण के पोषक तत्व त्वचा पर असर कर सकें। जब पेस्ट हल्का सूखने लगे, तब इसे सादे पानी से धोकर साफ कर लिया जाता है।
उपयोग की आवृत्ति और किए जाने वाले दावे
इस देसी लेप के नियमित उपयोग को लेकर बताया जाता है कि इसे महीने में चार से पांच बार आजमाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि गाय का दूध त्वचा को नमी और पोषण देकर प्राकृतिक चमक पैदा करता है, जबकि मेथी और सरसों का संयोजन त्वचा को गहराई से साफ करता है। इसके लगातार प्रयोग से चेहरे की रंगत में सुधार होने और अतिरिक्त बालों की विकास दर धीरे-धीरे कम होने की बात कही जाती है।
सावधानी और त्वचा विशेषज्ञों की राय
घरेलू नुस्खों का असर हर व्यक्ति की त्वचा की बनावट पर निर्भर करता है। यह समझना बेहद आवश्यक है कि इस तरह के देसी लेप से चेहरे के बालों के स्थायी रूप से खत्म होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं होती है। प्राकृतिक सामग्री होने के बावजूद कुछ लोगों की त्वचा पर सरसों या मेथी से जलन या एलर्जी की समस्या हो सकती है। इसलिए इस पेस्ट को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना अनिवार्य है। विशेष रूप से संवेदनशील त्वचा वाले व्यक्तियों को किसी भी तरह का घरेलू प्रयोग शुरू करने से पहले स्किन एक्सपर्ट या डर्मेटोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर लेना चाहिए।


















