अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार में सितंबर का महीना मैक्सिकन पेसो के लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। 22 सितंबर के बाद से मैक्सिकन मुद्रा में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4 प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट देखी गई है। हालांकि हालिया कारोबारी सत्र में मामूली स्थिरता के संकेत मिले हैं, लेकिन बाजार के जानकारों का मानना है कि सामान्य वृहद आर्थिक आंकड़े और बैंक्सिको (मैक्सिको का केंद्रीय बैंक) का नीतिगत रुख इस तेज कमजोरी को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाते हैं। सामान्य आर्थिक कारकों के आधार पर पेसो की हालिया कमजोरी का केवल लगभग एक तिहाई हिस्सा ही स्पष्ट होता है, जबकि शेष दबाव मैक्सिको केंद्रित विशेष जोखिमों और बाजार पोजिशनिंग की वजह से बना हुआ है।
व्यापार समझौते की वार्ता टलने से उपजी अनिश्चितता
मैक्सिकन पेसो पर बने दबाव के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के बीच होने वाले व्यापार समझौते (यूएसएमसीए) से जुड़ी अनिश्चितताएं हैं। पिछले सप्ताह इस समझौते की वार्ता के नए दौर को स्थगित कर दिया गया था। वार्ता टलने की इस घटना ने बाजार में द्विपक्षीय व्यापार शर्तों और क्षेत्रीय आर्थिक तालमेल को लेकर नए जोखिम खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों ने मैक्सिकन परिसंपत्तियों पर अतिरिक्त जोखिम प्रीमियम लगाना शुरू कर दिया, जिससे मुद्रा में तेज बिकवाली देखी गई। जानकारों का कहना है कि लंबे समय से यह धारणा रही है कि मैक्सिकन पेसो से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और हालिया गिरावट ने इस रुख की पुष्टि की है। इसके बावजूद, यह उम्मीद भी बनी हुई है कि उभरते बाजारों के प्रति धारणा में सुधार और डॉलर में संभावित नरमी आने वाले समय में पेसो को सहारा दे सकती है।
डॉलर का दबदबा और अन्य वैश्विक मुद्राओं का हाल
केवल मैक्सिकन पेसो ही नहीं, बल्कि कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राएं भी अमेरिकी डॉलर के व्यापक दबाव का सामना कर रही हैं। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6900 के मध्य स्तर के करीब दो महीने के निचले स्तर पर कंसोलिडेट होता नजर आया। अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) के आंकड़ों ने अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं को कुछ हद तक शांत किया है। इसके बावजूद, कच्चे तेल की कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है। दूसरी तरफ, अगस्त के महीने में ऑस्ट्रेलिया का व्यापार अधिशेष तेजी से गिरकर 49.5 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD495M) रह गया, जिसका मुद्रा जोड़ी पर सीमित असर देखा गया।
इसी तरह जापानी येन के खिलाफ डॉलर (USD/JPY) एशियाई सत्र में अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर पर 158.00 से ऊपर बना रहा। बैंक ऑफ जापान की आक्रामक नीतिगत उम्मीदों और जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित दखल के जोखिम के बावजूद, डॉलर की सुरक्षित निवेश वाली मांग ने इसे मजबूती दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते गतिरोध ने सेफ-हेवन के रूप में डॉलर को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है। वहीं यूरोप की बात करें तो यूरो बनाम डॉलर (EUR/USD) गिरकर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक लुढ़क गई, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट के कारण यूरो पर यह भारी दबाव देखने को मिला है, हालांकि यूरोजोन में महंगाई का नया झटका यूरो को अप्रत्याशित राहत भी दे सकता है।
सोने और डिजिटल परिसंपत्तियों पर असर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों पर टिके रहने का सीधा असर सराफा बाजार पर भी पड़ा है। यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोना 4,200 डॉलर के स्तर के करीब मामूली बढ़त बनाने के बाद लगभग सपाट कारोबार करता नजर आया। बुधवार को उम्मीद से कम महंगाई आंकड़ों के बावजूद डॉलर की जोरदार खरीदारी जारी रही, जिससे बिना ब्याज वाली धातु यानी सोने की मांग पर लगाम लगी रही। वित्तीय बाजारों में सुरक्षित संपत्तियों की तरफ निवेशकों का आकर्षण केवल नकदी तक सीमित दिखा।
डिजिटल एसेट बाजार में भी इसका प्रभाव महसूस किया गया। हाइपरलिक्विड (HYPE) में गुरुवार को 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले दिन की 5 प्रतिशत की बढ़त घट गई। संस्थागत निवेशकों की मांग में सुस्ती देखी गई, जिसमें बुधवार को 50 लाख डॉलर (5 मिलियन डॉलर) का आउटफ्लो हुआ। 90 डॉलर के स्तर के नीचे सीमित रहने के कारण इसका तकनीकी परिदृश्य निकट अवधि में मिलाजुला बना हुआ है। पूरे वैश्विक परिदृश्य में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती बाकी सभी परिसंपत्तियों के रुख को तय कर रही है।

















