भारतीय शेयर बाजार में 27 जुलाई को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई, जिसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। सुबह 9:15 बजे शुरुआती कारोबार के दौरान बैंक का शेयर करीब 9.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ 88.43 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। 100 रुपये से कम कीमत वाले इस बैंकिंग शेयर में आई इस तेज बढ़त के बाद निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या मौजूदा स्तर पर दांव लगाना फायदेमंद रहेगा।
Q1 FY27 के दमदार नतीजों से मिली मजबूती
शेयरों में आई इस हालिया तेजी का मुख्य कारण आईडीएफसी फर्स्ट बैंक द्वारा जारी किए गए जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) के शानदार वित्तीय परिणाम हैं। जून तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा (नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 132.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1,075 करोड़ पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने ₹463 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। बैंक प्रबंधन के अनुसार, मजबूत कोर आय और प्रोविजनिंग में आई कमी की वजह से मुनाफे में यह बड़ी उछाल दर्ज की गई है।
ब्याज आय बढ़ी और एसेट क्वालिटी में हुआ सुधार
बैंक के कारोबारी प्रदर्शन पर नजर डालें तो ब्याज से होने वाली शुद्ध आय (NII) में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तिमाही में NII बढ़कर ₹5,972 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹4,933 करोड़ था। इससे साफ जाहिर होता है कि बैंक के लोन कारोबार में अच्छी ग्रोथ रही है। वहीं, बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी पिछले साल के 5.71 प्रतिशत से सुधरकर 5.96 प्रतिशत पर पहुंच गया।
इसके अलावा, जून तिमाही में बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 14 प्रतिशत बढ़कर ₹2,553 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले इसी अवधि में ₹2,239 करोड़ था। फंसे हुए कर्ज के एवज में अलग रखी जाने वाली राशि यानी प्रोविजन घटकर ₹1,144 करोड़ रह गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹1,659 करोड़ थी। हालांकि, मार्च तिमाही की तुलना में प्रोविजनिंग में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है।
बैंक की एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी अच्छी खबर आई है। जून तिमाही के अंत में ग्रॉस एनपीए (GNPA) घटकर 1.51 प्रतिशत रह गया, जो मार्च तिमाही में 1.61 प्रतिशत पर था। इसी तरह नेट एनपीए (NNPA) भी 0.48 प्रतिशत से घटकर 0.44 प्रतिशत पर आ गया। खराब कर्ज में आई यह कमी बैंक की वित्तीय सेहत सुधरने का सकारात्मक संकेत है।
फरवरी में सामने आया था ₹590 करोड़ का फर्जीवाड़ा
मौजूदा रिकवरी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी साल फरवरी में बैंक के शेयर 15 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गए थे। उस समय बैंक की सेक्टर-32 स्थित ब्रांच में ₹590 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया था। हरियाणा के आठ सरकारी विभागों के ₹504 करोड़ फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रसीदों और डेबिट नोट्स के माध्यम से निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए गए थे। इस घटना के बाद शेयर पर दबाव बना हुआ था, जिसे अब बेहतर नतीजों ने दूर करने में मदद की है।
शेयरों का हालिया और लॉन्ग टर्म रिटर्न
शुक्रवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर ₹80 पर बंद हुआ था और सोमवार को यह ₹85 के स्तर पर खुला। हालिया प्रदर्शन को देखें तो पिछले 2 हफ्तों में शेयर ने 1.30 प्रतिशत का निगेटिव रिटर्न दिया है, जबकि 1 महीने में इसमें 0.63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 1 साल के दौरान भी शेयर ने 5.96 प्रतिशत का निगेटिव रिटर्न दिया है।
हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों को बैंक ने शानदार मुनाफा दिया है। पिछले 3 सालों में कंपनी के शेयर ने 15.61 प्रतिशत का पॉजिटिव रिटर्न दिया है। 5 सालों की अवधि में निवेशकों को 69 प्रतिशत का फायदा मिला है, जबकि 10 वर्षों में इस शेयर ने अपने शेयरधारकों को 173 प्रतिशत का भारी-भरकम रिटर्न प्रदान किया है।



















