अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट में सोने की कीमतों ने एक बार फिर नया इतिहास रचते हुए $4,600 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है। वैश्विक बाजार में शुक्रवार को सोने (XAU/USD) की ट्रेडिंग के दौरान जबरदस्त लिवाली देखी गई, जिससे यह कीमती धातु लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त दर्ज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चालू महीने के दौरान ही सोने के वैश्विक भाव में लगभग 13% की शानदार तेजी आ चुकी है। मई 15 के बाद से यह सोने का उच्चतम स्तर है, जहां कारोबार के दौरान भाव $4,590 के करीब बने रहे और थोड़े समय के लिए $4,600 के प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर को भी लांघ गए। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक क्लोजिंग बेल तक गोल्ड फ्यूचर्स $4,638 के आसपास मजबूती से ट्रेड करते नजर आए, जो पिछले $4,516 के बंद स्तर के मुकाबले 2.70% की दैनिक बढ़त को दर्शाता है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था की चिंताएं और डॉलर में गिरावट
कीमती धातुओं में आ रही इस तूफानी तेजी का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर (USD) में बनी चौतरफा कमजोरी है। अमेरिकी सरकार के लगातार बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज, भारी बजटीय घाटे और उम्मीद से अधिक समय तक टिकी रहने वाली मुद्रास्फीति ने वैश्विक निवेशकों को चिंतित कर दिया है। इन वृहद आर्थिक कारणों से अमेरिकी वित्तीय परिसंपत्तियों पर निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है, जिसकी सीधी कीमत अमेरिकी डॉलर को चुकानी पड़ रही है। छः प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) टूटकर 98.65 के आसपास आ गया है, जो कि इसके तीन महीने के निचले स्तर के बेहद करीब है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती संभावनाओं ने भी सोने जैसी बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्ति के आकर्षण में भारी वृद्धि की है।
ट्रेजरी का बड़ा फैसला और बॉन्ड मार्केट का रिस्पॉन्स
अमेरिकी वित्त मंत्रालय (ट्रेजरी विभाग) द्वारा अचानक लिए गए एक नीतिगत फैसले ने विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की दिशा को और अधिक प्रभावित किया है। ट्रेजरी विभाग ने नियमित समय-सारणी से हटकर बुधवार को 12:32 GMT पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की। इसके तहत 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की परिपक्वता वाले दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड्स के लिए लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन्स के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया गया। पहले प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा $2 अरब निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब कम से कम $4 अरब कर दिया गया है। यह व्यवस्था सितंबर 9 से प्रभावी होकर नवंबर 4 तक संचालित की जाएगी। इस घोषणा के तुरंत बाद लंबी अवधि वाले अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड्स की यील्ड में शुरुआती तेज गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में यील्ड ने अपनी अधिकांश हानि की भरपाई कर ली। फिर भी, बॉन्ड यील्ड की इस रिकवरी का सोने की निरंतर बढ़त पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी और ETF इनफ्लो
वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भारी खरीदारी भी इस तेजी का एक प्रमुख आधार बनी हुई है। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपनी मुद्राओं को स्थिरता देने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सोने के भंडार को आक्रामक रूप से बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड तोड़ 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग $70 अरब थी। जब से रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ है, तब से यह एक वर्ष में की गई सोने की सबसे बड़ी खरीदारी थी। इस निरंतर संस्थागत मांग के साथ-साथ गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में होने वाले निवेशकों के मजबूत इनफ्लो ने सोने के अंतर्निहित बुनियादी ढांचे को अत्यधिक मजबूत बनाए रखा है।
टेक्निकल एनालिसिस: क्या संकेत दे रहे हैं चार्ट्स?
तकनीकी मोर्चे पर, XAU/USD का दीर्घकालिक और अल्पकालिक ट्रेंड पूरी तरह से बुलिश बना हुआ है। सोना वर्तमान में अपने 50-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज ($4,172), 100-दिन के SMA ($4,379) और 200-दिन के SMA ($4,514) से काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। ये तीनों मूविंग एवरेज सामूहिक रूप से हालिया अपट्रेंड को मजबूत सपोर्ट प्रदान कर रहे हैं। डेली चार्ट पर रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 70 के करीब पहुंच गया है (लाइव रीडिंग 74 पर है), जो बाजार में ओवरबॉट (अत्यधिक खरीदारी) की स्थिति का संकेत देता है। वहीं, एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 32 के आसपास है, जो मध्यम से मजबूत ट्रेंड का प्रतिनिधित्व करता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) इंडिकेटर भी बुलिश हिस्टोग्राम के साथ सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि, RSI का ओवरबॉट क्षेत्र में होना चेतावनी देता है कि यदि भाव $4,600 के ऊपर स्थायी टिकने में विफल रहते हैं, तो एक संक्षिप्त तकनीकी सुधार या पुलबैक देखने को मिल सकता है।
