ग्लोबल करेंसी मार्केट में इस हफ्ते जबरदस्त हलचल देखने को मिली, जहां अमेरिकी डॉलर तीन महीने के निचले स्तर के पास संभलता हुआ नजर आया, वहीं स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरत पड़ने पर फिर से नेगेटिव ब्याज दरों को लागू करने के संकेत दिए हैं। मौजूदा समय में वैश्विक वित्तीय बाजार केंद्रीय बैंकों के बयानों, वॉशिंगटन में घोषित वित्तीय लिक्विडिटी कदमों और विभिन्न एसेट क्लास में बदलते रिस्क सेंटीमेंट के जटिल मिश्रण से प्रभावित हो रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार के निवेशक इन बड़े नीतिगत बदलावों और मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़ों के बीच करेंसी वैल्यूएशन, कीमती धातुओं और डिजिटल एसेट्स को लेकर अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहे हैं।
स्विस नेशनल बैंक ने दिए नेगेटिव ब्याज दरों के संकेत
स्विस फ़्रैंक पर उस समय दबाव देखने को मिला जब स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने भविष्य में ब्याज दरों को शून्य से नीचे ले जाने की संभावना से इनकार नहीं किया। स्विस नेशनल बैंक के गवर्निंग बोर्ड की सदस्य पेट्रा शूडिन ने शुक्रवार को एक स्विस समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि यदि मध्यम अवधि में महंगाई दर को 0% से 2% के बीच बनाए रखने के लिए ब्याज दरों को शून्य से नीचे यानी नेगेटिव करना पड़ा, तो बैंक ऐसा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। पेट्रा शूडिन ने कहा, "यदि मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को 0% और 2% के बीच बनाए रखने के लिए ब्याज दरों को शून्य से नीचे लाना आवश्यक हो जाता है, तो हम ऐसा करेंगे।"
केंद्रीय बैंक की ओर से आए इस स्पष्ट बयान के बाद स्विस करेंसी को लेकर बाजार का रुझान थोड़ा कमजोर पड़ा। पेट्रा शूडिन ने स्विस फ़्रैंक की हालिया नरमी को विदेशी बाजारों में ऊंची ब्याज दर की उम्मीदों से भी जोड़ा, जहां निवेशकों को अधिक रिटर्न मिलने की संभावना के कारण सुरक्षित स्विस फ़्रैंक से पूंजी बाहर जाती दिख रही है। इस बयान के बाद USD/CHF करेंसी पेयर 0.8013 के स्तर के आसपास स्थिर होता दिखा, जबकि इससे एक दिन पहले यह गिरकर 0.7949 के स्तर तक आ गया था, जो 17 जून के बाद का इसका सबसे निचला स्तर था। हालांकि शुक्रवार को इसमें मामूली सुधार देखा गया, लेकिन इसके बावजूद USD/CHF इस सप्ताह को लाल निशान यानी गिरावट के साथ समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी के लिक्विडिटी फैसले और डॉलर की स्थिति
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर में लगातार आ रही गिरावट के बाद मामूली स्थिरता के संकेत मिले हैं। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 98.81 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। यह स्तर दिन के निचले स्तर 98.56 से मामूली सुधार को दर्शाता है। इसके बावजूद, यह इंडेक्स तीन महीने के निचले स्तर के करीब ही बना हुआ है और साप्ताहिक आधार पर इसमें लगभग 0.80% की गिरावट दर्ज की जा रही है।
सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी करेंसी में आई कमजोरी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा अपनी कर्ज प्रबंधन योजना में किया गया अचानक बदलाव था। बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिका के बढ़ते राजकोषीय घाटे और कर्ज की चिंताओं ने डॉलर की लंबी अवधि की संभावनाओं पर दबाव बनाया है। स्कॉटियाबैंक के रणनीतिकारों ने विश्लेषणात्मक टिप्पणी में कहा कि अमेरिकी डॉलर फिलहाल अमेरिकी राजकोषीय नीतियों से जुड़ी चिंताओं के लिए प्राथमिक शॉक एब्जॉर्बर के रूप में कार्य कर रहा है। उनके अनुसार, लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने के प्रयासों का सीधा असर डॉलर के वैल्यूएशन पर पड़ रहा है और इसे राजकोषीय चिंताओं का नकारात्मक बोझ उठाना पड़ रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक योजना की पूरी जानकारी
