अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है और इसका भाव फिसलकर 4,050 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है। हालिया सत्र में हाजिर सोना 4,046.32 डॉलर के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। ऊर्जा बाजार में अचानक आई तेजी और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले सर्राफा बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनियाभर में महंगाई दोबारा भड़कने की आशंकाओं को हवा दे दी है, जिसके चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया है और अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली है। बिना ब्याज या यील्ड वाले सुरक्षित निवेश के तौर पर पहचाने जाने वाले सोने के लिए यह व्यापक आर्थिक परिदृश्य प्रतिकूल साबित हो रहा है।
कच्चे तेल में तेजी और मध्य पूर्व में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव
ऊर्जा बाजार में अचानक आई इस तेजी के पीछे मध्य पूर्व में गहराता भू-राजनीतिक संकट मुख्य वजह बना है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर मिसाइल से हमला करने का दावा किया। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने 5,50,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली इस रिफाइनरी पर हुए हमले की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन विश्व के दूसरे सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादक देश पर हमलों की गंभीरता ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर जोखिम पैदा कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत दो दिन के निचले स्तर 98.83 डॉलर से संभलकर करीब 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 100.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई।
कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर से ऊपर का यह उछाल दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का सबब बन गया है। जब भी ऊर्जा की लागत में बढ़ोतरी होती है, विनिर्माण, परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की उत्पादन लागत सीधे तौर पर बढ़ जाती है। इसका सीधा असर वैश्विक महंगाई पर पड़ता है। नीति निर्माताओं के लिए यह स्थिति बेहद असहज होती है क्योंकि केंद्रीय बैंकों को उम्मीद से अधिक समय तक अपनी सख्त और आक्रामक मौद्रिक नीति को जारी रखने के लिए विवश होना पड़ता है। लंबी अवधि तक ऊंची ब्याज दरों का बना रहना सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों के लिए नकारात्मक माना जाता है क्योंकि निवेशक निश्चित रिटर्न देने वाले बॉन्ड या नकदी विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत के पार और मजबूत होता डॉलर
ऊर्जा संकट से उपजी महंगाई की आशंकाओं का सीधा असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर देखा गया है, जहां अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड एक बार फिर 5 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के ऊपर निकल गई है। यील्ड में इस इजाफे को फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले निवेशकों की सतर्कता से भी अतिरिक्त समर्थन मिला है। जब सरकारी प्रतिभूतियों पर जोखिम मुक्त प्रतिफल 5 प्रतिशत से ऊपर मिलने लगता है, तो संस्थागत और खुदरा निवेशकों के बीच सोने को अपने पोर्टफोलियो में रखने की अवसर लागत काफी बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप बुलियन में बिकवाली का दबाव गहराता है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर में भी उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की जा रही है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य का आकलन करने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.40 के करीब बना हुआ है और लगातार तीन दिनों की बढ़त को बरकरार रखे हुए है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सोने का मूल्य निर्धारण अमेरिकी डॉलर में होता है, जिसे एक्सएयू/यूएसडी कहा जाता है। तकनीकी और व्यावहारिक दृष्टि से, जब डॉलर मजबूत होता है, तो गैर-अमेरिकी मुद्रा धारकों के लिए सोना खरीदना काफी महंगा हो जाता है। मुद्रा की यह मजबूती सोने की मांग को सीमित करती है और निवेशकों के लिए इसमें रिस्क-रिवॉर्ड का समीकरण प्रतिकूल बना देती है।
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का परिदृश्य
बाजार की सभी निगाहें अब अमेरिकी समयानुसार 18:00 जीएमटी पर होने वाली फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति घोषणा पर टिकी हैं। वित्तीय बाजार में सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि केंद्रीय बैंक द्वारा बेंचमार्क ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में अपरिवर्तित रखे जाने की लगभग पूरी संभावना है। इससे पहले सितंबर की बैठक में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी और वर्ष के शेष महीनों में कम से कम एक और वृद्धि का स्पष्ट संकेत दिया था।
ब्याज दरों के मौजूदा स्तर और भविष्य के रुख को लेकर नीति निर्धारकों का बयान बाजार की दिशा तय करेगा। यदि फेडरल रिजर्व ऊर्जा कीमतों में तेजी को आधार बनाकर भविष्य में और दर वृद्धि या दरों को लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनाए रखने का संकेत देता है, तो डॉलर में और तेजी आ सकती है। इसके विपरीत, यदि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था की गति धीमी होने को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाता है, तो सोने को निचले स्तरों पर कुछ सहारा मिल सकता है। फिलहाल नीतिगत अनिश्चितता के कारण बाजार में तीव्र उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है।
तकनीकी विश्लेषण: 20-दिवसीय ईएमए से नीचे बना दबाव
