वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय भू-राजनीतिक झटकों और बदलती मौद्रिक नीतियों के एक जटिल जाल में उलझे हुए हैं, जिसके बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले एसेट भारी दबाव में आ गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्चतम स्तर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे दुनिया भर के बाजारों में एक बार फिर महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है। ऊर्जा बाजार के इस भारी उछाल ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) द्वारा ब्याज दरों में और अधिक बढ़ोतरी की उम्मीदों को अचानक मजबूत कर दिया है। इस स्थिति ने बिना ब्याज वाले एसेट्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। सोने की कीमतों में हाल ही में जो हल्की रिकवरी देखी गई थी, वह अब अहम रेजिस्टेंस स्तरों पर पूरी तरह से थम गई है, जबकि दूसरी तरफ क्रिप्टोकरेंसी बाजार पारंपरिक शेयरों के मुकाबले अप्रत्याशित मजबूती दिखा रहा है।
सोने की अस्थिर रिकवरी और टीडी सिक्योरिटीज का अनुमान
शुरुआती दौर में सोने ने अपने मंगलवार के निचले स्तर से 3.5 प्रतिशत की शानदार छलांग लगाई थी और यह 4,150 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े को छूने में कामयाब रहा था। हालांकि, टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह तेजी बुनियादी तौर पर काफी कमजोर थी। यह उछाल बाजार में लंबे समय के नए निवेश के कारण नहीं आया था, बल्कि यह मुख्य रूप से शॉर्ट कवरिंग और भारी गिरावट पर की गई खरीदारी (डिप बाइंग) का नतीजा था, क्योंकि पिछली बिकवाली के दौरान अहम तकनीकी सपोर्ट स्तर टूटने से बच गए थे। वर्तमान वृहद आर्थिक माहौल कीमती धातुओं की लंबी तेजी के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। टीडी सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया, "ऐसा कोई बुनियादी कारण नजर नहीं आता जिससे यह माना जाए कि अमेरिका की ब्याज दरें और विदेशी मुद्रा का माहौल जल्द ही सोने में निवेश बढ़ाने के लिए अनुकूल होगा।"
तकनीकी संकेतकों ने दी भारी गिरावट की चेतावनी
बाजार के ताजा लाइव आंकड़े बुलियन के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण और नकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं। फिलहाल सोना 4,094 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो इसके पिछले बंद भाव 4,147 डॉलर से 1.28 प्रतिशत की तेज गिरावट को दर्शाता है। इस बिकवाली के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिन के औसत के मुकाबले 15.23 गुना बढ़ गया है, जो बाजार में निवेशकों की भारी घबराहट और बिकवाली के दबाव का सीधा संकेत है। तकनीकी दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह एसेट एक बहुत लंबी अवधि के डाउनट्रेंड में बुरी तरह से फंसा हुआ है। दैनिक चार्ट पर एक बेहद खतरनाक 'डेथ क्रॉस' बन चुका है, क्योंकि 4,244 डॉलर का 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) अब 4,269 डॉलर के 200-दिवसीय EMA से नीचे फिसल गया है। इसके अलावा, RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) फिलहाल 47 के तटस्थ स्तर पर है, जबकि MACD अपने -71.24 के सिग्नल लाइन के मुकाबले -51.54 पर कड़ा संघर्ष कर रहा है। हालांकि MACD हिस्टोग्राम 19.71 का मामूली बुलिश संकेत जरूर दे रहा है, लेकिन कुल मिलाकर व्यापक ट्रेंड पूरी तरह से दबाव में है।
ब्याज दरों का जोखिम और अहम प्राइस लेवल
सोने के लिए किसी भी बड़ी और टिकाऊ तेजी की राह में 4,200 डॉलर प्रति औंस का रेजिस्टेंस एक मजबूत दीवार बनकर खड़ा है। टीडी सिक्योरिटीज का अनुमान है कि ऊंची ब्याज दरों का यह मौजूदा दौर इस पीली धातु को अगले बारह महीनों में कोई भी नया शिखर छूने से पहले वापस 3,900 डॉलर प्रति औंस के बड़े तकनीकी सपोर्ट स्तर तक धकेल सकता है। लाइव तकनीकी आंकड़े भी विश्लेषकों के इस सतर्क दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल खाते हैं। सोना इस समय 3,966 डॉलर से 4,170 डॉलर के विस्तृत बोलिंजर बैंड के अंदर फंसा हुआ है, और इसका 20-दिन का सपोर्ट भी बैंड के निचले हिस्से 3,963 डॉलर के ठीक करीब ही मौजूद है। दिनभर के कारोबारी 4,104 डॉलर के पिवट स्तर पर अपनी बारीक नजर बनाए हुए हैं, जिसके नीचे जाने पर 4,064 डॉलर और फिर 4,035 डॉलर पर अगला सपोर्ट मिल सकता है। 77.43 के भारी ATR (एवरेज ट्रू रेंज) को देखते हुए यह स्पष्ट है कि दैनिक अस्थिरता काफी अधिक है, जिससे छोटे निवेशकों के स्टॉप-लॉस आसानी से हिट हो सकते हैं और बाजार में जोखिम बढ़ा हुआ है।
कच्चे तेल का झटका और विदेशी मुद्रा बाजारों में उथल-पुथल
सोने की कीमतों को दबाने वाला सबसे बड़ा और सीधा कारक ऊर्जा बाजार में आया भारी उबाल है। अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर चढ़ते हुए 90 डॉलर की ओर बढ़ रही हैं। मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका ने इस खतरनाक तेजी को हवा दी है। यह सीधे तौर पर वैश्विक महंगाई को बढ़ाता है, जिससे फेड की ओर से दरें घटने की उम्मीदें लगभग खत्म हो रही हैं और अमेरिकी डॉलर को भारी मजबूती मिल रही है। इस घटनाक्रम ने विदेशी मुद्रा बाजार को पूरी तरह से दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। ब्रिटिश पाउंड अपनी बढ़त कायम रखने में पूरी तरह विफल रहा है और GBP/USD की जोड़ी 1.3400 के स्तर से काफी नीचे संघर्ष कर रही है। ब्रिटेन में उम्मीद से कम आई महंगाई दर और अमेरिकी डॉलर की जोरदार वापसी ने पाउंड की रफ्तार को रोक दिया है। दूसरी ओर, यूरो काफी बेहतर स्थिति में दिख रहा है। EUR/USD की जोड़ी लगातार दूसरे दिन 1.1400 के अहम स्तर से ऊपर अपनी मजबूती बनाए हुए है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक के आगामी ब्याज दर फैसले से पहले व्यापारी काफी सतर्क हैं और किसी भी संभावित सख्ती के संकेतों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
क्रिप्टो बाजार में बॉटम बनने के शुरुआती संकेत
जहां पारंपरिक कमोडिटी और मुद्राएं ब्याज दरों के डर और भू-राजनीतिक संकट से जूझ रही हैं, वहीं डिजिटल एसेट के ईकोसिस्टम में एक बिल्कुल अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। बिटवाइज़ के मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) मैट होगन का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी का अगला बड़ा बुल मार्केट पारंपरिक वित्तीय ढांचे और ब्लॉकचेन तकनीक के तेजी से हो रहे एकीकरण द्वारा संचालित होगा। होगन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्तमान बाजार में एक मजबूत बॉटम (निचला स्तर) बनने के बेहद स्पष्ट शुरुआती संकेत मिल रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि 1 जुलाई के बाद से प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन ने 9 प्रतिशत की मजबूत छलांग लगाई है। इसने पारंपरिक टेक शेयरों के मुकाबले एक स्पष्ट और बड़ा डायवर्जेंस (अंतर) दिखाया है, क्योंकि ठीक इसी अवधि में भारी-भरकम नैस्डैक 100 इंडेक्स में 6 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
ऑल्टकॉइन्स में सुस्ती और निवेशकों की सतर्कता
बिटकॉइन की इस शानदार मजबूती से अलग, बाजार के अन्य बड़े ऑल्टकॉइन्स अभी भी अपने महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर संघर्ष कर रहे हैं। रिपल (XRP) फिलहाल अपने 50-दिवसीय EMA के भारी रेजिस्टेंस को पार करने की जद्दोजहद में लगा हुआ है, जबकि स्टेलर (XLM) 0.187 डॉलर के अपने सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के आसपास भारी कंसोलिडेशन (सुस्ती) के लंबे दौर से गुजर रहा है। इन निचले स्तरों पर स्थायित्व दिखने के बावजूद, ट्रेडिंग का समग्र माहौल अभी भी काफी सतर्कता और भय से भरा हुआ है। डेरिवेटिव्स बाजार के आंकड़े बताते हैं कि बाजार के सेंटिमेंट में अभी भी हल्का बियरिश (गिरावट का) झुकाव बना हुआ है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि जब तक व्यापक आर्थिक परिदृश्य और ब्याज दरों के मोर्चे से बाजार की अगली दिशा पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक संस्थागत और खुदरा व्यापारी अपनी बड़ी पूंजी लगाने से पूरी तरह कतरा रहे हैं।



















