कम उम्र में ही दिल, लिवर, गुर्दे और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक हर चार में से एक वयस्क व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का शिकार है, जबकि हर पांच में से एक वयस्क डायबिटीज से पीड़ित है। इन जानलेवा और दीर्घकालिक समस्याओं के पीछे सबसे बड़ी वजह असंतुलित जीवनशैली और बिगड़ा हुआ खान-पान बन चुका है। रोजमर्रा के भोजन में पिज्जा, बर्गर, मोमोज, चिप्स, कुरकुरे, पेस्ट्री और केक जैसे जंक फूड के साथ-साथ कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, शराब, गुटखा, तंबाकू, सिगरेट और डिब्बाबंद प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की घुसपैठ बढ़ चुकी है। ये फास्ट फूड शरीर के आंतरिक तंत्र को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे नाजुक दौर में हर व्यक्ति के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि खुद को हमेशा तंदुरुस्त और सेहतमंद बनाए रखने के लिए दैनिक खुराक में क्या शामिल करना चाहिए। हालांकि दुनिया में कोई भी इस बात की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं दे सकता कि व्यक्ति कभी बीमार नहीं पड़ेगा, परंतु अस्वस्थ भोजन बीमारियों को न्योता देने में सबसे बड़ा कारक सिद्ध होता है। इसी संदर्भ में वरिष्ठ डॉक्टर ओंकार स्वामी ने एक आदर्श और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित थाली का वैज्ञानिक खाका प्रस्तुत किया है।
संतुलित पोषण का असली पैमाना और नाश्ते की सही शुरुआत
वरिष्ठ डॉक्टर ओंकार स्वामी के अनुसार निरोगी काया पाने के लिए केवल पेट भरना काफी नहीं है, बल्कि पौष्टिक और सुव्यवस्थित आहार लेना अनिवार्य है। संतुलित भोजन का सीधा तात्पर्य यह है कि आपके हर निवाले में प्रोटीन, विटामिन, जरूरी फैट, कार्बोहाइड्रेट, मिनरल्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का सही तालमेल मौजूद रहे। मानव शरीर के सुचारू संचालन के लिए इन सभी पोषक तत्वों की एक साथ दरकार होती है। चूंकि प्रकृति में ऐसा कोई एकल खाद्य पदार्थ मौजूद नहीं है जिसमें ये सभी तत्व अकेले पाए जाएं, इसलिए थाली में विविध प्रकार के भोज्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी हो जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि जब भी आप खाने बैठें, आपकी थाली में अलग-अलग पोषक गुणों वाले व्यंजन एक साथ सजे हों। दिन की शुरुआत में किए जाने वाले नाश्ते से ही इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। सुबह के पहले भोजन में आप अंकुरित चना और मूंग को स्वादिष्ट तरीके से तैयार कर खा सकते हैं। इसके साथ ही उबला अंडा और ताजा दूध अपनी डाइट में जोड़ना बेहतरीन विकल्प है। सुबह जो भी खाया जाए, वह पोषण से भरपूर होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार पनीर, गाढ़ी दाल, ताजा दही और अंडा सुबह के नाश्ते के लिए सबसे मुफीद माने जाते हैं।
आधी थाली में फल और हरी सब्जियों का होना क्यों अनिवार्य
