वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति की अनिश्चितता और मध्य पूर्व के रणनीतिक समुद्री मार्गों में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को एक बार फिर उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास लगातार बनते दबाव और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रिपोर्टों की कमी के बीच अब निवेशकों का पूरा ध्यान वैश्विक तेल इन्वेंट्री के घटते आंकड़ों पर टिक गया है। दुनिया भर में शोधित ईंधन, विशेषकर डीजल के गिरते स्टॉक ने ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच, अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा वित्तीय प्रणाली में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए उठाए गए अप्रत्याशित कदमों ने विदेशी मुद्रा बाजारों, कीमती धातुओं और क्रिप्टो एसेट्स में व्यापक हलचल पैदा कर दी है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का तनाव और वैश्विक तेल भंडार का संकट
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास के घटनाक्रम तेल कीमतों को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ईरान से होने वाले कच्चे तेल के निर्यात पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का गंभीर असर पड़ा है, जिससे बाजार में आपूर्ति की स्थिति पहले ही कठिन बनी हुई थी। अब आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक सख्ती आने का जोखिम मंडरा रहा है। इस भौगोलिक स्थिति का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव बीते एक महीने के दौरान लगभग 20 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।
इन्वेंट्री के मोर्चे पर स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण दिख रही है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के नवीनतम आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि जुलाई के अंत में वैश्विक तेल भंडार घटकर 7.9 अरब बैरल से नीचे चला गया है। यह आंकड़ा अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी सर्दियों के मौसम यानी हीटिंग सीजन की शुरुआत से पहले भंडार में यह गिरावट जारी रहती है, तो ईंधन की कीमतें और अधिक ऊंचाई पर पहुंच सकती हैं। मध्य पूर्व के एक बड़े निर्यातक के रूप में लंबे समय तक बाजार से बाहर रहने और रूस में रिफाइनरी थ्रूपुट में बढ़ोतरी न होने के कारण यह संकट और गहरा सकता है।
यूरोपीय गैस बाजार और रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर दबाव
कच्चे तेल के साथ-साथ यूरोपीय प्राकृतिक गैस बाजार भी भारी दबाव का सामना कर रहा है। यूरोपीय गैस बाजारों में आपूर्ति की सुस्त गति को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यदि गैस इन्वेंट्री का स्तर धीमी गति से भी बढ़ता है, तो भी कीमतें लगातार ऊपर जा सकती हैं। इसके अलावा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से डीजल की वैश्विक आपूर्ति काफी तंग बनी हुई है। यदि डीजल के स्टॉक में आगे और गिरावट दर्ज की जाती है, तो शोधित ईंधन उत्पादों के दाम बाजार में नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा कदम और लिक्विडिटी सपोर्ट
बुधवार को 12:32 GMT पर अमेरिकी वित्त विभाग (ट्रेजरी डिपार्टमेन्ट) ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा ऐलान किया। अमेरिकी ट्रेजरी ने दीर्घकालिक बॉन्ड खरीद के जरिए वित्तीय बाजार में लिक्विडिटी सपोर्ट बढ़ाने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष वाले मैच्योरिटी सेक्टरों में लिक्विडिटी सहायता का दायरा दोगुना कर दिया गया है। पहले जहां प्रति ऑपरेशन अधिकतम 2 अरब डॉलर की सीमा तय थी, उसे बढ़ाकर अब कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नया नियम 9 सितंबर से लागू होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। ट्रेजरी के इस कदम से अमेरिकी डॉलर सूचकांक पर दबाव देखने को मिला है, जिससे अन्य संपत्तियों को संबल मिला है।
विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल और आगामी PMI आंकड़े
अमेरिकी डॉलर में आई नरमी और ब्रिटेन के मजबूत आर्थिक आंकड़ों के दम पर विदेशी मुद्रा बाजार में व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) ने ब्रिटेन के अनुकूल PMI आंकड़ों के दम पर फरवरी के बाद के अपने उच्चतम स्तर 1.3670 को छुआ, हालांकि बाद में मुनाफावसूली के चलते यह थोड़ा सुधरकर 1.3650 के नीचे कारोबार करने लगा। दूसरी ओर, यूरो (EUR/USD) यूरोपीय सत्र में बढ़त बनाने के बाद थोड़ा गिरकर 1.1700 के स्तर से नीचे आ गया। जर्मनी और संपूर्ण यूरोज़ोन से आए मिले-जुले PMI आंकड़ों के बावजूद डॉलर की कमजोरी ने यूरो को निचले स्तरों पर टिकने में मदद की।
अब बाजार की नजरें एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) द्वारा जारी किए जाने वाले अगस्त महीने के अमेरिकी Purchasing Managers' Indices (PMI) के प्रारंभिक आंकड़ों पर टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त में अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों में मामूली सुस्ती आ सकती है। मैन्युफैक्चरिंग PMI जुलाई के 53.9 से गिरकर 53.8 रहने की उम्मीद है, जबकि सर्विसेज PMI जुलाई के 54.6 के मुकाबले घटकर 54.0 रहने का अनुमान जताया गया है।
सोने में तेजी का रुझान और क्रिप्टो बाजार का उछाल
अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लिक्विडिटी बढ़ाने की घोषणा के बाद डॉलर में आई कमजोरी का सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला है। सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है और बुलियंस पिछले छह महीनों के अपने उच्चतम रेजिस्टेंस स्तर 4,600 डॉलर प्रति औंस को दोबारा परखने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग में जोरदार इजाफा हुआ है।
डिजिटल एसेट मार्केट में भी तेजी का रुख बना हुआ है। बिटकॉइन (BTC) 77,000 डॉलर के स्तर को पार कर नए शिखर पर पहुंच गया है, जिसके नेतृत्व में क्रिप्टो बाजार में काफी मजबूती देखी जा रही है। अन्य प्रमुख ऑल्टकॉइन्स भी इस तेजी में कदम मिलाकर चल रहे हैं। एथेरियम (ETH) 2,400 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है, जबकि रिपल (XRP) 1.35 डॉलर के आसपास स्थिर बना हुआ है। बाजारों में लिक्विडिटी बढ़ने की उम्मीद से निवेशक जोखिम भरी संपत्तियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।



















