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कच्चे तेल में लंबी तेजी के आसार: ओसीबीसी ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 100 डॉलर कियाबाज़ार
2 नव॰ 2026, 5:51 pm (9 मिनट पहले)· 0

कच्चे तेल में लंबी तेजी के आसार: ओसीबीसी ने ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 100 डॉलर किया

मध्य पूर्व में महीनों से जारी बाधाओं और समुद्री परिवहन संकट के चलते ओसीबीसी ने 2026 के अंत तक ब्रेंट क्रूड का लक्ष्य 100 डॉलर प्रति बैरल तय किया है। तेल की आपूर्ति जारी रहने के बावजूद कम होते स्टॉक और महंगे भाड़े से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी दबाव बना हुआ है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार बने भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला की दिक्कतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों को लेकर नए अनुमान सामने आए हैं। ओसीबीसी के रणनीतिकारों सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग ने ब्रेंट क्रूड के अपने मूल्य अनुमानों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। नए अनुमानों के अनुसार, 2026 के अंत तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल और 2027 के अंत तक 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यह संशोधन मुख्य रूप से मध्य पूर्व में महीनों से जारी रुकावटों के कारण बाजार के सुरक्षा बफर कमजोर पड़ने के बाद किया गया है। खाड़ी देशों से निर्यात में सुधार दिखने के बावजूद घटते भंडार, तंग लॉजिस्टिक्स और जहाजरानी से जुड़े निरंतर जोखिमों की वजह से परिवहन में अड़चनें और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। यही कारक लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतों और ब्रेंट तथा डब्ल्यूटीआई के बीच बढ़ते फैलाव को समर्थन दे रहे हैं।

मूल्य अनुमानों में बढ़ोतरी और बाजार के वास्तविक हालात

विश्लेषकों ने 2026 के अंत के लिए अपने ब्रेंट अनुमान को पहले के 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 100 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि 2027 के अंत के अनुमान को 75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल किया गया है। सिम मोह सियोंग और क्रिस्टोफर वोंग का कहना है कि यह बदलाव अमेरिका-ईरान संघर्ष किस दिशा में समाप्त होगा उस पर किसी दृढ़ विश्वास से अधिक मौजूदा कड़े बाजार की वास्तविकताओं की प्रतिक्रिया है। खाड़ी क्षेत्र से निर्यात की बहाली के बावजूद ब्रेंट क्रूड लगातार 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है।

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2026 के अंत के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 100 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।

यद्यपि तनाव का और अधिक बढ़ना पूरी तरह अनिवार्य नहीं है, लेकिन बाजार की किसी नए झटके को झेलने की आंतरिक क्षमता काफी कम हो चुकी है। महीनों की निरंतर बाधाओं ने वैश्विक भंडारण को तेजी से खाली किया है, तेल टैंकरों की उपलब्धता सीमित कर दी है, वैकल्पिक निर्यात मार्गों पर अत्यधिक दबाव डाला है और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक को खत्म कर दिया है। ऐसी परिस्थितियों में समुद्री व्यापार या क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर होने वाले किसी भी नए हमले का कीमतों पर अत्यधिक और असंगत प्रभाव देखने को मिल सकता है।

उत्पादन नहीं, परिवहन बना मुख्य संकट

ऊर्जा क्षेत्र में मौजूदा मुख्य समस्या उत्पादन की कमी नहीं, बल्कि परिवहन और वितरण से जुड़े अवरोध हैं। लंबे समुद्री चक्कर, सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बाधित व्यापारिक मार्ग जहाजों को लंबे समय तक व्यस्त रखते हैं, जिससे सक्रिय टैंकर क्षमता काफी घट जाती है। इसके प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप समुद्री माल ढुलाई की दरें लगातार बढ़ रही हैं। तेल की आपूर्ति भौतिक रूप से चालू रह सकती है, लेकिन इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना अब काफी धीमा और अत्यधिक खर्चीला हो चुका है।