महत्वपूर्ण टेक्निकल सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स
ट्रेडर्स और विश्लेषकों के लिए वर्तमान में ऊपर और नीचे की ओर कुछ मुख्य तकनीकी स्तर बेहद संवेदनशील बने हुए हैं
- तत्काल रेजिस्टेंस: पहला मजबूत रेजिस्टेंस $4,600 के क्षैतिज स्तर पर है, जिसके पार निकलने पर अगला बड़ा बैरियर $4,750 पर देखा जाएगा। लाइव पिवट लेवल्स के अनुसार R1 $4,678 और R2 $4,718 पर स्थित है।
- तत्काल सपोर्ट: किसी भी गिरावट की स्थिति में पहला तकनीकी सपोर्ट 200-दिन के SMA पर $4,514 के पास मौजूद है। लाइव पिवट सपोर्ट S1 $4,582 पर और S2 $4,526 पर केंद्रित है।
- गहरे सपोर्ट स्तर: यदि बिकवाली का दबाव बढ़ता है, तो 100-दिन का SMA ($4,379) और 50-दिन का SMA ($4,172) अगले रक्षात्मक स्तर होंगे, जबकि $4,000 के आसपास एक बेहद मजबूत स्ट्रक्चरल फ्लोर बना हुआ है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का ऐतिहासिक महत्व
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा एक मूल्य के भंडार (स्टोर ऑफ वैल्यू) और विनिमय के माध्यम के रूप में एक असाधारण भूमिका निभाई है। आधुनिक दौर में, केवल आभूषणों और सुंदरता के लिए इसके उपयोग से परे, इस कीमती धातु को वैश्विक स्तर पर सर्वोपरि 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित ठिकाना) संपत्ति माना जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था, राजनीति या वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचती है, निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए सोने की ओर रुख करते हैं। सोना मुद्रास्फीति (महंगाई) और अवमूल्यन होती कागजी मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा ढाल (हेज) का काम करता है, क्योंकि यह किसी विशिष्ट सरकार या केंद्रीय बैंक की देनदारी या जारीकर्ता पर निर्भर नहीं करता।
डॉलर और रिस्क एसेट्स के साथ सोने का संबंध
वित्तीय अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज के साथ विपरीत (इनवर्स) संबंध होता है। जब भी डॉलर की क्रय शक्ति या विनिमय दर में गिरावट आती है, तो डॉलर में अंकित होने के कारण सोने के दाम स्वतः बढ़ जाते हैं। इसके अतिरिक्त, सोने का संबंध शेयर बाजार जैसी जोखिम भरी परिसंपत्तियों (रिस्क एसेट्स) के साथ भी विपरीत होता है। आमतौर पर जब इक्विटी बाजारों में तेजी का माहौल होता है, तो सोने से निवेशक पैसा निकालकर शेयरों में लगाते हैं, जिससे सोने की मांग घटती है। इसके विपरीत, जब शेयर बाजारों में बड़ी बिकवाली या क्रैश का माहौल बनता है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश में सोने की खरीदारी बढ़ा देते हैं, जिससे इसकी कीमतों में तेज उछाल आता है।
मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और भू-राजनीतिक कारक
सोने की दैनिक और दीर्घकालिक चाल को प्रभावित करने में कई वृहद कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध के बादल, या किसी गंभीर आर्थिक मंदी की आशंका बनते ही सोने की कीमतों में safe-haven खरीदारी के कारण अचानक बड़ा उछाल आ सकता है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज या यील्ड नहीं मिलता (यह एक नॉन-यिल्डिंग एसेट है), इसलिए जब दुनिया के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करते हैं या दरें कम रखते हैं, तब सोने में निवेश करने की अवसर लागत (ऑपर्चुनिटी कॉस्ट) घट जाती है और इसकी कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, ब्याज दरों में वृद्धि सोने के लिए प्रतिकूल मानी जाती है। हालांकि, इन सभी कारकों के बावजूद सोने की चाल का सबसे बड़ा निर्णायक तत्व यह है कि अमेरिकी डॉलर किस दिशा में व्यवहार कर रहा है।
अन्य करेंसी पेयर्स, क्रिप्टो और ग्लोबल मार्केट्स का हाल
सोने में आई इस व्यापक रैली का असर वैश्विक वित्तीय बाजार के अन्य क्षेत्रों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है
- GBP/USD: ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 1.3650 के ऊपर पहुंच गया है, जो फरवरी के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। ब्रिटेन के निराशाजनक रिटेल सेल्स आंकड़ों के बावजूद सकारात्मक PMI आंकड़ों ने पाउंड को सहारा दिया है।
- EUR/USD: यूरोपीय सत्र के दौरान यूरो भी डॉलर के मुकाबले अपनी तेजी बनाए रखते हुए 1.1700 के पार ट्रेड कर रहा है। जर्मनी और यूरोज़ोन के मिले-जुले PMI आंकड़ों के बावजूद डॉलर की सर्वत्र कमजोरी ने यूरो को निचले स्तरों से सहारा दिया है।
- क्रिप्टोकरेंसी मार्केट: डिजिटल एसेट मार्केट में भी तेजी का माहौल बना हुआ है। बिटकॉइन (BTC) $77,000 के ऊपर निकल चुका है, जबकि एथेरियम (ETH) $2,400 के करीब और रिपल (XRP) $1.35 के आसपास ट्रेड कर रहे हैं।
- अमेरिकी PMI आंकड़े: बाजार सहभागियों की नजर एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी किए जाने वाले अगस्त के प्रारंभिक परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों पर टिकी है। सर्वसम्मति अनुमानों के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग PMI जुलाई के 53.9 से मामूली घटकर 53.8 और सर्विसेज PMI 54.6 से घटकर 54.0 रहने की उम्मीद है।



















