अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए मजबूती के साथ हुई है। सोमवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी में बढ़त दर्ज की गई और इसका विनिमय मूल्य 0.6955 के करीब पहुंच गया। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से रोजगार से जुड़े उम्मीद से काफी कमजोर आंकड़े सामने आने के बाद ग्रीनबैक के रूप में पहचाने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर चौतरफा बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा फायदा ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को मिला है। हालांकि, बाजार सहभागी अब आगे की दिशा तय करने के लिए सोमवार को ही जारी होने वाले अमेरिकी आईएसएम सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
अमेरिकी रोजगार बाजार में सुस्ती और ब्याज दरों पर प्रभाव
शुक्रवार को अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के महीने में गैर-कृषि पेरोल में केवल 29,000 नई नौकरियों का इजाफा हुआ। यह आंकड़ा विश्लेषकों और बाजार के 90,000 के अनुमान से बेहद कम रहा। इससे पहले अगस्त महीने के आंकड़ों को भी संशोधित किया गया था, जिसके तहत पूर्व में घोषित 162,000 की जगह वास्तविक वृद्धि 133,000 नौकरियों की दर्ज की गई थी। रोजगार सृजन की इस सुस्त रफ्तार ने निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत कर दी है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी से पीछे हट सकता है।
सीएमई फेडवॉच टूल के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, रोजगार के कमजोर आंकड़ों के सार्वजनिक होते ही अक्टूबर महीने की नीतिगत बैठक में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना घटकर महज 22.1 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, आगामी दिसंबर में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना 87.2 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। बाजार का मानना है कि यदि आर्थिक गतिविधियां इसी तरह सुस्त बनी रहीं, तो केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत सख्ती की गति को धीमा करने के लिए बाध्य हो सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक के रुख और अर्थव्यवस्था की स्थिति
दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के संदर्भ में भी केंद्रीय बैंक के आगामी फैसलों को लेकर परिस्थितियां बदल रही हैं। ऑस्ट्रेलिया के हालिया उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़े विश्लेषकों के अनुमान के अनुरूप रहे हैं। इन आंकड़ों के आने के बाद रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर महीने की मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में वृद्धि करने की संभावनाएं काफी घट गई हैं। एलएसईजी के आंकड़ों के मुताबिक, मनी मार्केट अब यह मानकर चल रहा है कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक नवंबर में दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की संभावना गिरकर लगभग 20 प्रतिशत रह गई है।
कॉमर्जबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरों में की जाने वाली किसी भी बढ़ोतरी का असर पूरी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित समय अंतराल के बाद ही स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। बैंक ने विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के रियल एस्टेट क्षेत्र की चिंताओं को रेखांकित किया है, जहां अगस्त माह में भवन निर्माण परमिट में पिछले महीने की तुलना में 6.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इसके अलावा देश के बड़े शहरों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कॉमर्जबैंक का आकलन है कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के लिए आने वाले कुछ महीनों तक आर्थिक रुझानों पर नजर बनाए रखना और नीतिगत फैसले टालना ज्यादा उचित कदम होगा। इसी वजह से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को निकट भविष्य में किसी बड़े नीतिगत सहारे की उम्मीद कम दिखाई देती है।
तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण
मुद्रा विनिमय चार्ट पर तकनीकी स्तरों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए ऊपरी स्तरों पर पहला बड़ा प्रतिरोध 100 दिवसीय सरल मूविंग एवरेज पर 0.7055 के स्तर पर मौजूद है। इसके बाद दूसरा तकनीकी अवरोध 0.7070 के पास बोलिंगर मिडल बैंड पर देखा जा रहा है। बाजार में बिकवाली के तात्कालिक दबाव को समाप्त करने के लिए दैनिक आधार पर इस जोड़ी को इन स्तरों के ऊपर बंद होना आवश्यक होगा। यदि यह स्तर पार होता है, तो अगला महत्वपूर्ण अवरोध 0.7250 के करीब बोलिंगर अपर बैंड पर स्थित होगा।
इसके विपरीत, यदि मुद्रा जोड़ी में गिरावट का रुख दोबारा शुरू होता है, तो 0.6895 के स्तर पर स्थित बोलिंगर लोअर बैंड पहला प्रमुख समर्थन प्रदान कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि विनिमय दर इस स्तर को बनाए रखने में विफल रहती है, तो व्यापक मंदी के दौर में नए निचले स्तरों की ओर गिरावट का रास्ता खुल सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रमुख प्रेरक तत्व
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का मूल्य कई बुनियादी कारकों पर निर्भर करता है। इनमें सबसे प्राथमिक कारक रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा निर्धारित नीतिगत ब्याज दरें हैं। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक वह दर तय करता है जिस पर वाणिज्यिक बैंक एक दूसरे को अल्पकालिक ऋण देते हैं। यह दर पूरी अर्थव्यवस्था में उधारी लागत को प्रभावित करती है। केंद्रीय बैंक का मुख्य लक्ष्य ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के माध्यम से मुद्रास्फीति को 2 से 3 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखना होता है। जब अन्य प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों की तुलना में ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिलती है, जबकि इसके विपरीत स्थिति में मुद्रा कमजोर होती है। इसके अलावा बैंक मात्रात्मक सहजता या सख्ती का उपयोग करके भी ऋण परिस्थितियों को नियंत्रित करता है।
ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है, इसलिए इसका सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद लौह अयस्क भी मुद्रा के मूल्यांकन में केंद्रीय भूमिका निभाता है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का वार्षिक लौह अयस्क निर्यात 118 अरब डॉलर का था, जिसका प्राथमिक खरीदार चीन है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लौह अयस्क की कीमतों में उछाल आने से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग बढ़ती है और मुद्रा को मजबूती मिलती है, जबकि कीमतें गिरने पर मुद्रा पर नकारात्मक दबाव आता है।
चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जब चीनी अर्थव्यवस्था में तीव्र विकास होता है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं की अधिक खरीद करता है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग में स्वाभाविक वृद्धि होती है। चीनी आर्थिक विकास से जुड़े आंकड़ों में कोई भी सकारात्मक या नकारात्मक बदलाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्य को सीधे प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त देश का व्यापार संतुलन, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है, मुद्रा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। निर्यात आय आयात व्यय से अधिक होने पर अनुकूल व्यापार संतुलन बनता है, जिससे विदेशी खरीदारों की मांग के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्राप्त होती है। साथ ही व्यापक बाजार भावना यानी निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान भी मुद्रा को सहारा देता है, जबकि सुरक्षित विकल्पों की तलाश वाले माहौल में इसमें गिरावट देखी जाती है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का हाल
विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजार के अन्य क्षेत्रों में भी काफी हलचल दर्ज की गई है। शुक्रवार के सत्र में डॉलर में आई मुनाफावसूली के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने 0.6950 की ओर वापसी की थी। वहीं 17 महीने के उच्चतम स्तर से अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट के बीच जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा यानी यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के करीब संघर्ष करती दिखी। टोक्यो के उम्मीद से ज्यादा मजबूत सीपीआई आंकड़ों और डॉलर की नरमी के कारण यह जोड़ी अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे फिसल गई।
कीमती धातुओं के बाजार में सोना गैर-कृषि पेरोल आंकड़ों के बाद आई शुरुआती तेजी को 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार बनाए रखने में असमर्थ रहा और सप्ताह के अंत तक फिसलकर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया। दूसरी ओर, यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गई। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 तक गिरी, जो जनवरी के 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है। यूरो में यह कमजोरी अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों से जुड़ी चिंताओं के कारण बनी हुई है।


