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो एक्सएयू/यूएसडी 4,046.32 डॉलर पर कारोबार कर रहा है और इसका अल्पकालिक रुझान मंदड़ियों के पक्ष में दिखाई दे रहा है। सोना अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है, जो लगभग 4,121.59 डॉलर पर स्थित है। इस गतिशील बाधा को पार करने में असमर्थता यह दर्शाती है कि बाजार में हर उछाल पर बिकवाली हावी हो रही है। इस बीच, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 39 के आसपास मंडरा रहा है। आरएसआई का यह स्तर कमजोर गति को दर्शाता है, हालांकि यह अत्यधिक बिकवाली वाली स्थिति नहीं है जहां से तत्काल तेज तकनीकी सुधार की उम्मीद की जा सके।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का मौजूदा भाव 4,049 डॉलर पर है, जो पिछले बंद भाव 4,075 डॉलर से 0.62 प्रतिशत नीचे है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच है। तकनीकी संकेतकों में आरएसआई 37 पर है और एमएसीडी -65.04 पर सिग्नल लाइन -61.24 से नीचे बना हुआ है, जिसका हिस्टोग्राम -3.80 के साथ मंदी का रुख दर्शा रहा है। मूविंग एवरेज में ईएमए20 4,141 डॉलर, ईएमए50 4,231 डॉलर और ईएमए200 4,420 डॉलर पर है, जबकि एसएमए50 4,318 डॉलर और एसएमए200 4,526 डॉलर पर स्थित है। लंबी अवधि के चार्ट पर 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच डेथ क्रॉस बना हुआ है।
ऊपर की ओर, शुरुआती प्रतिरोध 20-दिवसीय ईएमए 4,121.59 डॉलर पर परिभाषित है, और गिरावट के दबाव को कम करने तथा एक स्थायी सुधार चरण का संकेत देने के लिए इस स्तर से ऊपर दैनिक क्लोजिंग आवश्यक होगी। प्रमुख ट्रेडिंग स्तरों में धुरी बिंदु 4,061 डॉलर पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध आर1 4,073 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध आर2 4,096 डॉलर पर आंका गया है। नीचे की तरफ पहला समर्थन एस1 4,037 डॉलर और दूसरा समर्थन एस2 4,025 डॉलर पर है, जबकि 20-दिवसीय दायरा 3,989 डॉलर के आसपास समर्थन दिखाता है। जब तक खरीदार 4,120 डॉलर के क्षेत्र के ऊपर नियंत्रण हासिल नहीं कर लेते, तब तक इसमें और गिरावट का जोखिम बना रहेगा।
मूल्य संचय और केंद्रीय बैंकों की स्वर्ण खरीद
मानव इतिहास में सोने ने हमेशा मूल्य के संचय और विनिमय के माध्यम के रूप में एक मौलिक भूमिका निभाई है। आभूषणों के निर्माण और इसकी प्राकृतिक चमक के अलावा, आधुनिक वित्तीय व्यवस्था में इस कीमती धातु को एक प्रमुख सुरक्षित निवेश साधन के रूप में देखा जाता है। अशांत आर्थिक और भू-राजनीतिक समय में इसे पूंजी संरक्षण का सर्वोत्तम साधन माना जाता है। चूंकि सोना किसी विशिष्ट सरकार, केंद्रीय बैंक या जारीकर्ता की देनदारी पर निर्भर नहीं होता, इसलिए इसे मुद्रा के अवमूल्यन और अनियंत्रित मुद्रास्फीति के खिलाफ एक मजबूत बचाव माना जाता है।
विश्व स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक संकट या अशांत दौर में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं और सोने की बड़े पैमाने पर खरीद करते हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय साख और शोधन क्षमता के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा बढ़ाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में लगभग 70 अरब डॉलर मूल्य का 1,136 टन सोना जोड़ा था, जो रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक खरीद है। विशेष रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार में तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
वित्तीय परिसंपत्तियों के बीच अंतर्संबंध और व्यापक बाजार हलचल
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के साथ ऐतिहासिक रूप से विपरीत संबंध रहा है। ये दोनों ही प्रमुख वैश्विक आरक्षित और सुरक्षित संपत्तियां हैं। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोने में चमक लौटती है, जिससे निवेशकों को अपने जोखिम में विविधता लाने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही, सोने का जोखिम वाली संपत्तियों जैसे शेयर बाजार के साथ भी विपरीत संबंध देखा जाता है। जब इक्विटी बाजारों में जोरदार तेजी होती है, तो निवेशक सोने से पूंजी निकालकर शेयरों में लगाते हैं, जिससे सोने की कीमतें नरम पड़ती हैं। इसके विपरीत, शेयर बाजारों में बड़ी बिकवाली होने पर सोना सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर चमकता है।
विदेशी मुद्रा और वित्तीय बाजारों के अन्य वर्गों में भी आज हलचल देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे दिन बढ़त बनाते हुए एशियाई सत्र में 23 सितंबर के बाद के अपने नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलिया में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के मजबूत आंकड़ों ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों को बल दिया है। वहीं दूसरी ओर, डॉलर के मुकाबले जापानी येन में नरमी देखी जा रही है और यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी लगातार तीसरे दिन चढ़कर दो सप्ताह के उच्च स्तर की ओर बढ़ी है, क्योंकि बैंक ऑफ़ जापान द्वारा आक्रामक दर वृद्धि टालने के कयास लगाए जा रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी आज मजबूती देखने को मिली है, जहां बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल ने अपनी बढ़त का दायरा बढ़ाया है। डिजिटल एसेट निवेशक प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर नजर बनाए हुए हैं। माइक्रोसॉफ्ट और अल्फाबेट बुधवार को अपनी तीसरी तिमाही की कमाई के नतीजे जारी करने जा रही हैं, जबकि अमेजन के नतीजे गुरुवार को आने वाले हैं। विभिन्न वित्तीय साधनों में यह हलचल दर्शाती है कि आगामी कुछ सत्र वैश्विक निवेशकों के लिए व्यापक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
