अमेरिकी सरकार के ऋण प्रबंधन में आए बदलाव तब आधिकारिक रूप से सामने आए जब अमेरिकी ट्रेजरी ने बुधवार को 12:32 GMT पर अपने तय कैलेंडर से अलग हटकर एक बड़ा ऐलान किया। ट्रेजरी विभाग ने लंबी अवधि की सरकारी सिक्योरिटीज के लिए अपने लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन्स को दोगुना करने का निर्णय लिया। विभाग ने स्पष्ट किया कि 10-साल से 20-साल और 20-साल से 30-साल की मैच्योरिटी वाली सरकारी सिक्योरिटीज के लिए प्रति ऑपरेशन अधिकतम बायबैक सीमा को $2 बिलियन से बढ़ाकर कम से कम $4 बिलियन किया जा रहा है।
ट्रेजरी की यह नई और विस्तारित बायबैक व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को बाजार से वापस खरीदने के लिए पूंजी दोगुनी करने का मुख्य उद्देश्य सेकेंडरी बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी को बढ़ाना है। हालांकि, विदेशी मुद्रा बाजार के ट्रेडर्स ने इस कदम को एक संकेत के रूप में देखा कि बॉन्ड यील्ड को दबाने की यह नीति जारी रह सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय करेंसी मार्केट में अमेरिकी डॉलर को मिलने वाला स्वाभाविक यील्ड एडवांटेज सीमित हो सकता है।
स्विस फ़्रैंक की खासियत और सेफ-हेवन स्टेटस
USD/CHF में हो रहे उतार-चढ़ाव को गहराई से समझने के लिए स्विस फ़्रैंक की बुनियादी वित्तीय संरचना को जानना आवश्यक है। स्विट्जरलैंड की आधिकारिक मुद्रा स्विस फ़्रैंक दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली शीर्ष दस मुद्राओं में शामिल है। स्विस फ़्रैंक का कुल दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम स्विट्जरलैंड की अपनी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में कहीं अधिक है, जो वैश्विक अंतरराष्ट्रीय वित्त और विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन में इसकी अत्यधिक महत्ता को दर्शाता है।
स्विस फ़्रैंक का बाजार मूल्य वैश्विक बाजार के सेंटीमेंट, स्विट्जरलैंड के आर्थिक स्वास्थ्य और स्विस नेशनल बैंक द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों से तय होता है। दुनिया भर के निवेशक स्विस फ़्रैंक को एक प्रमुख सेफ-हेवन एसेट यानी सुरक्षित निवेश विकल्प मानकर भू-राजनीतिक तनाव या वित्तीय अनिश्चितता के समय इसमें भारी निवेश करते हैं। इस करेंसी के सेफ-हेवन बनने के पीछे स्विट्जरलैंड की मजबूत अर्थव्यवस्था, विशाल निर्यात क्षेत्र, केंद्रीय बैंक के पास मौजूद भारी विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय विवादों में देश की ऐतिहासिक तटस्थता की नीति है। इसी कारण जब भी वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मचती है, निवेशक जोखिम भरे संपत्तियों से पैसा निकालकर स्विस फ़्रैंक में लगाते हैं, जिससे अन्य मुद्राओं के मुकाबले इसका मूल्य बढ़ जाता है।
यूरो पेग का इतिहास और यूरोपीय अर्थव्यवस्था से जुड़ाव
स्विस फ़्रैंक का प्रदर्शन यूरोपीय महाद्वीप की आर्थिक गतिविधियों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2011 से 2015 के बीच, स्विस नेशनल बैंक ने स्विस फ़्रैंक की कीमत को यूरो के साथ एक निश्चित एक्सचेंज रेट पेग के तहत बांध कर रखा था। लेकिन जनवरी 2015 में स्विस केंद्रीय बैंक ने अचानक इस पेग को हटा दिया, जिसके परिणामस्वरूप स्विस फ़्रैंक की कीमत में रातों-रात 20% से अधिक का उछाल आया। इस अप्रत्याशित फैसले ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी थी।
हालांकि अब यह पेग प्रभावी नहीं है, फिर भी स्विस फ़्रैंक और यूरो के बीच का संबंध बेहद मजबूत बना हुआ है। वित्तीय आंकड़ों के मॉडल दर्शाते हैं कि स्विस फ़्रैंक और यूरो की चाल के बीच 90% से अधिक यानी लगभग सटीक सह-संबंध (कोरिलेशन) देखा जाता है। इस गहरे जुड़ाव का मुख्य कारण स्विट्जरलैंड की छोटी और खुली अर्थव्यवस्था है, जो अपने पड़ोसी यूरोपीय संघ पर व्यापारिक और राजनीतिक रूप से अत्यधिक निर्भर है। चूंकि यूरोज़ोन स्विट्जरलैंड का सबसे बड़ा आर्थिक साझेदार है, इसलिए यूरोज़ोन में मैक्रोइकॉनॉमिक और मॉनेटरी पॉलिसी की स्थिरता स्विस फ़्रैंक के वैल्यूएशन को सीधे प्रभावित करती है।
स्विस नेशनल बैंक का ढांचा और मैक्रोइकॉनॉमिक आंकड़े
