अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े मुद्रास्फीति जोखिमों में तेजी देखने को मिली है, लेकिन कनाडा की घरेलू अर्थव्यवस्था में मौजूद सुस्ती और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं केंद्रीय बैंक के निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं। नेशनल बैंक ऑफ कनाडा के विश्लेषक ईथन करी के आकलन के अनुसार, बैंक ऑफ कनाडा अक्टूबर की बैठक में अपनी नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए यथास्थिति बनाए रख सकता है। वित्तीय बाजारों में नीतिगत सख्ती की समयसीमा पहले खिसकती दिखाई दे रही है, जहां ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप यानी ओआईएस के आंकड़े जून 2026 तक बैंक ऑफ कनाडा द्वारा करीब चार बार दर वृद्धि का संकेत दे रहे हैं। हालांकि, ईथन करी का मानना है कि आर्थिक बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति को देखते हुए बाजार का यह अनुमान कुछ अधिक आक्रामक हो सकता है। केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता मुद्रास्फीति के दूसरे दौर के प्रभावों को रोकने पर अपना ध्यान केंद्रित किए हुए हैं, मगर आगे की दर वृद्धि का समय और उसकी गति पूरी तरह से आर्थिक वृद्धि और महंगाई के जोखिमों के संतुलन पर निर्भर करेगी।
कनाडा में नीतिगत सख्ती की रफ्तार और आर्थिक सुस्ती की चुनौती
कनाडा के नीतिगत परिदृश्य को लेकर ईथन करी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अपेक्षित समयसीमा पर सख्ती को कुछ करीब लाया गया है, फिर भी अक्टूबर में केंद्रीय बैंक के किसी बड़े कदम से दूर रहने की संभावना अधिक है। ईथन करी ने कहा कि वे अब भी उम्मीद करते हैं कि अक्टूबर में बैंक ऑफ कनाडा कोई कदम नहीं उठाएगा क्योंकि आर्थिक रफ्तार पर संकट मंडरा रहा है और सुस्ती बरकरार है। मार्च के दौरान दरों में आई भारी बिकवाली के बाद से अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक सख्ती का झुकाव बना हुआ है, हालांकि इसकी तीव्रता सभी देशों में एक समान नहीं रही है। कनाडा के मामले में घरेलू सुस्ती और व्यापारिक अनिश्चितता ने अनुमानित दर वृद्धियों को आगे खिसका दिया है, जिसमें केवल मैकलम के सितंबर के आक्रामक प्रेस वक्तव्य के बाद एक संक्षिप्त बदलाव दर्ज किया गया था। जिन केंद्रीय बैंकों ने अभी तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं की है, उनके लिए संदेश पूरी तरह स्पष्ट है कि महंगाई के जोखिम सर्वोपरि हैं और बाजारों ने भी संभावित नीतिगत कदमों को उसी हिसाब से अपने मूल्यांकनों में शामिल कर लिया है। ओआईएस के सौदे यह साफ दर्शाते हैं कि व्यापारी जून 2026 तक बैंक ऑफ कनाडा से करीब चार दौर की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
एशियाई कारोबारी सत्र में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और संपत्तियों की चाल
कनाडा के नीतिगत परिदृश्य के अतिरिक्त वैश्विक मुद्रा बाजारों में भी कई हलचलें देखने को मिल रही हैं। एशियाई कारोबारी सत्र में मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी जोड़ी 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी आकर्षित करने में सफल रही। इस तेजी को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की आक्रामक टिप्पणियों से समर्थन मिला। इसके बावजूद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत आधार दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त सीमित रह सकती है।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी ने एशियाई सत्र में मंगलवार को 157.50 के स्तर के पास मामूली बढ़त दर्ज की। जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन की गिरावट को थामने का प्रयास किया, लेकिन बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्च स्तर पर की गई नरम दर वृद्धि ने येन पर दबाव बनाए रखा। फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मध्य पूर्व के तनाव से अमेरिकी डॉलर को मिलने वाले समर्थन ने इस मुद्रा जोड़ी को अतिरिक्त गति प्रदान की है।
बैंक ऑफ जापान का ऐतिहासिक फैसला और जिंस बाजार में सोने की नरमी
बैंक ऑफ जापान ने अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। यह ऐतिहासिक निर्णय मौद्रिक नीति बोर्ड की बैठक में 7-2 के बहुमत से लिया गया, जो पिछले कई हफ्तों से बाजार की व्यापक उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप रहा। ब्याज दरों में यह बदलाव जापान में मौद्रिक सामान्यीकरण की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है।
जिंस बाजार पर नजर डालें तो सोने की कीमतों में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को पीली धातु फिसलकर करीब 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर तक आ गई। सोने में आई इस बिकवाली और गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर में लौटी नई खरीदारी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिलाजुला रुख और वैश्विक स्तर पर बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं रहीं।
वॉशिंगटन में ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच आगामी उच्चस्तरीय शिखर वार्ता
वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों की नजरें अब वॉशिंगटन में होने वाली इस हफ्ते की अहम द्विपक्षीय बैठक पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वॉशिंगटन में गुरुवार को एक उच्चस्तरीय शिखर वार्ता के लिए मिलने जा रहे हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली इस बातचीत पर दुनिया भर के निवेशक पैनी नजर रख रहे हैं। यह बैठक यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी कि दुनिया की दो विशालतम अर्थव्यवस्थाएं अपने मौजूदा कारोबारी संघर्ष विराम को आगे बढ़ाती हैं या फिर वैश्विक व्यापार एक नए अनिश्चितता भरे दौर में प्रवेश करता है।


