यह लॉजिस्टिक संकट सबसे अधिक परिष्कृत उत्पादों, विशेषकर डीजल जैसे ईंधनों पर असर डाल रहा है। माल ढुलाई का ऊंचा खर्च व्यापार के स्वाभाविक प्रवाह को बाधित करता है और रिप्लेसमेंट लागत को बढ़ाता है, जिससे डीजल बाजार में तंगी बनी रहती है और रिफाइनिंग क्रैक स्प्रेड को सहारा मिलता है। इसके अतिरिक्त, ट्रांसअटलांटिक माल ढुलाई लागत में वृद्धि के कारण ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई का मूल्य अंतर और अधिक चौड़ा हो सकता है, क्योंकि यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए डब्ल्यूटीआई को भारी छूट पर कारोबार करना पड़ता है।

विदेशी मुद्रा, सोना और डिजिटल परिसंपत्तियों पर असर

ऊर्जा संकट और व्यापक भू-राजनीतिक गतिविधियों का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख वित्तीय बाजारों में भी इसकी हलचल देखी जा रही है। विदेशी मुद्रा बाजार में, ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत को लेकर नई आशा से निवेशकों का भरोसा थोड़ा सुधरा है, जिससे सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। इसके चलते सोमवार को एशियाई सत्र के दौरान एयूडी/यूएसडी में सुधार दर्ज हुआ, हालांकि आरबीए के महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय से पहले यह जोड़ी अपने एक महीने के उच्च स्तर से नीचे ही रही।

दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई में सप्ताह की शुरुआत में सकारात्मक गति देखी गई। बैंक ऑफ जापान के फैसले के बाद 157.00 से नीचे गिरे स्तरों से उबरते हुए यह जोड़ी एशियाई सत्र में 158.00 के करीब पहुंच गई। जापानी वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की ताजा चेतावनी के बावजूद यह तेजी जारी रही।

सोने की कीमतों की बात करें तो शुरुआती यूरोपीय सत्र में यह धातु 3,900 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे हल्के सकारात्मक रुझान के साथ कारोबार करती दिखी। अमेरिका-ईरान युद्ध के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से डॉलर में आई बिकवाली ने सोने को सहारा दिया, लेकिन ऊर्जा संकट जनित मुद्रास्फीति के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं अब भी बनी हुई हैं। इस कारण ब्याज न देने वाली यह पीली धातु अक्टूबर 2025 के निचले स्तर के आसपास ही सीमित रही।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में, डॉगकॉइन सोमवार को लगभग 0.075 डॉलर के आसपास टिका रहा, जो सितंबर के अंत से लगातार पांचवें सप्ताह की गिरावट को दर्शाता है। सैंटिमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े व्हेल निवेशक अपनी होल्डिंग्स कम कर रहे हैं जबकि छोटे व्हेल वॉलेट टोकन जमा कर रहे हैं। कमजोर ऑन-चेन आंकड़ों और बिगड़ते तकनीकी परिदृश्य के बीच डॉगकॉइन में आगे और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।

सवाल-जवाब

ओसीबीसी ने 2026 और 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड का क्या अनुमान लगाया है?
ओसीबीसी ने अपने अनुमान को बढ़ाकर 2026 के अंत तक 100 डॉलर प्रति बैरल और 2027 के अंत तक 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।
वर्तमान में ब्रेंट क्रूड का भाव किस स्तर के ऊपर बना हुआ है?
खाड़ी देशों से निर्यात में सुधार होने के बावजूद ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है।
तेल बाजार में उत्पादन की जगह परिवहन मुख्य अड़चन क्यों बन गया है?
सुरक्षा जोखिमों और लंबे समुद्री मार्गों के कारण जहाज लंबे समय तक व्यस्त रहते हैं, जिससे टैंकरों की उपलब्धता घटी है और माल ढुलाई खर्च बढ़ गया है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व को लेकर ब्याज दरों की क्या संभावनाएं हैं?
ऊर्जा संकट से उत्पन्न महंगाई की चिंताओं के कारण फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना अभी भी बनी हुई है।
डॉगकॉइन की हालिया स्थिति क्या रही है?
डॉगकॉइन सोमवार को लगभग 0.075 डॉलर पर रहा और सितंबर के अंत से यह इसकी लगातार पांचवें सप्ताह की गिरावट है।
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