दीपावली पर घर लाएं ये खास पौधे, वास्तु के अनुसार बरसेगी सुख और समृद्धिजीवित्पुत्रिका व्रत 2026: संतान की दीर्घायु का निर्जला संकल्प, जानें नवमी पर पारण का मुहूर्त और पूजा विधानकविनगर में शटर उठने से पहले लगने लगती हैं गाड़ियां, 15 पैसे से शुरू हुआ अरुण सिंघल का पान का सफरहोर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त शर्तें: अमेरिकी युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान की प्रमुख मांगें और वैश्विक बाजार पर असरकार्तिक माह में तुलसी पूजन से मिलती है सुख-समृद्धि, जानें दीपदान के नियम और धार्मिक मान्यताएंपितृपक्ष में दिवंगत महिलाओं के तर्पण के लिए क्यों समर्पित है नवमी तिथि, जानिए शुभ मुहूर्त और भोजन के जरूरी नियमदिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा चुनते समय इन अहम बातों का रखें ध्यानदरभंगा राजदरबार से वैश्विक मंच तक शास्त्रीय गायकी को नई ऊंचाइयों पर ले गए राम चतुर मलिकमुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तौर-तरीकों पर शीर्ष अदालत करेगी अहम सुनवाईअसम में पूर्व अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 12 फीसदी आरक्षण, पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री पर लगेगा ग्रीन सेस
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त शर्तें: अमेरिकी युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान की प्रमुख मांगें और वैश्विक बाजार पर असरबाज़ार
5 अक्तू॰ 2026, 4:34 am (43 मिनट पहले)· 0

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त शर्तें: अमेरिकी युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान की प्रमुख मांगें और वैश्विक बाजार पर असर

ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ सैन्य टकराव खत्म करने की वार्ताओं में होर्मुज जलडमरूमध्य मुख्य केंद्र बना हुआ है, जबकि तेहरान अपनी सात बुनियादी मांगों पर अड़ा हुआ है। इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक वित्तीय बाजारों में सुरक्षित निवेश और प्रमुख मुद्राओं की चाल पर गहरा असर देखा जा रहा है।

कमोडिटी आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले समुद्री रास्तों को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच खींचतान तेज हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के राजनयिक प्रयासों के बीच, ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही की बहाली किसी भी समझौते की पहली और गैर-परक्राम्य शर्त होगी। तेहरान ने इस बात पर जोर दिया है कि रणनीतिक जलमार्ग को फिर से सामान्य बनाने का रास्ता पूरी तरह उसकी तय प्राथमिकताओं से जुड़ा है।

वार्ता की मेज पर होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा गतिरोध

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने रविवार को इस बात की पुष्टि की कि वाशिंगटन के साथ मौजूदा टकराव खत्म करने के लिए चल रही चर्चाओं में होर्मुज जलडमरूमध्य ही प्राथमिक विषय है। उन्होंने अमेरिकी पक्ष की ओर से सामने आए ताजा प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि नए दस्तावेज में पहले के मसौदों से कोई बुनियादी बदलाव नहीं है। ईरानी रुख के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन अपने पुराने तौर-तरीकों पर कायम रहते हुए परमाणु मामले को ही बार-बार केंद्र में ला रहा है, जिससे व्यावहारिक समाधान निकलने में रुकावट पैदा हो रही है।

दूसरी तरफ, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने तेहरान के कड़े रुख को दोहराते हुए कहा कि समुद्री मार्ग खोलने के लिए निर्धारित शर्तों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने हालिया अमेरिकी सुझावों को खारिज करते हुए उन्हें एकतरफा मांगे करार दिया। उनका कहना था कि जब तक इस्लामाबाद ज्ञापन पर आधारित ईरानी पक्षों की सात प्रमुख शर्ते पूरी नहीं हो जातीं, तब तक इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को हरी झंडी नहीं दी जा सकती।

ये भी पढ़ें

वित्तीय बाजारों की नब्ज: रिस्क-ऑन बनाम रिस्क-ऑफ का समीकरण

युद्ध और कूटनीतिक गतिरोध के दौर में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार विशेष प्रवृत्तियों के तहत प्रतिक्रिया देते हैं, जिन्हें वित्तीय शब्दावली में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ की स्थिति कहा जाता है। ये अवधारणाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि किसी खास समय सीमा के दौरान निवेशक जोखिम उठाने के लिए किस हद तक तैयार हैं। जब बाजार में रिस्क-ऑन का माहौल बनता है, तब कारोबारी भविष्य की आर्थिक गतिविधियों को लेकर आश्वस्त होते हैं और अधिक प्रतिफल देने वाली अस्थिर संपत्तियों में पूंजी लगाने से नहीं हिचकिचाते। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ का दौर शुरू होते ही पूंजी की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है, जहां सीमित मुनाफे के बावजूद सुरक्षित ठिकानों को चुना जाता है।

