घरेलू वायदा बाजार में गुरुवार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ के मौके पर कीमती धातुओं में मिलाजुला कारोबार देखने को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में किसी तरह का फेरबदल न करने के निर्णय के बीच मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की कीमतों में मामूली तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी लगातार दबाव के दौर से गुजरती नजर आई। त्योहारी और वैवाहिक मांग के बीच जहां निवेशक पीली धातु की तरफ सतर्क रुख अपना रहे हैं, वहीं औद्योगिक सुस्ती की चिंताओं ने चांदी के भाव को नीचे धकेला है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सुबह 10:41 बजे 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाला सोने का अनुबंध 1,43,860 रुपये प्रति 10 ग्राम पर सौदे करता नजर आया। यह स्तर पिछले बंद भाव 1,43,705 रुपये की तुलना में 155 रुपये अथवा 0.11 प्रतिशत की बढ़त दिखाता है। सत्र की शुरुआत में यह अनुबंध 1,43,668 रुपये पर खुला था और इस दौरान कुल 894 लॉट के सौदे हुए। इस अनुबंध के साथ प्रदर्शित हाजिर भाव 75,340 रुपये दर्ज किया गया।
इसके विपरीत चांदी के वायदा भाव में बिकवाली का दबाव बना रहा। सुबह 10:46 बजे 4 दिसंबर की डिलीवरी वाली चांदी एमसीएक्स पर 1,93,679 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले सत्र के बंद 1,94,325 रुपये के मुकाबले 646 रुपये यानी 0.33 प्रतिशत कमजोर है। दिन की शुरुआत में चांदी 1,92,643 रुपये पर खुली थी और इस समयावधि में 959 अनुबंधों का कारोबार हुआ। इस दौरान चांदी की हाजिर कीमत 90,951 रुपये रही।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का असर
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का फैसला सुनाया। हाल के दिनों में सर्राफा कीमतों पर बने बिकवाली के दबाव के बाद इस निर्णय से सोने को तात्कालिक सहारा मिला। नीतिगत दरों को न बढ़ाने से वित्तीय परिस्थितियों में तुरंत किसी बड़े कड़ेपन का खतरा तो टल गया, लेकिन इससे बहुमूल्य धातुओं में किसी दीर्घकालिक और मजबूत सुधार की पूर्ण गारंटी नहीं मिलती।
सोने की आने वाले दिनों की चाल मुख्य रूप से अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में उतार-चढ़ाव, ट्रेजरी यील्ड और आगामी नीतिगत समीक्षाओं को लेकर बाजार के अनुमानों पर टिकी रहेगी। सोना किसी प्रकार की ब्याज आय नहीं देता, इसलिए जब भी बांड यील्ड या ब्याज दर बढ़ने की संभावना पैदा होती है, तब ब्याज देने वाले विकल्पों की तुलना में सोने का आकर्षण घटता है। फेडरल रिजर्व के रुख से ब्याज दरों में त्वरित बढ़ोतरी का डर फिलहाल शांत हुआ है।
चांदी की कमजोरी और औद्योगिक मांग
अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसले का जैसा सकारात्मक प्रभाव सोने पर दिखा, वैसा चांदी में नहीं देखा जा सका। दोनों धातुओं के स्वभाव में बुनियादी फर्क इस मूल्य अंतर का मुख्य कारण है। चांदी केवल एक निवेश धातु नहीं है, बल्कि सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों में इसका व्यापक औद्योगिक इस्तेमाल होता है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि और विनिर्माण गतिविधियों से जुड़े अनुमान चांदी की कीमतों को सीधे प्रभावित करते हैं, जिससे कई बार वित्तीय बाजारों की सुस्ती का असर इस पर भारी पड़ता है।
त्योहारी मांग और खुदरा बाजार के रेट
करवा चौथ के पावन अवसर पर भारतीय परिवारों में पारंपरिक तौर पर आभूषण, सिक्के और उपहार खरीदने की परंपरा है। भौतिक बाजार में आभूषणों के खुदरा भाव और एमसीएक्स के वायदा भाव में स्थानीय करों और मेकिंग चार्ज के कारण अंतर देखने को मिलता है। खुदरा बाजार में विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दाम इस प्रकार दर्ज किए गए
- 24 कैरेट सोना: 14,395 रुपये प्रति ग्राम, 1,43,950 रुपये प्रति 10 ग्राम और 14,39,500 रुपये प्रति 100 ग्राम।
- 22 कैरेट सोना: 13,195 रुपये प्रति ग्राम, 1,31,950 रुपये प्रति 10 ग्राम और 13,19,500 रुपये प्रति 100 ग्राम।
- 18 कैरेट सोना: 10,796 रुपये प्रति ग्राम, 1,07,960 रुपये प्रति 10 ग्राम और 10,79,600 रुपये प्रति 100 ग्राम।
भौतिक चांदी के खुदरा भाव में भी नरमी का रुख जारी रहा। खुदरा स्तर पर चांदी 215 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर बिकी, जबकि इससे ठीक एक दिन पहले इसका भाव 220 रुपये प्रति ग्राम था। इस प्रकार खुदरा चांदी में 5 रुपये प्रति ग्राम की सीधी कमी देखी गई। त्योहारों के मौसम में चांदी के बर्तन, सिक्के और आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह गिरावट कुछ राहत लेकर आई है। हालांकि अलग-अलग शहरों और स्थानीय जौहरियों के मेकिंग चार्ज के अनुसार खुदरा दरों में थोड़ा बहुत अंतर संभव है।
तकनीकी विश्लेषण और बाजार परिदृश्य
कमोडिटी विश्लेषक धातु बाजार के तकनीकी ढांचे पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। चॉइस ब्रोकिंग में कमोडिटी टेक्निकल एनालिस्ट कावेरी मोरे का कहना है कि डॉलर की मजबूती निकट भविष्य में सोने पर दबाव डाल सकती है, लेकिन नीतियों में संभावित नरमी बाजार में सुधार का रास्ता बना सकती है।
कावेरी मोरे के अनुसार, मौजूदा दबाव के बीच कीमतों को सहारा देने के लिए 1,93,000 से 1,91,600 रुपये का दायरा एक महत्वपूर्ण इंट्राडे सपोर्ट के रूप में काम करेगा। इसके अतिरिक्त सोना-चांदी अनुपात वर्तमान में 74.8:1 के स्तर पर पहुंच गया है, जो साफ तौर पर दिखाता है कि तुलनात्मक आधार पर सोना अभी भी चांदी से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।


















