मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यूरोपीय कारोबारी माहौल पर दबाव बढ़ने लगा है। जर्मनी में आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त महीने में देश के प्रमुख व्यावसायिक धारणा सूचकांक में गिरावट आ सकती है। इससे पहले गर्मियों के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी समझौतों से बाजार में जो उम्मीद जगी थी, वह अब फिर से घटती दिख रही है। कच्चे तेल और ऊर्जा की बढ़ती लागत के चलते विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के प्रबंधक अपनी भावी योजनाओं को लेकर अधिक सतर्क और संशयवादी दृष्टिकोण अपना रहे हैं।
जर्मनी में व्यावसायिक धारणा पर बढ़ा दबाव
यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कारोबारी परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। कॉमर्ज़बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री क्रिस्टोफ़ बाल्ज़ और राल्फ़ सोल्वीन का आकलन है कि जर्मनी के प्रसिद्ध इफो (Ifo) बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स में अगस्त के दौरान गिरावट आ सकती है। उनके अनुमान के अनुसार, यह सूचकांक जुलाई के 86.6 अंक से फिसलकर अगस्त में 86.0 अंक पर आ सकता है। जुलाई के दौरान कई कंपनियों को यह उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से स्थिति सामान्य होगी और ऊर्जा की दरें कम रहेंगी, लेकिन अब वे उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं।
ऊर्जा दरों में दोबारा तेजी के अलावा जर्मन उद्योगों के सामने आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियां भी खड़ी हो रही हैं। देश की प्रमुख नदियों में जलस्तर काफी कम होने के कारण जलमार्ग से होने वाले माल परिवहन में बाधा आ रही है। इस वजह से कारखानों तक कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए व्यावसायिक अपेक्षाओं में किसी भी प्रकार का सुधार होना बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक आश्चर्य ही होगा।
वर्तमान कारोबारी स्थिति में बनी हुई है स्थिरता
भविष्य की संभावनाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बावजूद, कंपनियों की मौजूदा स्थिति से जुड़े आंकड़े तुलनात्मक रूप से स्थिर बने हुए हैं। इफो इंडेक्स के उस उप-घटक (subcomponent) में बहुत मामूली बदलाव आया है जो वर्तमान व्यावसायिक स्थिति का आकलन करता है। ईरान से जुड़े संघर्ष की शुरुआत के बाद से इस घटक में ज्यादा गिरावट नहीं आई है, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनियों के दैनिक कामकाज पर ऊर्जा की ऊंची दरों का प्रभाव अब तक सीमित रहा है।
आर्थिक विश्लेषण में यह स्पष्ट किया गया है कि हालांकि मौजूदा कारोबारी स्थिति अभी स्थिर दिख रही है, लेकिन इसे लेकर अनिश्चितता भविष्य की अपेक्षाओं की तुलना में कहीं अधिक है। जर्मन कंपनियों ने लागत प्रबंधन में अब तक मजबूती दिखाई है, लेकिन यदि ऊर्जा दरें लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर आने वाले समय में उत्पादन और मुनाफे पर पड़ सकता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में दिखा उतार-चढ़ाव
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार (FX) में प्रमुख मुद्राओं के मूल्यों में मिला-जुला रुख देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड में हालिया बढ़त के बाद कुछ नरमी आई है। GBP/USD मुद्रा जोड़ी 1.3670 के उच्च स्तर को छूने के बाद फिसलकर 1.3600 के निचले स्तरों के करीब कारोबार करती दिखी। ब्रिटेन से आए कमजोर आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी डॉलर में मामूली सुधार के कारण पाउंड की दो दिनों से जारी बढ़त पर ब्रेक लग गया।
इसी तरह, यूरोप की साझा मुद्रा यूरो भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में नजर आई। EUR/USD की जोड़ी 1.1700 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में असफल रहने के बाद 1.1670 के आसपास कारोबार करती पाई गई। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में प्रतिफल की स्थिति और डॉलर की मजबूत होती स्थिति से विदेशी मुद्रा व्यापारी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड
मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कीमती धातुओं में जोरदार तेजी देखने को मिली है। वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति की आशंका के बीच निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने के रूप में सोने का रुख किया है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में सोने की कीमत 4,600 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर को पार कर गई, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है।
खास बात यह रही कि अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद सोने की कीमतों में यह शानदार तेजी दर्ज की गई। मध्य पूर्व में तनाव और ऊर्जा संकट के कारण निवेशक सर्राफा बाजार में अपनी पूंजी लगाना सुरक्षित मान रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में लौटी तेजी, बिटकॉइन 77,000 डॉलर के पार
डिजिटल संपत्ति बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का माहौल बना रहा। बिटकॉइन (BTC) ने अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखते हुए 77,000 डॉलर के स्तर को पार कर लिया, जिससे पूरे क्रिप्टो बाजार को समर्थन मिला। बिटकॉइन में आई इस तेजी के साथ अन्य प्रमुख डिजिटल टोकनों में भी खरीदारी देखी गई।
एथेरियम (ETH) 2,400 डॉलर के स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि रिपल (XRP) 1.35 डॉलर के आसपास कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता के दौर में निवेशक अपनी पूंजी का कुछ हिस्सा डिजिटल संपत्तियों में भी लगा रहे हैं, जिससे इन संपत्तियों के मूल्यों को लगातार समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी ने बॉन्ड बायबैक कार्यक्रम का दायरा बढ़ाया
अमेरिकी वित्त विभाग ने बॉन्ड बाजार में तरलता (liquidity) बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अपने नियमित पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम से अलग हटकर, अमेरिकी ट्रेजरी ने बुधवार को ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के अनुसार दोपहर 12:32 बजे दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद (buyback) की सीमा को दोगुना करने का ऐलान किया।
इस नई योजना के तहत 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड के लिए बायबैक की अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बॉन्ड बाजार में स्थिरता लाना और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखना है।
जैक्सन होल सम्मेलन और एनवीडिया के नतीजों पर टिकीं नजरें
वैश्विक वित्तीय बाजारों के सहभागी अब आगामी प्रमुख घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं। पूर्व फेड अधिकारी केविन वॉर्श प्रसिद्ध जैक्सन होल (Jackson Hole) आर्थिक संगोष्ठी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे हैं। बाजार विश्लेषक उनके वक्तव्य से मौद्रिक नीति के संकेतों को समझने की कोशिश करेंगे, हालांकि बॉन्ड बाजार में हालिया अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद ब्याज दरों में किसी अचानक बड़े कड़े फैसले की संभावना कम मानी जा रही है।
दूसरी ओर, शेयर बाजार के लिए टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के आगामी तिमाही नतीजे बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। टेक शेयरों की हालिया तेजी में आई सुस्ती के बीच, एनवीडिया के वित्तीय परिणाम यह तय करेंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और चिप उद्योग में निवेशकों का भरोसा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।



