स्विस नेशनल बैंक की कार्यप्रणाली दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में काफी अलग है। स्विस नेशनल बैंक का गवर्निंग बोर्ड साल में केवल चार बार यानी हर तिमाही में एक बार मौद्रिक नीति की समीक्षा के लिए बैठक करता है, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व या यूरोपीय सेंट्रल बैंक की बैठकों की आवृत्ति की तुलना में आधी है। बैंक का प्राथमिक लक्ष्य वार्षिक मुद्रास्फीति दर को 2% से नीचे बनाए रखना है, जबकि मध्यम अवधि के लिए इसका लक्षित दायरा 0% से 2% के बीच रहता है।
जब स्विट्जरलैंड में महंगाई दर इस तय लक्ष्य से ऊपर जाती है या भविष्य में इसके बढ़ने का अनुमान होता है, तो केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करके कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है। ऊंची ब्याज दरें निवेशकों को अधिक यील्ड देती हैं, जिससे स्विस फ़्रैंक में निवेश बढ़ता है और करेंसी मजबूत होती है। इसके विपरीत, दरों में कटौती या नेगेटिव रेट पॉलिसी से करेंसी कमजोर होती है। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड के आर्थिक आंकड़े जैसे कि आर्थिक विकास दर, महंगाई दर, करेंट अकाउंट बैलेंस और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े स्विस फ़्रैंक की चाल तय करने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। मजबूत आर्थिक विकास और कम बेरोजगारी दर फ़्रैंक को सहारा देती है, जबकि कमजोर आंकड़े करेंसी पर दबाव बनाते हैं।
अन्य प्रमुख फॉरेक्स पेयर्स: EUR/USD और GBP/USD का हाल
अमेरिकी डॉलर में आई हल्की मजबूती का असर अन्य प्रमुख करेंसी पेयर्स पर भी दिखाई दिया। GBP/USD पेयर दिन के उच्च स्तर 1.3670 को छूने के बाद फिसलकर 1.3600 के निचले स्तरों पर आ गया। केबल में आई यह गिरावट लगातार दो दिनों की बढ़त के बाद दर्ज की गई, जिसे डॉलर में आए मामूली सुधार और ब्रिटेन से आए कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने प्रभावित किया।
इसी तरह, EUR/USD भी 1.1700 के मजबूत रेजिस्टेंस स्तर को पार करने में विफल रहने के बाद 1.1670 के स्तर के आसपास मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। यूरो में आई यह गिरावट अमेरिकी डॉलर में आई हल्की रिकवरी और अमेरिकी बॉन्ड मार्केट के घटनाक्रमों के बीच निवेशकों द्वारा नए आर्थिक आंकड़ों के आकलन के कारण देखने को मिली।
सोने में जोरदार तेजी: $4,600 के पार पहुंचकर 3 महीने के उच्च स्तर पर
करेंसी मार्केट में जारी उथल-पुथल के बीच कीमती धातुओं के बाजार में जोरदार तेजी का माहौल रहा। सोने की कीमतों ने गुरुवार के सुस्त कारोबार को पीछे छोड़ते हुए शुक्रवार को जबरदस्त छलांग लगाई और प्रति ट्रॉय औंस $4,600 का आंकड़ा पार कर लिया। इस तेजी के साथ सोने की कीमतें तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं।
विशेष रूप से, सोने में यह तेजी अमेरिकी डॉलर में आए मामूली सुधार और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के बावजूद देखने को मिली। निवेशक लंबी अवधि की राजकोषीय चिंताओं और लिक्विडिटी में बढ़ोतरी के संकेतों के बीच सोने को एक सुरक्षित और मूल्यवान संपत्ति मानकर खरीदारी कर रहे हैं।
क्रिप्टो बाजार में उछाल और इक्विटी मार्केट के मुख्य ट्रिगर
डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में भी शुक्रवार को अच्छी तेजी देखने को मिली। बिटकॉइन $77,000 के स्तर को पार कर गया, जिससे पूरे क्रिप्टो मार्केट में सकारात्मक माहौल बन गया। एथेरियम $2,400 के करीब और रिपल $1.35 के आसपास कारोबार करता नजर आया। क्रिप्टो एसेट्स में देखा गया यह रिस्क-ऑन सेंटीमेंट पारंपरिक ब्याज दर नीतियों की अनिश्चितता के बावजूद मजबूत निवेशक मांग को दर्शाता है।
आगामी दिनों के लिए बाजार के प्रतिभागी कुछ महत्वपूर्ण मैक्रोइकॉनॉमिक और कॉर्पोरेट ट्रिगर्स पर नजर बनाए हुए हैं। केंद्रीय बैंक के विशेषज्ञ केविन वॉश के जैक्सन होल सम्मेलन में पदार्पण का इंतजार कर रहे हैं, हालांकि बॉन्ड मार्केट में हालिया ट्रेजरी हस्तक्षेप के बाद किसी बड़े आक्रामक बयान की संभावना कम मानी जा रही है। दूसरी ओर, इक्विटी मार्केट के निवेशक एनवीडिया के आगामी तिमाही नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं, जो टेक शेयरों में हालिया सुस्ती के बाद शेयर बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे।



