सामान्य तौर पर रिस्क-ऑन के चक्र में शेयर बाजार में तेजी आती है और सोने को छोड़कर अधिकांश औद्योगिक कमोडिटी के भाव चढ़ते हैं, क्योंकि सकारात्मक आर्थिक विकास से कच्चे माल की मांग में बढ़ोतरी की संभावना दिखती है। इसके अलावा कच्चे माल का भारी निर्यात करने वाले देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी उछाल देखा जाता है। इसके उलट, जब अनिश्चितता हावी होती है और रिस्क-ऑफ की स्थिति बनती है, तो सुरक्षित सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ जाती है, सोने की चमक तेज होती है और अमेरिकी डॉलर, जापानी येन व स्विस फ्रैंक जैसी सुरक्षित संपत्तियों में भारी पूंजी प्रवाह होने लगता है।

विदेशी मुद्रा बाजार में कमोडिटी मुद्राओं की चाल

रिस्क-ऑन परिस्थितियों में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कनाडाई डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी उभरती मुद्राएं आम तौर पर मजबूत होती हैं। इन अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों और जिंसों के निर्यात पर निर्भर करती है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीद से निवेशक कच्चे माल की भविष्य की मांग को लेकर उत्साहित रहते हैं, जिससे इन मुद्राओं को स्वाभाविक सहारा मिलता है।

हालांकि वर्तमान तनाव के बीच विभिन्न करेंसी जोड़ों में मिला-जुला उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6950 के स्तर की ओर संभलता नजर आया। अहम अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल आंकड़ों से पहले डॉलर इंडेक्स में 17 महीने के उच्च स्तर से मुनाफावसूली देखी गई, जिससे डॉलर पर दबाव बना। दूसरी तरफ, वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में तेजी और लगातार बनी महंगाई के खतरों के बीच ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नीचे से सहारा दिया।

सुरक्षित निवेश वाले विकल्पों की स्थिति और अमेरिकी डॉलर का दबाव

गंभीर वैश्विक संकटों और रिस्क-ऑफ परिदृश्यों में जिन मुद्राओं की मांग सर्वाधिक होती है, उनमें अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) शीर्ष पर हैं। अमेरिकी डॉलर वैश्विक आरक्षित मुद्रा होने और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट न होने के भरोसे के कारण मजबूत रहता है, जहां संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों को तरजीह देते हैं। जापानी येन को उसके घरेलू निवेशकों के भारी समर्थन का लाभ मिलता है, जो उथल-पुथल के समय भी घरेलू सरकारी बॉन्ड से बाहर नहीं निकलते। वहीं स्विस फ्रैंक की मजबूती स्विट्जरलैंड के सख्त बैंकिंग नियमों और पूंजी संरक्षण के उच्च मानकों पर टिकी है।

वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के करीब नई दिशा तलाशने के लिए जूझता दिखा और साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर से पीछे हट गया। टोक्यो के मुद्रास्फीति आंकड़ों के अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर में व्यापक सुस्ती ने येन को थोड़ी राहत दी। सुरक्षित विकल्प के रूप में सोने की बात करें तो यह पेरोल आंकड़ों के बाद आई शुरुआती तेजी को 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार टिकाने में असमर्थ रहा और सप्ताहांत में लुढ़ककर 4,180 डॉलर के दायरे में आ गया। दूसरी ओर, यूरो बनाम डॉलर (EUR/USD) गिरकर 1.1312 के स्तर तक आ गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। जनवरी के अपने 1.2082 के शिखर से काफी नीचे फिसल चुके यूरो पर डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और महंगे ऊर्जा आयात का तिहरा दबाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

सवाल-जवाब

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का मुख्य रुख क्या है?
ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने की बातचीत में यह जलमार्ग मुख्य केंद्र है और इस्लामाबाद ज्ञापन पर आधारित उसकी सात शर्तें पूरी होने तक इसे नहीं खोला जाएगा।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रस्ताव पर क्या टिप्पणी की?
प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि अमेरिका का ताजा प्रस्ताव पुराने प्रस्तावों जैसा ही है और वाशिंगटन अभी भी परमाणु फाइल पर ही ध्यान केंद्रित कर रहा है।
वित्तीय बाजार में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ का क्या अर्थ है?
रिस्क-ऑन में निवेशक भविष्य के प्रति आश्वस्त होकर जोखिम भरी संपत्तियां खरीदते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ में डर के कारण सुरक्षित संपत्तियों जैसे बॉन्ड और सोने में पैसा लगाते हैं।
तनाव के बीच सोने और प्रमुख मुद्राओं का ताजा रुख क्या रहा?
सोना 4,200 डॉलर के पार नहीं टिक सका और 4,180 डॉलर के पास आ गया, जबकि यूरो गिरकर 1.1312 पर पहुंचा जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp