हंगरी की मुद्रा फ़ोरिंट को लेकर मुद्रा बाज़ारों में स्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जहाँ हंगेरियन सेंट्रल बैंक (एमएनबी) की आगामी मौद्रिक समीक्षा पर निवेशकों की गहरी नज़र टिकी हुई है। व्यापक स्तर पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि बैंक अपनी प्रमुख ब्याज दर को 5.50% पर अपरिवर्तित रखेगा और साथ ही अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य को मौजूदा 3.0% से घटाकर 2.5% करने पर भी विचार कर सकता है। वार्षिक स्तर पर हेडलाइन मुद्रास्फीति जुलाई में 1.2% और अगस्त में 1.3% दर्ज की गई थी, लेकिन महीने-दर-महीने के आधार पर कीमतों का दबाव अब भी बढ़ रहा है। ऐसे आर्थिक परिदृश्य में नीतिगत दरों में कटौती के सिलसिले को थामना और कम नरम रुख अपनाना फ़ोरिंट के लिए अल्पकालिक राहत और समर्थन लेकर आ सकता है।
अगस्त की कटौती के बाद मौद्रिक रुख में बदलाव के संकेत
हंगेरियन सेंट्रल बैंक ने अगस्त के दौरान अपनी प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंकों की कटौती करते हुए इसे 5.50% के स्तर पर ला दिया था। हालांकि बैंक ने पहले गर्मियों के महीनों में और अधिक मौद्रिक ढील देने की गुंजाइश का संकेत दिया था, लेकिन अगस्त की बैठक में उसने भविष्य में किसी नई कटौती को लेकर कोई ठोस वादा नहीं किया। इसके बजाय बैंक ने यह स्पष्ट किया कि ब्याज दरों के आगामी मार्ग पर कोई भी अंतिम निर्णय सितंबर महीने में आने वाले नए आर्थिक पूर्वानुमानों के आधार पर ही लिया जाएगा। इस नीतिगत बयान ने उसी समय बाज़ार में इस बात की संभावना को घटा दिया था कि सितंबर में भी ब्याज दरों में तत्काल कोई और कटौती देखने को मिलेगी, जिससे बैंक का रुख पारंपरिक उदार मौद्रिक नीति से हटकर सतर्कता की ओर मुड़ गया।
सितंबर की शुरुआत में सामने आए घटनाक्रमों से यह संकेत मिले थे कि सेंट्रल बैंक 22 सितंबर की अपनी बैठक में दरों में कटौती के चक्र को अस्थायी रूप से रोकने का इरादा रखता है। इसके साथ ही बैंक अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य को 3.0% से संशोधित कर 2.5% करने की दिशा में भी कदम उठा सकता है। जुलाई में 1.2% और अगस्त में 1.3% की वार्षिक हेडलाइन मुद्रास्फीति दरें बैंक के लिए एक अनुकूल अवसर प्रस्तुत करती हैं। इस प्रकार की कम मुद्रास्फीति दरें बैंक को यह अवसर प्रदान करती हैं कि वह तुरंत मौद्रिक सख्ती लागू किए बिना भी अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य को नीचे ला सकता है और केवल दरों में कटौती को रोककर एक संतुलित नीति पेश कर सकता है।
बढ़ते जोखिम और मुद्रा बाज़ार पर प्रभाव
हालांकि वार्षिक आंकड़े अनुकूल दिखते हैं, लेकिन महीने-दर-महीने के आधार पर मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय वृद्धि का सिलसिला जारी है। क्षेत्र में सूखे की स्थिति और ऊर्जा की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति के जोखिमों को लगातार हवा दे रही हैं। इन घरेलू और बाहरी जोखिमों को देखते हुए ही प्रमुख ब्याज दर के 5.50% पर यथावत बने रहने की व्यापक उम्मीद की जा रही है। फ़ोरिंट के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि क्या सेंट्रल बैंक वर्ष के शेष भाग में आगे दरों में कटौती को लेकर अपनी सतर्क मुद्रा को बनाए रखता है या नहीं। भले ही भविष्य में दरों में कटौती की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन बैंक का कम उदार दृष्टिकोण फ़ोरिंट के लिए अल्पकालिक रूप से एक मजबूत सहारा साबित होगा।
वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाज़ारों में भी व्यापक स्तर पर विभिन्न केंद्रीय बैंकों के नीतिगत रुख का असर देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित करने में सफल रहा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती दी। हालांकि, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर को अंतर्निहित मजबूती प्रदान की है, जिससे इस मुद्रा युग्म की बढ़त सीमित हो सकती है। इसके साथ ही इस सप्ताह के अंत में होने वाला महत्वपूर्ण ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन भी बाज़ारों के लिए केंद्र बिंदु बना हुआ है।
वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों की वर्तमान स्थिति
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) के बीच का कारोबार 157.50 के स्तर के आसपास मामूली बढ़त के साथ देखा गया। संभावित आधिकारिक हस्तक्षेप की आशंकाओं ने जापानी येन में बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद की। बैंक ऑफ़ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है और मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके बावजूद बैंक ऑफ़ जापान के अपेक्षाकृत नरम रुख ने येन के खरीदारों को रक्षात्मक मुद्रा में रखा, जबकि फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मध्य पूर्व के तनाव ने डॉलर को निरंतर समर्थन दिया।
सोने के बाज़ार में लगातार दूसरे दिन नरमी देखने को मिली, जहाँ दिन के दौरान आई मामूली तेजी के बाद पीली धातु फिसलकर 4,315 डॉलर के दायरे में आ गई, जो यूरोपीय कारोबारी सत्र में प्रवेश करते समय तीन दिन का निचला स्तर था। फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से पूंजी के बाहर जाने का प्राथमिक कारण बना हुआ है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में बिटकॉइन पिछले दिन की 6.7% की ज़बरदस्त तेजी के बाद थोड़ा सुस्ताता हुआ 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार करता दिखा। बाज़ार में मजबूत संस्थागत मांग लगातार सहारा दे रही है, जहाँ सोमवार को स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में लगभग 1 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया और स्ट्रैटेजी ने अपने खजाने में 950 BTC और जोड़े। ऊर्जा बाज़ार में वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल चार दिनों की गिरावट के सिलसिले को तोड़ते हुए 91.00 डॉलर से नीचे के स्तर से सुधरकर 93.00 डॉलर के करीब पहुँच गया, जो मध्य पूर्व के संकट पर ध्यान केंद्रित होने के कारण दिन में लगभग 1.40% की बढ़त दर्शाता है।


















