अमेरिकी रोजगार बाजार में अप्रत्याशित सुस्ती के आंकड़ों के बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चमक फीकी पड़ गई है। शुक्रवार को सोने की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह धातु 4,200 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर टिकने में पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई। दिन के शुरुआती कारोबार में एक्सएयू/यूएसडी (XAU/USD) 4,227 डॉलर के शिखर तक पहुंचने में कामयाब रहा था, लेकिन बाद में तीव्र बिकवाली के चलते भाव फिसलकर 4,138 डॉलर तक लुढ़क गए। बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने बिना ब्याज वाली इस परिसंपत्ति की बढ़त की संभावनाओं को सीधे तौर पर सीमित कर दिया है।
रोजगार के कमजोर आंकड़े और बेरोजगारी दर में वृद्धि
अमेरिकी श्रम विभाग के सितंबर महीने के गैर-कृषि पेरोल (एनएफपी) आंकड़े विश्लेषकों के अनुमानों से काफी कमजोर साबित हुए हैं। बाजार को 90 हजार नई नौकरियों के जुड़ने का अनुमान था, जबकि असल आंकड़ा महज 29 हजार पर सिमट गया। इतना ही नहीं, अगस्त महीने के आंकड़ों को भी संशोधित कर घटाते हुए 133 हजार कर दिया गया। इन कमजोर रोजगार आंकड़ों के चलते अमेरिका में बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह स्तर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 2026 और 2027 के लिए तय किए गए अनुमानों से 0.1 प्रतिशत अधिक है, हालांकि इस वृद्धि का एक बड़ा कारण श्रम बल भागीदारी दर में हुआ सुधार भी माना जा रहा है।
फेडरल रिजर्व की दरों पर बाजार का गणित और डॉलर का रुख
प्राइम टर्मिनल के अनुसार, इन आंकड़ों के बाद मुद्रा बाजारों में 28 अक्टूबर की आगामी बैठक में नीतिगत ब्याज दरों को जस का तस बनाए रखने की संभावना बढ़कर करीब 77 प्रतिशत हो गई है। वहीं 16 दिसंबर की बैठक तक ब्याज दरों में बदलाव न होने की संभावना बढ़कर 88 प्रतिशत के पार पहुंच गई है। इस बीच डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.14 प्रतिशत गिरकर 101.89 के स्तर पर आ गया। डॉलर में सुरक्षित निवेश के आकर्षण में कमी आने के बावजूद सोना अपनी बढ़त को बनाए रखने में विफल रहा, क्योंकि 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.29 प्रतिशत के करीब पहुंचना निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों की ओर खींच रहा है।
तकनीकी संकेत: मंदड़ियों के नियंत्रण में सोना
चार्ट पर 4,227 डॉलर की दैनिक ऊंचाई छूने के बाद 4,200 डॉलर के स्तर को निर्णायक रूप से पार न कर पाना आगे और बड़ी गिरावट का रास्ता खोलता दिख रहा है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे बना हुआ है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बाजार में बिकवाल हावी हैं। तकनीकी मोर्चे पर सोने के लिए पहला प्रमुख समर्थन 4,100 डॉलर का स्तर है। यदि मंदड़िए इस स्तर को तोड़ने में सफल रहते हैं, तो कीमतें 29 जुलाई के निचले स्तर 3,996 डॉलर की ओर खिसक सकती हैं, जबकि इसके बाद 17 जुलाई का निचला स्तर 3,959 डॉलर का होगा। दूसरी तरफ, तेजी लौटने के लिए खरीदारों को सबसे पहले 4,200 डॉलर का स्तर फिर से हासिल करना होगा, जिसके बाद ही 4,279 डॉलर पर स्थित 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) को चुनौती दी जा सकेगी। लाइव बाजार विश्लेषण के अनुसार, आरएसआई 14 की अवधि पर 34 पर है, जबकि एमएसीडी (MACD) -63.26 के स्तर पर बना हुआ है, जो बिकवाली के मजबूत दबाव की पुष्टि करता है।
मुद्रास्फीति के खिलाफ सुरक्षा कवच और केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी
ऐतिहासिक रूप से सोना मानव सभ्यता में मूल्य संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में अनिवार्य भूमिका निभाता आया है। आभूषणों के निर्माण के अलावा, इस कीमती धातु को वैश्विक उथल-पुथल के समय में एक अत्यंत सुरक्षित परिसंपत्ति माना जाता है। किसी विशिष्ट सरकार या जारीकर्ता पर निर्भर न होने के कारण इसे मुद्रास्फीति और अवमूल्यन के जोखिम के खिलाफ एक अचूक ढाल माना जाता है। केंद्रीय बैंक दुनिया में सोने के सबसे बड़े धारक हैं, जो अशांत समय में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता देने और विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीदते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडारों में रिकॉर्ड 1,136 टन सोना जोड़ा था, जिसका मूल्य लगभग 70 अरब डॉलर आंका गया था। यह इतिहास में दर्ज अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीदारी थी। वर्तमान में चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से इजाफा कर रहे हैं।
अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और जोखिम भरी संपत्तियों का गणित
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ सीधा विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना अधिक सस्ता हो जाता है, जिससे इसके भाव बढ़ते हैं। इसी प्रकार, शेयर बाजार में जोरदार तेजी आने पर सोने की मांग आमतौर पर घटती है, जबकि जोखिम भरी संपत्तियों में भारी बिकवाली की स्थिति में सोना चमक उठता है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, इसलिए बढ़ती ब्याज दरें और ऊंची बॉन्ड यील्ड इसकी लागत को बढ़ा देती हैं, जिससे इसके भाव गिरते हैं। डॉलर में कीमत तय होने (XAU/USD) के कारण डॉलर का उतार-चढ़ाव इसकी दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विदेशी मुद्रा बाजार और अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों का हाल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को अन्य संपत्तियों में भी तेज हलचल दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले (AUD/USD) एशियाई सत्र में 0.6950 के स्तर की ओर सुधरा, जिसे ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं से बल मिला। वहीं जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के स्तर के पास रुका रहा, जहां टोक्यो सीपीआई मुद्रास्फीति के गर्म आंकड़ों ने इसे समर्थन दिया। उधर यूरोपीय मुद्रा (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर 1.1312 पर आ गई, जो इसके जनवरी के उच्च स्तर 1.2082 से काफी नीचे है। यूरोप में ऊर्जा संकट और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने यूरो पर भारी दबाव डाला है। इसके विपरीत, क्रिप्टो बाजार में सुधार देखने को मिला, जहां बिटकॉइन 86,000 डॉलर के पार निकल गया, इथेरियम 2,700 डॉलर के ऊपर कारोबार करता दिखा और रिपल 1.54 डॉलर के करीब बना रहा। आने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की मिनट्स, आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और अमेरिकी ट्रेजरी की नीलामियों पर टिकी रहेंगी।


















