मिजोरम की राज्य सरकार ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूलों में 1,300 से अधिक शिक्षकों की चरणबद्ध बहाली को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और स्टाफ की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के लिए मंगलवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मुख्यमंत्री लालदुहोमा और शिक्षा मंत्री वनलालथालाना ने की, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर सुधारों को लेकर भी चर्चा हुई।
विभिन्न स्कूली स्तरों पर पदों का विस्तृत ब्योरा
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों के लिए 671 नियमित शिक्षक पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई है। इस पूरी प्रक्रिया को चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसके तहत चालू वित्तीय वर्ष में ही 100 पदों को भरने की योजना बनाई गई है। इससे प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्थानों को राहत मिलेगी।
मिडिल स्कूलों के लिए सरकार ने संविदा आधार पर 544 शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत निर्धारित 544 पदों में से 212 पद इसी वित्तीय वर्ष के दौरान भरे जाने निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा हाई स्कूलों के लिए कुल 107 नियमित शिक्षक पदों की चरणबद्ध बहाली स्वीकृत हुई है, जिनमें से 57 शिक्षकों की नियुक्ति चालू वित्तीय वर्ष में ही पूरी कर ली जाएगी।
प्रशासनिक पदों और शिक्षा सेवा कैडर पर मंथन
बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे में मौजूद रिक्तियों की भी समीक्षा की गई। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और उप-मंडलीय शिक्षा अधिकारी (एसडीईओ) जैसे अहम प्रशासनिक पदों को लेकर अधिकारियों ने चर्चा की। सर्किल शिक्षा अधिकारियों को पदोन्नत कर एसडीईओ के पद पर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी और सरकार ने इस पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्णय लिया।
इसके साथ ही प्रस्तावित मिजोरम शिक्षा सेवा के प्रारूप को जल्द से जल्द मंत्रिपरिषद के समक्ष विचारार्थ पेश करने की तैयारी है। बैठक में हिंदी शिक्षा अधिकारी, प्रौढ़ शिक्षा शाखा तथा शारीरिक शिक्षा शाखा के स्टाफ और उनके कामकाज का भी आकलन किया गया। प्रशासन की ओर से हिंदी शिक्षा अधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती शुरू करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
पीपीपी मॉडल और स्कूलों के युक्तिकरण की योजना
स्कूल शिक्षा, वित्त तथा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति वाली इस बैठक में राज्य भर के शिक्षकों की कुल संख्या और उनकी तैनाती पर भी विमर्श हुआ। राज्य की संपूर्ण स्कूली शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से सरकार कुछ विद्यालयों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित करने की संभावना तलाश रही है। इसके अतिरिक्त, जिन विद्यालयों में छात्रों का नामांकन बेहद कम है, उन्हें आपस में मिलाने अथवा बंद करने के प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया।



















