बरसात के मौसम में ग्रामीण इलाकों से लेकर छोटे शहरों तक में सांपों का डर काफी बढ़ जाता है। भारी बारिश के चलते इन जीवों के जमीन के नीचे बने बिलों में पानी भर जाता है, जिससे इन्हें सुरक्षित ठिकानों की तलाश में बाहर आना पड़ता है। ऐसे समय में जब लोगों को अपने आसपास कोई सांप दिखाई देता है, तो उनका घबराना स्वाभाविक है। खासकर जब बात दुनिया के सबसे जहरीले सांप यानी किंग कोबरा की हो, तो लोगों की चिंता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर कोबरा की पहचान कैसे की जाए और साधारण या कम जहरीले सांपों से इसकी क्या भिन्नता है।
मानसून के दिनों में बरतें ये सावधानियां
बारिश के इन दिनों में सांप अपने प्राकृतिक ठिकानों से निकलकर इंसानी बस्तियों, खेतों, बगीचों और रिहायशी इलाकों के आसपास शरण लेते हैं। मैदानी क्षेत्रों में इस दौरान इनकी गतिविधियां काफी बढ़ जाती हैं। यदि ऐसे में आपको कभी कोबरा या कोई अन्य सांप दिखाई दे, तो सबसे पहली बात यह है कि अपना मानसिक संतुलन न खोएं और घबराएं नहीं। अत्यधिक तनाव या घबराहट की स्थिति में सांप आक्रामक हो सकता है और आत्मरक्षा में हमला भी कर सकता है। इसके अलावा, सांप को जल्दबाजी में भगाने या उस पर डंडा चलाने की गलती बिल्कुल न करें। उसे थोड़ा समय दें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें ताकि वह खुद-ब-खुद अपने रास्ते आगे निकल जाए।
किंग कोबरा की चार नई प्रजातियों का खुलासा
जैव वैज्ञानिक और किंग कोबरा पर पिछले 20 वर्षों से निरंतर शोध कर रहे पी. गौरी शंकर ने पिछले साल एक महत्वपूर्ण रिसर्च पेपर दुनिया के सामने रखा था। साल 2021 में उन्होंने किंग कोबरा के भीतर चार अलग-अलग जेनेटिक समूहों का पता लगाया था, जिसके आधार पर उन्होंने यह नया वर्गीकरण तैयार किया। इस तरह का वैज्ञानिक वर्गीकरण इन जीवों के संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक माना जा रहा है, क्योंकि इससे हर विशिष्ट प्रजाति को उसकी जरूरत के मुताबिक सुरक्षा मुहैया कराई जा सकेगी। इसके अलावा, इस आधुनिक वर्गीकरण से भविष्य में सांप के काटने यानी स्नेक बाइट के इलाज के लिए अधिक प्रभावी विकल्प विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे इंसानों और किंग कोबरा दोनों की जान बचाना आसान हो जाएगा। इस विषय पर और अधिक वैज्ञानिक अध्ययन होने से इन जीवों के व्यवहार, उनकी प्राकृतिक बसावट और उनके विष के बारे में बेहतर जानकारी हासिल हो सकेगी।
किन क्षेत्रों में पाई जाती हैं कौन सी प्रजातियां
लगभग 188 वर्षों तक किंग कोबरा को केवल एक ही प्रजाति यानी ओफिओफागुस हन्नाह के रूप में मान्यता प्राप्त थी। हालांकि, यह जीव बहुत विस्तृत भूभाग पर फैला हुआ है, और अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में रहने के कारण इसके शरीर के रंगों और शारीरिक बनावट में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। इसी विविधता ने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या यह वाकई एक ही प्रजाति है। इसके बाद हुई खोज में चार प्रमुख प्रजातियां सामने आईं।
नॉर्दर्न किंग कोबरा मुख्य रूप से उत्तरी भारत, नेपाल, भूटान, तिब्बत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ चुनिंदा हिस्सों में निवास करता है। सुंडा किंग कोबरा दक्षिणी थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया और दक्षिणी फिलीपींस के विभिन्न द्वीपों पर पाया जाता है। वेस्टर्न घाट्स किंग कोबरा केवल भारत के पश्चिमी घाट के सघन वर्षा वनों और पहाड़ी अंचलों तक ही सीमित है। वहीं, लुज़ोन किंग कोबरा उत्तरी फिलीपींस के लुज़ोन द्वीप के विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र के अनुकूल ढल चुका है।
वैज्ञानिक नाम और शारीरिक विशेषताएं
वैज्ञानिक जगत में किंग कोबरा को ओफिओफागुस हन्नाह नाम से पुकारा जाता है। वर्ष 1836 में डेनिश जीव वैज्ञानिक थियोडोर एडवर्ड कैंटर ने इसे यह नाम दिया था। यह नाम ग्रीक भाषा के दो शब्दों ओफिस यानी सांप और फेजिन यानी खाना से मिलकर बना है, जिसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि यह ऐसा सर्प है जो अन्य सांपों को अपना आहार बनाता है। विभिन्न क्षेत्रों के इन सांपों में जेनेटिक भिन्नता के साथ-साथ उनके रहन-सहन और व्यवहार में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, नॉर्दर्न किंग कोबरा जंगलों से लेकर कृषि भूमि तक, हर तरह के वातावरण में खुद को ढालने में सक्षम है।
इसके विपरीत, वेस्टर्न घाट्स किंग कोबरा गहरे वर्षा वनों और पश्चिमी घाट की पहाड़ियों के शांत वातावरण को पसंद करता है। सुंडा किंग कोबरा अमूमन निचले इलाकों के जंगलों और मैंग्रोव क्षेत्रों में शरण लेता है। लुज़ोन किंग कोबरा अपने स्थानीय द्वीप के विशेष पर्यावरणीय हालातों के मुताबिक पूरी तरह विकसित हुआ है।
रंगों की विविधता और अन्य सांपों से अंतर
कोबरा केवल एक निश्चित रंग में नहीं पाए जाते हैं, बल्कि इनका रंग इनकी प्रजाति, उम्र और भौगोलिक स्थिति के आधार पर बदलता रहता है। इनके शरीर का रंग मिट्टी जैसे गहरे तानों से लेकर एकदम चमकीले रूपों तक हो सकता है। इनमें तांबे जैसा लाल या महोगनी यानी गहरा लाल भूरा रंग, स्लेटी, हल्का भूरा या मटमैला बेज रंग शामिल है। इसके अलावा ये एक जैसे सॉलिड शेड में भी हो सकते हैं या फिर इनके शरीर पर सफेद, पीले और गहरे रंगों की धारियों या छल्लों का खूबसूरत पैटर्न मिल सकता है। कई बार इनके फन पर विशेष प्रकार के निशान भी होते हैं।
दूसरी ओर, इंडियन कोबरा आकार में अपेक्षाकृत छोटा होता है और सामान्य तौर पर इसकी लंबाई पांच फीट तक होती है। खतरा भांपने पर यह अपने शरीर के अगले हिस्से को ऊपर उठा लेता है और एक चौड़ा तथा चपटा फन फैलाता है, जिसके पिछले हिस्से पर अक्सर चश्मे जैसा निशान बना होता है। इसके विपरीत, किंग कोबरा बहुत बड़ा जीव है और कभी-कभी लगभग 19 फीट की लंबाई तक पहुंच सकता है। खतरे की स्थिति में यह पूरी तरह सतर्क और स्थिर मुद्रा में रहते हुए अपने शरीर का एक तिहाई हिस्सा जमीन से बिल्कुल सीधा ऊपर उठा सकता है और तेज आवाज में फुफकारता है।



















