गुरुवार को अमेरिकी डॉलर बड़ी मुद्राओं के मुकाबले कमजोर पड़ गया, क्योंकि जून की नौकरियों की तस्वीर उम्मीद से कहीं ज्यादा फीकी निकली और इसने ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर बाजार की सोच बदल दी। कॉमर्जबैंक के बर्नड वाइडेनश्टाइनर के मुताबिक अमेरिका में जून के दौरान गैर-कृषि क्षेत्र (नॉनफार्म पेरोल) में सिर्फ 57,000 नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार के अनुमान से बहुत नीचे रहीं। इसके साथ ही पिछले महीनों के आंकड़ों में 74,000 की कटौती भी की गई।
हेडलाइन से गहरी है सुस्ती
वाइडेनश्टाइनर का कहना है कि रोजगार का यह प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उनके शब्दों में, "जून में रोजगार का रुझान उम्मीदों से पीछे रहा। केवल 57 हजार नई नौकरियां बनीं, जो अनुमान से लगभग आधी हैं। इसके अलावा, पिछले दो महीनों के पेरोल आंकड़ों में कुल मिलाकर 74,000 की कटौती की गई है (इस संशोधन में नए सिरे से आंके गए मौसमी कारकों के साथ-साथ कंपनियों और सरकारी एजेंसियों की देर से आई रिपोर्टों को भी शामिल किया गया है, जो अधिक पूरी तस्वीर देती हैं)।"
यानी सिर्फ ताजा महीना ही कमजोर नहीं रहा, बल्कि बीते आंकड़े भी घटाकर दोबारा पेश किए गए, जिससे भर्ती की रफ्तार पहले जितनी मजबूत नहीं दिखती। वाइडेनश्टाइनर के अनुसार यह गिरावट कोई अचानक आया झटका नहीं है, बल्कि एक लंबा चलता रुझान है। उनका कहना है, "मासिक रोजगार वृद्धि पिछले कई महीनों से लगातार धीमी पड़ रही है। इसलिए छह महीने का औसत, जो आंकड़ों के उतार-चढ़ाव को संतुलित कर देता है, अब जल्द ही फिर से नीचे की ओर मुड़ सकता है।"
फिर भी बेरोजगारी दर 4.2% पर टिकी
कमजोर भर्ती के बावजूद बेरोजगारी दर 4.2% पर ही बनी रही। इसकी वजह श्रम बल की धीमी बढ़त है। वाइडेनश्टाइनर बताते हैं, "हालांकि, श्रम बल की काफी धीमी वृद्धि को देखते हुए, जून जैसे स्तर की बढ़त भी बेरोजगारी दर को बढ़ने से रोकने के लिए काफी है।" सीधे शब्दों में कहें तो नौकरी तलाशने वालों की संख्या भी धीमी रफ्तार से बढ़ रही है, इसलिए कम नई नौकरियां भी दर को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त साबित हो रही हैं।
तेल सस्ता, तो कीमतों पर भी नरमी
रोजगार के साथ महंगाई का रुझान भी नरम दिख रहा है। कच्चे तेल के दाम गिरने का इशारा है कि जून में उपभोक्ता कीमतें थोड़ी कम रह सकती हैं। कमजोर नौकरियां और ठंडी पड़ती महंगाई, दोनों मिलकर बाजार को यह भरोसा दे रहे हैं कि ब्याज दरों पर दबाव अब पहले जितना नहीं रहेगा।
मुद्रा बाजार में हलचल
डॉलर की कमजोरी का असर सीधे विदेशी मुद्रा बाजार में दिखा। गुरुवार को यूरोपीय सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड डॉलर के मुकाबले 0.5% चढ़कर 1.3340 के आसपास पहुंच गया। GBP/USD जोड़ी में यह मजबूती इसलिए आई क्योंकि जून के नॉनफार्म पेरोल आंकड़ों (जो 12:30 GMT पर जारी होने थे) से पहले डॉलर अपनी साथी मुद्राओं के मुकाबले कमजोर चल रहा था। इसी तरह EUR/USD ने भी रफ्तार पकड़ी और 1.1450 का स्तर पार करते हुए कई दिनों का नया ऊंचा स्तर छू लिया। इससे पहले यह जोड़ी लगातार दो दिन गिरावट में रही थी, लेकिन ताजा आंकड़ों को तौलते निवेशकों के बीच इसने वह गिरावट पीछे छोड़ दी।
सोना और क्रिप्टो को मिला सहारा
डॉलर के लड़खड़ाने का फायदा सोने को भी मिला। गुरुवार को सोना अपनी तेजी बनाए रखते हुए 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार निकल गया। कीमती धातु में यह उछाल डॉलर की गिरावट और उम्मीद से कमजोर पेरोल रिपोर्ट के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के दम पर आया। दूसरी ओर क्रिप्टो बाजार में भी गुरुवार को व्यापक तेजी दिखी। लंबे समय तक बिकवाली के दबाव के बाद जोखिम को लेकर धारणा सुधरी और बिटकॉइन दोबारा 60,000 डॉलर के ऊपर लौट आया, जबकि हफ्ते की शुरुआत में यह 58,000 डॉलर के समर्थन स्तर तक फिसल गया था।
सिंट्रा के बाद अब नजरें फेड पर
बाजार की निगाहें अब पूरी तरह फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर टिकी हैं। वित्तीय बाजार सिंट्रा में इसी उम्मीद से पहुंचे थे कि उन्हें फेड की आगे की चाल के कुछ संकेत मिलेंगे। लेकिन वे ज्यादातर इसी पुष्टि के साथ लौटे कि फेड चेयर केविन वॉर्श उन संकेतों को पढ़ना और मुश्किल बनाने के इरादे में हैं। यानी कमजोर आंकड़ों के बीच भी दरों की दिशा को लेकर अनिश्चितता फिलहाल बनी रहने वाली है।