डॉक्टर ओंकार स्वामी का कहना है कि अपनी थाली को संपूर्ण और गुणकारी बनाने का सबसे सहज और सीधा तरीका यह है कि प्लेट के पूरे आधे हिस्से को ताजे फल और हरी पत्तेदार सब्जियों से भर दिया जाए। ऐसा करने से शरीर को भरपूर मात्रा में जरूरी विटामिन्स, मिनरल्स, घुलनशील फाइबर और ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट्स बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के मिल जाते हैं। पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स मिलने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी कई गुना मजबूत हो जाती है, जिससे बाहरी संक्रमणों और मौसमी बीमारियों से लड़ने में शरीर को प्राकृतिक सुरक्षा कवच मिलता है। इसके अतिरिक्त सब्जियों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। जब पाचन तंत्र सुचारू काम करता है, तो पेट और आंतों से जुड़ी अनेक व्याधियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं। फल और हरी सब्जियां शरीर में सूजन घटाकर क्रोनिक बीमारियों के गंभीर खतरे को टालने में मदद करती हैं। डॉक्टर की सलाह है कि हर व्यक्ति को पूरे दिन के दौरान कम से कम पांच अलग-अलग रंगों वाले रंग-बिरंगे फल और हरी सब्जियां अपनी नियमित थाली में शामिल करने की भरसक कोशिश करनी चाहिए।
एक चौथाई हिस्से में साबुत और मोटे अनाज का महत्व
पोषण के नियम के अनुसार भोजन की थाली का एक चौथाई हिस्सा साबुत अनाज या फिर मोटे अनाज के लिए आरक्षित होना चाहिए, क्योंकि इसे ही सबसे संतुलित और आदर्श स्थिति माना गया है। साबुत अनाज की श्रेणी में प्राकृतिक रूप से तैयार बिना पॉलिश वाले चावल, गेहूं और साबुत दालें शामिल हैं। दूसरी ओर पारंपरिक मोटे अनाज यानी मिलेट्स के तहत ज्वार, मक्का, बाजरा, रागी और कुटकी जैसे पौष्टिक दाने आते हैं। पोषण विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि सामान्य साबुत अनाज की तुलना में मोटा अनाज हर पैमाने पर सेहत के लिए अधिक गुणकारी और लाभकारी है। मोटे अनाज के सेवन से शरीर को पर्याप्त मात्रा में रफेज और फाइबर प्राप्त होता है, जो आंतों को साफ रखने के साथ पूरी सेहत को लंबे समय तक चुस्त-दुरुस्त रखता है। इसके अलावा मोटे अनाजों में ढेरों आवश्यक विटामिन्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो दिनभर शरीर में ऊर्जा का स्तर ऊंचा बनाए रखते हैं और रक्त शर्करा को अचानक बढ़ने से रोकते हैं।
एक चौथाई प्लेट में प्रोटीन और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत
संतुलित थाली के अंतिम चरण में डॉक्टर ओंकार स्वामी ने स्पष्ट किया है कि प्लेट का बचा हुआ एक चौथाई हिस्सा अनिवार्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन से भरा होना चाहिए। हमारे देश में अधिकांश लोगों के दैनिक आहार में प्रोटीन की मात्रा जरूरत से काफी कम देखी जाती है, इसलिए भोजन में इसकी मात्रा बढ़ाना बेहद जरूरी कदम है। प्रोटीन शरीर के भीतर होने वाली टूट-फूट और कमजोर पड़ चुकी कोशिकाओं की मरम्मत करने के लिए बुनियादी ईंधन का कार्य करता है। मांसपेशियों की मजबूती और अंगों के नवीनीकरण के लिए प्रोटीन की नियमित आपूर्ति अपरिहार्य है। जो लोग मांसाहारी भोजन का सेवन करते हैं, वे अपनी थाली में उबले अंडे, ताजी मछली और चिकन ब्रेस्ट जैसे विकल्पों को प्रमुखता से शामिल कर सकते हैं। वहीं जो लोग पूरी तरह शाकाहारी जीवनशैली अपनाते हैं, वे प्रोटीन की दैनिक पूर्ति के लिए गाढ़ी दालें, ताजा पनीर, टोफू, सोयाबीन, विभिन्न प्रकार की बींस तथा बादाम-अखरोट जैसे सूखे मेवों का नियमित इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सुविचारित अनुपात से तैयार की गई थाली क्रोनिक बीमारियों से बचाव की सबसे मजबूत नींव साबित हो सकती है।



















