अमेरिकी मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर मिनियापोलिस फेडरल रिजर्व के प्रेसिडेंट नील काशकारी ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी का सिलसिला बरकरार रहता है, तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के विभिन्न हिस्सों पर अलग-अलग तरह का गंभीर दबाव डालेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि व्यापक अर्थव्यवस्था की मजबूती लगातार चौंकाने वाली रही है, जिससे मौजूदा नीतिगत सख्ती को तुरंत ढीला करने की गुंजाइश सीमित दिखती है।
अर्थव्यवस्था की मजबूती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर
नील काशकारी ने वर्तमान आर्थिक माहौल का विश्लेषण करते हुए बताया कि समग्र उपभोक्ता खर्च बेहद मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा श्रम बाजार भी किसी एक तकनीकी क्षेत्र तक सीमित न रहकर पूरे दायरे में स्वस्थ नजर आ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि मौजूदा समय में मजदूरी और कीमतों में एक साथ अनियंत्रित उछाल यानी वेज-प्राइस स्पाइरल की स्थिति स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं है। साथ ही अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए रोजगार बाजार को किसी गंभीर संकट में धकेलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़े निवेश के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि तकनीक उम्मीद के मुताबिक उत्पादकता देती है, तो इससे जुड़ा पूंजीगत निवेश चक्र काफी लंबे समय तक जारी रह सकता है। यह स्थिति कई सेक्टर्स में नई पूंजी और मांग पैदा कर रही है, जिससे अर्थव्यवस्था का लचीलापन बरकरार है।
हाउसिंग सेक्टर पर दबाव और बॉन्ड यील्ड का बड़ा अंतर
नील काशकारी ने माना कि हर क्षेत्र इस मजबूती का समान फायदा नहीं उठा पा रहा है। उनके अनुसार, आवास निर्माण और रियल एस्टेट से जुड़े तमाम क्षेत्रों पर इस वक्त सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। उधारी की ऊंची लागत के चलते हाउसिंग सेक्टर से जुड़ी गतिविधियों पर गंभीर मंदी जैसा असर दिखाई दे रहा है।
वित्तीय बाजारों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने 2-वर्षीय यील्ड और अल्पावधि दरों के बीच मौजूद एक बड़े अंतर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब भी वित्तीय बाजारों का कोई स्पष्ट दृष्टिकोण बनता है, तो वे उसे खुलकर व्यक्त करने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाते। मिनियापोलिस जिले के स्थानीय स्तर पर बात करें तो वहां डीजल की कीमतें और ट्रक चालकों की उपलब्धता सबसे प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं, जिससे साबित होता है कि जमीनी स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं ब्याज दरों से अधिक हावी हैं। काशकारी ने यह भी जोड़ा कि चेयर केविन वॉर्श के नेतृत्व में एफओएमसी का आंतरिक माहौल उल्लेखनीय रूप से सुसंगत रहा है।
फेडरल रिजर्व की नीतियां: दरें, क्यूई और क्यूटी का ढांचा
संयुक्त राज्य अमेरिका में मौद्रिक नीति तय करने की मुख्य जिम्मेदारी फेडरल रिजर्व की होती है, जिसके दो प्रमुख अधिदेश हैं: कीमतों में स्थिरता लाना और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना। मुद्रास्फीति जब 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में इजाफा करता है। इस प्रक्रिया से समूची अर्थव्यवस्था में उधारी की लागत बढ़ जाती है, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय निवेशक पूंजी लगाने के लिए अमेरिका की ओर आकर्षित होते हैं और अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2 प्रतिशत से नीचे गिरती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से बढ़ जाती है, तब कर्ज लेने को बढ़ावा देने के लिए दरों में कटौती की जाती है, जो डॉलर को कमजोर करती है।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी साल भर में कुल आठ नीतिगत बैठकें आयोजित करती है। इस समिति में 12 अधिकारी शामिल होते हैं, जिनमें बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट और बाकी ग्यारह क्षेत्रीय बैंकों में से बारी-बारी से एक साल के लिए चुने जाने वाले चार प्रेसिडेंट वोटिंग करते हैं। असाधारण संकट के समय केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी क्यूई का सहारा लेता है, जैसा कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट में हुआ था। इसके तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदकर वित्तीय तंत्र में नकदी झोंकता है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी क्यूटी के अंतर्गत फेड बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और मैच्योर होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का पुनर्निवेश रोक देता है, जो अमेरिकी डॉलर की मजबूती के लिए सकारात्मक माना जाता है।
वैश्विक मुद्रा बाजार, सोना और क्रिप्टो संपत्तियों का हाल
अमेरिकी डॉलर में जारी मजबूती के चलते वैश्विक बाजारों में कई अहम संपत्तियों पर दबाव दिखाई दिया है। एशियाई कारोबार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6900 के मध्य स्तर पर कारोबार करता हुआ दो महीने के निचले स्तर के करीब सुस्त रहा। अमेरिका में पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने अक्टूबर में फेड द्वारा संभावित दर वृद्धि के अनुमानों को कुछ हद तक शांत किया, लेकिन कच्चे तेल से जुड़े महंगाई के डर ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को ऊपर बनाए रखा। इसी दौरान अगस्त में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से घटकर 495 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रह गया।
दूसरी ओर, डॉलर-येन की जोड़ी 158.00 के पार अपने साप्ताहिक दायरे के उच्चतम स्तर पर टिकी रही। बैंक ऑफ जापान की आक्रामक नीतिगत उम्मीदों और टोक्यो के संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद डॉलर की व्यापक तेजी जापानी मुद्रा पर भारी पड़ी। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त सहारा दिया है।
सोने के बाजार में भी मंदी का रुख दिखा, जहां पीली धातु यूरोपीय सत्र के शुरुआती हिस्से में 4,200 डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच कर लगभग बिना किसी बदलाव के सपाट संघर्ष करती नजर आई। बुधवार को अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों में नरमी के बावजूद ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग को सीमित कर दिया। क्रिप्टो बाजार में हाइपरलिक्विड यानी HYPE गुरुवार को 2 प्रतिशत टूटकर पिछले दिन की अपनी 5 प्रतिशत की बढ़त को गंवाता दिखा, क्योंकि संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 5 मिलियन डॉलर की शुद्ध निकासी की थी और इसका भाव 90 डॉलर के नीचे अटका हुआ है। वहीं यूरो-डॉलर गिरकर 1.1312 पर आ गया, जो मई 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है और जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है, जिसे केवल यूरोज़ोन में संभावित नए महंगाई झटके से ही कुछ सहारा मिलने की उम्मीद की जा रही है।



















