अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूती हासिल कर रहा है और डॉलर इंडेक्स (DXY) नए चक्रीय उच्च स्तरों को छू रहा है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में जारी लचीलापन, श्रम बाजार से मांग में सुधार और केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर टिकी महंगाई इस उछाल को आधार दे रही है। बाजार विश्लेषक अगले बारह महीनों के भीतर फेडरल रिजर्व फंड्स दर में लगभग 100 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी की संभावना को अपनी कीमतों में शामिल कर रहे हैं। इस चौतरफा तेजी ने प्रमुख वैश्विक मुद्राओं जैसे यूरो, जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के साथ-साथ सोने जैसी बहुमूल्य धातुओं को भी पीछे धकेल दिया है।
मजबूत घरेलू मांग और जीडीपी अनुमानों से मिला सहारा
अमेरिकी विकास परिदृश्य को हालिया आर्थिक आंकड़ों से गहरा समर्थन मिला है। दूसरी तिमाही (Q2) के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के तीसरे और अंतिम अनुमान को 0.7 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 2.2 प्रतिशत मौसमी रूप से समायोजित वार्षिक दर (SAAR) कर दिया गया। यह तेज संशोधन मुख्य रूप से घरेलू मांग गतिविधियों में हुई बढ़ोतरी को दर्शाता है।
इसके अलावा, आने वाली तिमाहियों के लिए भी आर्थिक परिदृश्य काफी उत्साहजनक बना हुआ है। अटलांटा फेड का GDPNow मॉडल मजबूत उपभोक्ता खर्च के दम पर तीसरी तिमाही में 3.7 प्रतिशत की वार्षिक वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगा रहा है। अगस्त के महीने में वास्तविक व्यक्तिगत उपभोग में माह-दर-माह आधार पर 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा केवल 0.1 प्रतिशत रहा था। व्यक्तिगत खर्च में आया यह उछाल दर्शाता है कि अमेरिकी उपभोक्ता ऊंचे उधारी खर्च के बावजूद बाजार में सक्रिय बने हुए हैं।
मुद्रास्फीति का दबाव और केंद्रीय बैंक का रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के दो प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य के मुकाबले मुद्रास्फीति अभी भी असहज रूप से ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मूल्य सूचकांक के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि हेडलाइन PCE वार्षिक आधार पर 3.4 प्रतिशत पर रहा। यह जुलाई के 3.4 प्रतिशत के बराबर है, जिसे पहले 3.7 प्रतिशत से संशोधित कर घटाया गया था।
वहीं, कोर PCE मुद्रास्फीति वार्षिक आधार पर 3.0 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो जुलाई के 3.0 प्रतिशत के समान है (जुलाई के आंकड़े को पहले 3.3 प्रतिशत से घटाकर संशोधित किया गया था)। हालांकि नरम PCE आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की तात्कालिक आशंकाओं को कुछ हद तक शांत किया, लेकिन कच्चे तेल की वजह से पैदा हुए मुद्रास्फीति के जोखिमों ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों (बॉन्ड यील्ड) को कई वर्षों के उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है। यही ऊंची बॉन्ड यील्ड डॉलर की मजबूती का मुख्य इंजन साबित हो रही है।
एशियाई सत्र में जापानी येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति
गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई (USD/JPY) 158.00 के स्तर से ऊपर अपनी साप्ताहिक सीमा के ऊपरी छोर पर कारोबार करता दिखा। यद्यपि बैंक ऑफ जापान (BoJ) के सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीदें और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप की आशंकाएं मौजूद हैं, लेकिन अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती इन सभी जोखिमों पर भारी पड़ रही है। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की मांग को और बढ़ा रहा है।
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) दो महीने के निचले स्तर के करीब स्थिर रहा और गुरुवार को एशियाई सत्र में 0.6900 के मध्य स्तर के आसपास ट्रेड करता नजर आया। अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD495M) रह गया, हालांकि इस आंकड़े का ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर सीमित प्रभाव देखा गया। डॉलर की बढ़त के चलते इस मुद्रा जोड़ी में दबाव बना हुआ है।
रिकॉर्ड स्तरों से फिसला यूरो, 1.1312 पर पहुंचा
यूरोपीय मुद्रा यूरो पर भी अमेरिकी डॉलर के दबदबे का सीधा असर पड़ा है। यूरो/यूएसडी (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी में दर्ज किए गए इसके 1.2082 के उच्चतम स्तर से काफी नीचे है।
यूरो में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की भारी ताकत, वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से यूरोप को होने वाले नुकसान की चिंताएं शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यूरोज़ोन में आने वाला महंगाई का कोई नया झटका यूरो को अप्रत्याशित राहत दे सकता है, लेकिन फिलहाल तकनीकी और बुनियादी दोनों मोर्चों पर डॉलर का पलड़ा भारी है।
सोने और डिजिटल संपत्तियों पर पड़ा असर
सोने के खरीदार भी डॉलर के आक्रामक रुख के आगे बेबस नजर आए। यूरोपीय सत्र के पहले भाग में सोना 4,200 डॉलर के आसपास मामूली बढ़त बनाने में तो सफल रहा, लेकिन उस स्तर पर टिकने में नाकाम रहा और दिन भर लगभग बिना किसी बदलाव के कारोबार करता रहा। बुधवार को आए नरम मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बावजूद डॉलर की जोरदार खरीदारी जारी रही। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के कई वर्षों के नए उच्च स्तर छूने से बिना ब्याज देने वाले सोने (non-yielding bullion) की मांग कमजोर बनी हुई है।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में, हाइपरलिक्विड (HYPE) में गुरुवार को 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त घट गई। बुधवार को 50 लाख डॉलर (5 मिलियन डॉलर) के बहिर्वाह के साथ संस्थागत निवेशकों की मांग घटती दिखी, जिसने अल्पकालिक निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। तकनीकी दृष्टि से HYPE का दृष्टिकोण मिला-जुला बना हुआ है क्योंकि इसकी कीमत 90 डॉलर के नीचे सीमित है। कुल मिलाकर, वैश्विक वित्तीय बाजारों पर अमेरिकी डॉलर का वर्चस्व पूरी तरह कायम नजर आ रहा है।


















